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टूजी और थ्री जी घोटाला तो क्या सिर्फ प्रचार था




टूजी और थ्री जी घोटाला ने देश की राजनीति को बदलने का काम किया है। यह अलग बात है कि अदालत में मामला चलने के बाद भी यह आरोप प्रमाणित नहीं हो पाये हैं। यह माना गया है कि जिन घोटालों का उल्लेख तत्कालीन सीएजी ने किया था वह महज अनुमान पर आधारित थे।




अब देश में 5जी के दौरान भी वह आर्थिक अवसर पैदा नहीं हो पाये हैं, जिनकी उम्मीद थी। सस्ते दर पर स्पेक्ट्रम देने के बाद अब केंद्र सरकार को दूरसंचार उद्योग के लिए अलग से आर्थिक पैकेज का एलान करना पड़ा है।

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने स्पेक्ट्रम से जुड़ा भंगतान चार साल तक टालने समेत कई उपायों को मंजूरी दे दी। इस क्षेत्र में निवेश को प्रोत्साहित करने के लिए सुरक्षा उपायों के साथ स्वत: मार्ग के जरिये 100 फीसदी प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) की अनुमति भी दी गई है। इसका एक अर्थ है कि आर्थिक लाभ का जो अनुमान पूर्व में व्यक्त किया गया था, उसका कोई वास्तविक आधार नहीं था।

देश में स्वर्गीय राजीव गांधी के कार्यकाल में जिस दूरसंचार क्रांति की नींव रखी गयी थी वह डॉ मनमोहन सिंह के कार्यकाल तक टूजी और थ्री जी तक पहुंची थी।

इसी दौरान डॉ सिंह के सरकार में मौजूद लोगों पर इस टूजी और थ्री जी के स्पेक्ट्रम आवंटन में घोटाला कर लाखो करोड़ की कमाई करने का आरोप भाजपा ने सिर्फ इस आधार पर लगाया था कि सीएजी की रिपोर्ट में ऐसा कहा गया है। बाद में तत्कालीन सीएजी विनोद राय की भाजपा से नजदीकी भी प्रमाणित तथ्य है।

अब केंद्र सरकार द्वारा राहत की घोषणा किये जाने के बाद भारती एयरटेल के चेयरमैन सुनील भारती मित्तल ने कहा, ‘नए सुधारों से भरोसा मिलता है कि कि उद्योग निडर होकर निवेश करने और देश के डिजिटल अभियान को बढ़ावा देने में सक्षम होगा।

टू जी और थ्री जी के आरोपों को आज के संदर्भ में देखना होगा

यह ठोस पहल 1999 की राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन सरकार के निर्णय की याद दिलाती है, जब दूरसंचार उद्योग को प्रोत्साहित किया गया था और सभी भारतीयों के लिए किफायती मोबाइल सेवाओं का युग शुरू हुआ था।’

संचार मंत्री ने कहा कि इन उपायों से दूरसंचार सेवा प्रदाताओं की तरलता तथा नकदी प्रवाह बढ़ेगा और उन बैंकों को भी मदद मिलेगी, जिन्होंने इस क्षेत्र में निवेश किया हुआ है। मंत्रिमंडल ने समायोजित सकल राजस्व (एजीआर) बकाये के भुगतान तथा अन्य देनदारियों के भुगतान के लिए चार साल की मोहलत भी दी है।




यह मोहलत या मॉरेटोरियम इसी साल 1 अक्टूबर से लागू होगी। लेकिन यह योजना वैकल्पिक होगी और जो कंपनी इसका लाभ लेना चाहेगी, उसे बकाये पर एमसीएलआर से ऊपर 2 फीसदी की दर से ब्याज का भुगतान करना होगा। पिछली नीलामी (2021 को छोड़कर) में खरीदे गए स्पेक्ट्रम के बकाये का भुगतान चार साल तक टाला गया है और इस पर ब्याज का भुगतान किया जाएगा तथा यह राशि एनपीवी के द्वारा सुरक्षित होगी।

केंद्र सरकार के निर्णय से इन दूरसंचार कंपनियों को मॉरेटोरियम अवधि समाप्त होने के बाद बकाया राशि का भुगतान करना होगा अन्यथा सरकार टाले गए भुगतान को इक्विटी में बदलने का विकल्प अपना सकती है। इसे वित्त मंत्रालय द्वारा अंतिम रूप दिया जाएगा। दूरसंचार क्षेत्र में सुरक्षा उपायों के साथ स्वत: मार्ग के जरिये 100 फीसदी एफडीआई की अनुमति दी गई है।

वर्तमान में दूरसंचार क्षेत्र में स्वत: मार्ग के जरिये 49 फीसदी एफडीआई की अनुमति है। एफडीआई की अनुमति उन देशों से है, जहां से केंद्र सरकार ने भारत में निवेश करने की अनुमति दी है।

जो पहले विरोध करते थे उन्होंने अब विदेशी पूंजीनिवेश की मंजूरी दी

टूजी और थ्री जी घोटाले का आरोप लगाने वाले उस समय इसी मुद्दे पर विदेशी पूंजी निवेश का विरोध कर इसे राष्ट्र के लिए खतरा बता रहे थे।

सर्वोच्च अदालत के निर्णय के साथ किसी तरह का विवाद न हो, इसके लिए सरकार ने एजीआर की परिभाषा को तर्कसंगत बनाने का निर्णय किया है। सर्वोच्च न्यायालय ने अक्टूबर 2019 में दिए अपने आदेश में कहा था कि एजीआर की परिभाषा में गैर-दूरसंचार राजस्व भी शामिल है।

दूरसंचार विभाग के अनुमान के अनुसार वोडाफोन आइडिया पर 58,254 करोड़ रुपये और भारती एयरटेल पर 43,980 करोड़ रुपये का एजीआर बकाया है। वोडाफोन आइडिया ने इस मद में 7,854 करोड़ रुपये और भारती एयरटेल ने 18,004 करोड़ रुपये का भुगतान किया है।

लाइसेंस शुल्क तथा अन्य शुल्क के एवज में दी जाने वाली बैंक गारंटी को भी तर्कसंगत बनाकर उसे कम किया गया है। भविष्य में होने वाली स्पेक्ट्रम नीलामी के लिए किस्तों के भुगतान की सुरक्षा के लिए बैंक गारंटी देने की आवश्यकता को भी अब खत्म कर दिया गया है।

कंपनियां भविष्य में अगर स्पेक्ट्रम लेती हैं और बाद में वापस करना चाहे तो 10 साल बाद स्पेक्ट्रम लौटाने की अनुमति होगी। इसलिए अब यह माना जा सकता है कि कभी टूजी और थ्री जी घोटाले की बात करने वाले अब वास्तविकता के धरातल पर हैं।



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