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त्रिपुरा-बांग्लादेश के बीच विभाजन से पूर्व का जलमार्ग फिर से बहाल

  • भारत और बांग्लादेश के रिश्तों में एक नए युग की शुरुआत
भूपेन गोस्वामी

गुवाहाटी :त्रिपुरा-बांग्लादेश  की सीमा लगभग 4096.7 किमी. लंबी है। उल्लेखनीय है

बांग्लादेश के साथ भारत की सीमा उसके किसी भी अन्य पड़ोसी देश से सबसे अधिक है।

विदित है कि भारत और बांग्लादेश आपस में 54 नदियाँ साझा करते हैं। उत्तर पूर्व जल

परिवहन प्राधिकरण के एक वरिष्ठ अधिकारी ने आज गुवाहाटी में कहा कि दरअसल दोनों

देशों में विभाजन से पहले का नदी जल परिवहन संपर्क फिर से बहाल हो गया है। हाल ही

में बांग्लादेश अंतर्देशीय जल परिवहन प्राधिकरण ने त्रिपुरा के सोनामुरा बंदरगाह और

पड़ोसी देश के चिटगांव संभाग के दाउदकंदी बंदरगाह के बीच मालवाहक पोत की

आवाजाही को मंजूरी आज दे दी है।

प्राधिकरण ने इस साल 20 मई को इसकी मंजूरी दी थी और कहा था कि भारत बांग्लादेश

के बीच प्रोटोकॉल के तहत अंतर्देशीय जल परिवहन और व्यापार होगा। दोनों देशों के पोत

निर्धारित रूट से बंदरगाहों के बीच चलेंगे। इससे द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ावा मिलेगा।

इससे कारोबारियों को लाभ होगा और दोनों देशों के लोगों का भरोसा बढ़ेगा।जलमार्ग

परिवहन का सबसे सस्ता माध्यम है और इसमें रखरखाव लागत भी कम आती है। इस

जलमार्ग को फिर से खोलना एक गेम चेंजर साबित होगा। इससे कारोबारियों को लाभ

होगा और दोनों देशों के लोगों का भरोसा बढ़ेगा। उत्तर पूर्व जल परिवहन प्राधिकरण के

अधिकारी ने कहा कि यह भारत और बांग्लादेश दोनों के लिए फायदे का सौदा होगा।

गोमती नदी पर सोनामुरा से दाउदकंदी का 93 किलोमीटर लंबा रूट त्रिपुरा का पहला

प्रोटोकॉल रूट होगा। त्रिपुरा सरकार ने जहाजरानी मंत्रालय की मदद से पहले ही एक

अस्थायी बंदरगाह तैयार कर लिया है, जहां सामान की लोडिंग अनलोडिंग होगी। सितंबर

के पहले हफ्ते में ट्रायल रन के तहत इस जल मार्ग से 50 मीट्रिक टन सीमेंट ढाका से

सोनामुरा पहुंचेगा।

त्रिपुरा-बांग्लादेश के बीच 1972 में पहला व्यापार समझौता हुआ था

भारत-बांग्लादेश व्यापार समझौते को अंतिम बार जून 2015 में स्वतः नवीनीकरण के

प्रावधान के साथ 5 वर्षों की अवधि के लिये नवीनीकृत किया गया था। भारत और

बांग्लादेश के बीच द्विपक्षीय व्यापार पिछले एक दशक में लगातार बढ़ा है।


 

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