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युद्ध जैसी तैयारी के हालात भारत और पाकिस्तान सीमा पर

  • दोनों देश मिलकर लड़ेंगे यह लड़ाई

  • पूर्वी अफ्रीका के देशों में अकाल जैसी हालत

  • कई इलाकों में अब भी रेगिस्तान में पनप रहे हैं

  • एक दिन में औसतन दो सौ टिड्डी खा लेता है बत्तख

प्रतिनिधि

नईदिल्लीः युद्ध जैसी तैयारी के हालात हैं। यह स्थिति भारत और पाकिस्तान की सीमा पर

है। इस इलाके में लगातार निगरानी रखी जा रही है। लेकिन अच्छी बात यह है कि युद्ध

जैसी तैयारी मे दोनों देश एक साथ काम करने की तैयारी है। यानी यह युद्ध जैसी तैयारी

भारत वनाम पाकिस्तान की एक और लड़ाई की नहीं है। दोनों देशों ने अफ्रीका के इलाकों

में हुई तबाही से सबक लेते हुए समय से पहले ही चेत जाने का काम किया है। कोरोना

वायरस से पीड़ित देश चीन ने इस संकट की घड़ी में अपने मित्र देश पाकिस्तान को

प्रशिक्षित बत्तखों की एक फौज भेज दी है। जी हां यह सारी तैयारी इस रेगिस्तानी इलाके

में बढ़ रहे टिड्डी की आबादी को लेकर है। टिड्डियों का झूंड जब आगे बढ़ता है तो पूरी

हरियाली को नष्ट करता जाता है। इसी वजह से युद्ध जैसी तैयारी करनी पड़ी है।

पूर्व अफ्रीका के देशों में हाल ही में अनेक बार टिड्डी के हमले से अकाल जैसी नौबत आयी है। दरअसल इन इलाकों की पूरी फसल ही टिड्डियों के झूंड ने नष्ट कर दिये हैं। करोड़ों से लेकर अरबों की संख्या वाला टिड्डियों का दल जब किसी इलाके की तरफ बढ़ता है तो वहां

की पूरी फसल पलक झपकते ही चट कर जाते हैं। इस हमले से अफ्रीका में उगांडा,

इथोपिया और केन्या जैसे देश बुरी तरह प्रभावित हुए हैं। वहां की कृषि उपज को इस टिड्डी

ने नष्ट कर दिया है। रेगिस्तानी इलाकों में फिर से रेगिस्तानी टिड्डी देखे जाने के बाद

भारत और पाकिस्तानी सीमा पर युद्ध जैसी तैयारी इसी वजह से है।

युद्ध जैसी तैयारी अफ्रीका का हालत देखने के बाद

पिछले माह यानी फरवरी की पांच तारीख को इथोपिया की सीमा पर टिड्डी दल देखा गया

था। वहां से एक समूह उगांडा की तरफ बढ़ता चला गया। लेकिन कुछ टिड्डी अब भी

केन्या के इलाकों में मौजूद हैं। इस मौसम में उनकी वंशवृद्धि काफी तेजी से होती है।

नतीजा है कि तीनों देशों की सरकारें इससे चिंतित हैं। कुछेक इलाकों में टिड्डी मारने के

लिए सैनिकों को भी काम पर लगाया गया है। उगांडा के ओटूके इलाके में विधिवत सेना

इस काम के लिए मैदान में उतर चुकी है। पिछले रविवार को उत्तरी उगांडा के ओटूके

इलाके के एक गांव में किसानों की खेतों पर जब टिड्डी का दल टूट पड़ा तो किसान कुछ

नहीं कर पाये। वहां की सारी फसल नष्ट करता हुआ यह दल केन्या की तरफ बढ़ता जा

रहा है। इससे इलाकों में अकाल जैसी स्थिति पैदा हो चुकी है। भारत और पाकिस्तान के

विशेषज्ञ अफ्रीका के इस हालात से वाकिफ हैं। पाकिस्तान और भारत की सीमा पर इन्हें

देखे जाने की सूचना के बाद ही युद्ध जैसी तैयारी कर ली गयी है। वैसे सउदी अरब के

रेगिस्तान में भी टिड्डियों का झूंड पनपने की खबर आयी है। विशेषज्ञ मानते हैं कि यमन

के इलाकों में पैदा हुआ झूंड पाकिस्तान के बलुचिस्तान इलाके में पहुंचा है। वहां से वे धीरे

धीरे भारतीय सीमा की तरफ बढ़ते हुए अपनी आबादी भी बढ़ाते जा रहे हैं।

चीन ने प्रशिक्षित बत्तख भेजे हैं इस समस्या के लिए

चीन से मिले बत्तखों की मदद से इन्हें समाप्त करने की पहल पाकिस्तान में प्रारंभ कर दी

गयी है। माना जाता है कि एक बत्तख दिन में औसतन दो सो टिड्डी खा जाता है। साथ ही

बत्तख अपने मल त्याग से खेतों में पौष्टिकता भी बढ़ा देते हैं। इसी वजह चीन ने

प्रशिक्षित बत्तखों को पाकिस्तान की मदद के लिए भेजा है। दरअसल यह संख्या में इतने

अधिक होते हैं कि उन्हें मारने के लिए अत्यधिक कीटनाशकों की जरूरत पड़ती है। उनके

आगे बढ़ने की सही सूचना नहीं मिलने की स्थिति में वे दो चार दिन में ही अपनी आबादी

इतनी बढ़ा लेते हैं कि स्थिति नियंत्रण से बाहर चली जाती है। इसी खतरे को देखते हुए

भारत और पाकिस्तान की सीमा पर संयुक्त रुप से तैयारी की जा रही है ताकि युद्ध जैसी

तैयारी के साथ टिड्डी से निपटा जा सके


 

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