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उत्तरी बंगाल में तिस्ता सहित सभी नदियां उफान पर

  • अनेक गांवों में अंदर आ गया बाढ़ का पानी

  • खेती की जमीन भी बाढ़ में जलमग्न

  • अनेक इलाकों में कटान का खतरा

  • रतजगा कर सावधान है ग्रामीण

प्रतिनिधि

जलपाईगुड़ीः उत्तरी बंगाल में सभी नदियों का जलस्तर अब खतरे के निशान से ऊपर

पहुंच गया है। इस बार काफी तेजी से जल स्तर के ऊपर आने की वजह से अनेक गावों में

बाढ़ का पानी बिना किसी पूर्व सूचना के ही प्रवेश कर गया। गांव के अंदर पानी आने के

पहले गांव के बाहर खेतों में लगी फसल भी डूब चुकी है। इससे लोगों को बाढ़ से इस बार

अधिक नुकसान होने का अंदेशा है। वैसे भी कोरोना की वजह से इलाके के लोगों का

औसतन हाथ खाली ही हो चुका है।

पहाड़ी इलाकों में हो रही जोरदार बारिश की वजह से पहाड़ों से नदियों का पानी तेजी से

नीचे आ रहा है। यहां की सबसे बड़ी नदियों से एक तिस्ता की हालत इतनी बिगड़ी कि वहां

के गजलडोबा बैराज से तीन हजार क्यूसेक पानी आनन फानन में छोड़ना पड़ा। अचानक

पीला और लाल संकेत दिये जाने की वजह से लोगों को इसकी तैयारी करने का भी मौका

नहीं मिला। भीषण बारिश जारी रहने के बीच ही नदी का पानी गांव में तेजी से घुसता चला

जा रहा है। किसी किस्म के जान माल का नुकसान नहीं होने के बाद भी यह आशंका बनी

हुई है कि नदी के किनारे बसे गांव अब कटान की चपेट में फिर से आ सकते हैं। कुछेक

इलाकों में बड़े भूखंड के अचानक से कटकर पानी में समाने की घटनाएं हो चुकी हैं।

उत्तरी बंगाल के कई इलाकों में अचानक घुस आया पानी

नदी के करीब वाले खड़िया पंचायत के कई गावों में इस बाढ़ का असर देखा जा रहा है।

इलाके के लोगों के संपर्क पथ के दौर पर बांस के दो पुल ग्रामीणों द्वारा ही बनाये गये थे।

इस बार अचानक पानी आने की वजह से यह दोनों पुल पानी में डूबे हुए हैं। अचानक की

इस परिस्थिति को भांपते हुए सरकारी अफसरों ने कुछ लोगों को वहां से सुरक्षित भी हटा

लिया है। बाकी लोगों तक किसी तरह गुड़ और चूड़ा पहुंचाया गया है। उसके लिए भी

लकड़ी के पट्टो को बांधकर तैयार किये गये अस्थायी नाव के सहारे लोगों का आना जाना

हो रहा है। मिली जानकारी के मुताबिक तोर्षा, कालजानि, रायडक, मानसाई जैसी नदियों

में भी जल स्तर ऊपर आ गया है। इस वजह से भूकटान की घटनाएं तेजी से बढ़ती जा रही

है। कूचबिहार शहर के रानीबगान, फांसी घाट, कारिशाल, टाकागाछ जैसे कुछ इलाकों में

बाढ़ का पानी प्रवेश कर गया है। शहर के फांसी घाट इलाके की हालत सबसे खराब है। वर्ष

2017 में यहां के दो सौ घर अचानक से जमीन कटान की वजह से नदी में समा गये थे। इस

वजह से भी लोग आतंकित हैं। खतरा कभी भी होने की आशंका में ही लोग अब रतजगा भी

कर रहे हैं ताकि किसी किस्म का खतरा होने पर लोगों को आगाह किया जा सके।


 

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