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झारखंड राज्य में ही पैदा हुए युवा पहली बार मतदान करेंगे उत्साह से भरपूर







  • झारखंड राज्य का गठन वर्ष 2000 में हुआ था
  • राज्य बनने के बाद पहली बार वोट देंगे वे
  • ऐसे युवाओं की संख्या करीब 4.2 लाख
  • उनकी सोच अपने भविष्य को लेकर है
संवाददाता

रांचीः झारखंड राज्य के गठन के बाद यहां पैदा होने वाले युवा पहली

बार मतदान करेंगे। इस लिहाज से वे पैदाइशी झारखंडी होने की

पहली पीढ़ी होंगे, जो इस विधानसभा चुनाव में भाग लेने जा रहे हैं।

जाहिर है कि आज के दौर में सोशल मीडिया के विस्तार की वजह से

युवाओं में खास तौर पर मतदान के प्रति काफी उत्साह रहता है।

राजनीतिक गतिविधियों में सक्रिय नहीं होने के बाद भी मतदान के

बाद अपनी तस्वीर सोशल मीडिया में अपलोड करने का प्रचलन जोरों

पर हैं। इस लिहाज से झारखंड के गठन के बाद जो लोग यहां पैदा हुए

हैं, उनके लिए मतदान का यह पहला अवसर होगा।

झारखंड राज्य का गठन  वर्ष 2000 में हुआ था

राज्य चुनाव आयोग में मौजूद आंकड़ों के मुताबिक इस बार के चुनाव

में 18-19 वर्ष के मतदाताओं की संख्या करीब 4.2 लाख है। राज्य में

कुल मतदाताओं की संख्या बढ़कर अब 2,76,17,372 पहुच गयी है।

राज्य गठन के वक्त हमेशा ही इसकी आबादी के बारे में पौने तीन

करोड़ का उल्लेख किया जाता रहा है।

इस लिहाज से अब माना जा सकता है कि झारखंड में इतने वर्षों में छह

लाख से अधिक मतदाता बढ़ गये हैं। इनमें से 4.2 लाख युवा मतदाता

ही हैं।

प्रतिशत के लिहाज से यह सिर्फ डेढ़ प्रतिशत होने के बाद भी मतदान

की इनकी सहभागिता से चुनाव परिणाम इधर से उधर हो सकते हैं।

चुनावी बिसात की वजह से पहले से ही इस बात की संभावना व्यक्त

की जा रही है कि इस बार के चुनाव में कांटे की टक्कर होने जा रही है।

राज्य के गठन के बाद पहली बार मतदाता बने

अलग झारखंड राज्य के गठन के बाद यहां शिक्षा का माहौल बदला है।

लिहाजा राज्य अथवा बिहार के कई इलाकों के छात्र-छात्राएं अब

कोचिंग के लिए भी यहां आते हैं। इससे युवाओं की सोच को भी

समझने का अच्छा अवसर प्राप्त होता है। संक्षिप्त सर्वेक्षण का

निष्कर्ष यही है कि आज के दौर के युवा, जिनमें से अधिकांश पहली

बार मतदान करने जा रहे हैं, अपने जीवन को लेकर काफी गंभीर हैं।

वर्तमान पीढ़ी के युवाओं के लिए अन्य बातों के मुकाबले अपने भविष्य

को संवारना ज्यादा अहम मसला बना हुआ है।

इस लिहाज से ऐसे मतदाताओं का फैसला उनकी अपनी समस्याओं

के निराकरण के आधार पर हो सकता है।

हल्की और अनौपचारिक बात-चीत में जो मुद्दे रेखांकित किये जा

सकते हैं, उनमें रोजगार, बेहतर स्वास्थ्य सेवा और शिक्षा के बेहतर

अवसर ही पहली बार के मतदाताओं की शीर्ष प्राथमिकता है।

ग्रामीण परिवेश से आने वाले इस शिक्षा के व्यय की वजह से बेहतर

शिक्षा को अन्यत्र फैलाने की भी महत्वपूर्ण मानते हैं। उनके मुताबिक

घर के पास अगर ऐसी सुविधा हो तो वे क्यों इतना पैसा खर्च कर रांची

में रहेंगे और पढ़ाई करेंगे।

यह भी घर के लिए एक अतिरिक्त आर्थिक बोझ है। इसी सोच की

वजह से वे जल्दी पढ़ाई पूरी कर रोजगार पाना चाहते हैं।



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