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जलकुंभी सफाई यानी कल भी था आज भी है और कल भी रहेगा

रांची: जलकुंभी सफाई का कुछ परिणाम तो बड़ा तालाब में अब दिखने लगा है। इस बार करीब

एक दर्जन मछुआरों को पानी से जलकुंभी खींचकर किनारे लाने के काम में लगाया गया

है। किनारे पर नगर निगम की जेसीबी लगी हुई है जो उन्हें खींचकर बाहर निकलाती है

और वहां लगने वाले नगर निगम के ट्रेक्टर उन्हें ढोकर ले जाते हैं। इससे अब बड़ा तालाब

के कुछ हिस्सों में पानी नजर आने लगा है। गनीमत है कि इस बीच तीन दिनों से बारिश

नहीं हुई वरना फिर से नालों का पानी अगर बड़ा तालाब के अंदर आता तो सारी जलकुंभी

इधर उधर बिखरकर तैरने लगती। वैसी स्थिति में उन्हें जल्दी जल्दी निकाल पाना शायद

संभव नहीं होता। लेकिन जो इस जगह को नियमित तौर पर देख रहे हैं, उन्हें अच्छी तरह

पता है कि इस तरह के अभियान पहले भी चलाये गये थे। तालाब लगभग पूरा साफ होने

के पहले ही यह काम रोक दिया जाता था। जिसके बाद फिर से जलकुंभी बढ़ने लगती है।

पूरा साफ होने पर यह सवाल लोगों के जेहन में कौंधता कि आखिर इसकी असली वजह

क्या है। पूरा साफ होने के बाद वहां जलकुंभी कहां से आयी, इसकी तरफ अगर लोगों का

ध्यान जाता तो वे चेहरे भी नजर आने लगते जो इस ठेका के खेल में पिछले दस वर्षों से

कमाई कर रहे हैं।

जलकुंभी सफाई में आधुनिक तकनीक से परहेज किसे हैं

दूसरी तरफ सुझाव दिये जाने के बाद भी यहां आधुनिक यंत्रों से कम समय में पूरी

जलकुंभी की सफाई का फैसला नहीं लिये जाने की वजह भी कुछ न कुछ तो होगी। वरना

पूरा साफ होने अथवा इस बड़ा तालाब के अंदर जमे गाद को निकाले जाने के बाद हमेशा

चलने वाला टेंडर का यह खेल बंद हो जाता। इसलिए तय मानिये कि जलकुंभी निकालने

का यह खेल पहले से चलता आ रहा है। अभी भी चल रहा है और यकीन मानये कि आगे

भी यह चलता रहेगा।


 

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