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हम अपना भोजन साथ लेकर आये हैं, सरकारी भोजन नहीं चाहिए

  • विज्ञान भवन में वार्ता का दौर जारी है

  • कृषि मंत्री तोमर का प्रस्ताव खारिज हुआ

  • कई राज्यों के किसान भी अब बढ़ रहे हैं

  • बाहर बैठकर आराम से रोटी खायी किसानों ने

राष्ट्रीय खबर

नईदिल्लीः हम अपना भोजन साथ लेकर आये हैं। यह कहकर विज्ञान भवन पहुंचे किसान

नेताओं ने सरकार द्वारा किये गये भोजन की व्यवस्था से कन्नी काट ली। किसान

नेताओं में से 40 लोगों का एक शिष्टमंडल आज फिर सरकार से वार्ता के लिए पहुंचा था।

इस बैठक में केंद्र सरकार की तरफ से तीन केंद्रीय मंत्री शामिल हुए थे। बैठक स्थल के

बाहर यह नजारा देखा गया कि एक वैन में लाये गये भोजन को किसान नेताओं ने अपनी

अस्थायी टेबल पर रखकर अपना भोजन समाप्त किया। इस दौरान कुछ लोग जमीन पर

बैठकर भी भोजन करते देखे गये। लेकिन इनलोगों ने सरकारी भोजन लेने से साफ तौर पर

इंकार कर यह संकेत भी साफ कर दिया कि फिलहाल वे सरकार के सामने झूकने के लिए

तैयार नहीं हैं। बाद में एक किसान नेता ने कहा कि यहां बहुत गंभीर वार्ता चल रही है, जिस

पर पूरे देश का भविष्य निर्भर है। हम यहां चाय पीने अथवा भोजन करने नहीं आये हैं। केंद्र

सरकार की तरफ से कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर के साथ पियूष गोयल और सोम प्रकाश को

इसमें शामिल हुए। याद रहे कि किसानों ने तीन कृषि कानूनों को वापस लेने के लिए संसद

का आपातकालीन सत्र बुलाने की मांग कर दी है। उनके समर्थन में अब कई संगठन भी

आये गये हैं। इनलोगों ने चेतावनी दी है कि अगर सरकार का यही रवैया रहा तो आगामी 8

दिसंबर से वह दिल्ली की तरफ आने वाली हर सड़क पर चक्का जाम कर देंगे। इससे पहले

केंद्रीय कृषि मंत्री की तरफ से इस पूरे मुद्दे पर विचार के लिए एक कमेटी बना देने की बात

कही गयी थी। इस कमेटी में किसान और सरकार के अलावा विशेषज्ञ भी होंगे।

हम अपना भोजन कहने वालों ने कृषि मंत्री को नकार दिया

लेकिन किसानों ने उनके प्रस्ताव को सुनने से इंकार कर दिया है। वार्ता के जारी रहने के

बीच ही दिल्ली के पड़ोसी राज्यों से भी किसानों के दिल्ली की तरफ कूच करने की सूचनाएं

आने लगी हैं। मध्यप्रदेश के करीब दो हजार किसान राजस्थान की सीमा पर पहुंच चुके हैं।

इसी बीच ट्रांसपोर्टरों और मंडी के व्यापारियों ने भी किसान आंदोलन का अपनी तरफ से

समर्थन देने का एलान कर दिया है। इससे पहले पंजाब के सीएम कैप्टकन अमरिंदर सिंह

ने आज केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से भेंट की। पंजाब के सीएम ने दोनों पक्षों से बातचीत

के जरिये मामले का हल निकालने की अपील की है। उन्होंने कहा कि यह ऐसा मसला है,

जिसे पूरी गंभीरता के साथ सुलझाया जाना चाहिए। वार्ता के दौरान सरकार की तरफ से

यह जानकारी मांगी गयी कि वे कौन से मुद्दे हैं, जिनपर किसानों को आपत्ति है। दूसरी

तरफ किसानों ने साफ तौर पर इन कानूनों को ही खारिज करने की मांग की है। किसानों

को यह भय सता रहा है कि जिस तरीके से इसे लाया गया है, उसमें न्यूनतम समर्थन

मूल्य को निष्क्रिय कर दिया जाएगा। वैसे भी व्यापारिक घरानों को इन कानूनों से

किसानो पर हक जमाने का अधिकार भी मिल जाएगा। किसान आंदोलन की गंभीरता को

इस बात से भी समझा जा सकता है कि पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल सहित

कई लोगों ने अपने राष्ट्रीय सम्मान लौटाने का एलान तक कर दिया है।

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