बृहस्पति के चांद पर ज्वालामुखी विस्फोट

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  • नासा के यान के कैमरे ने कैद की घटना
  • बृहस्पति ग्रह के अपने कुल चार चांद हैं
  • ग्रह के सबसे करीब और छोटा है जून
  • ज्वालामुखी विस्फोट यानी अंदर लावा है

प्रतिनिधि

नईदिल्लीः बृहस्पति ग्रह के सबसे करीबी चंद्रमा पर भी ज्वालामुखी विस्फोट हो रहा है।

अंतरिक्ष में हर रोज कुछ न कुछ नया देखा जा रहा है।

जैसे जैसे अंतरिक्ष विज्ञान का विकास हो रहा है, वहां से मिलने वाले आंकड़ों के आधार पर नई जानकारियां सामने आ रही हैं।

इस कड़ी में नई जानकारी बृहस्पति ग्रह के निकटतम चांद पर ज्वालामुखी का विस्फोट है।

वहां हो रहे विस्फोटों को नासा के यान जूनो के कैमरे ने कैद किया है।

नासा का यह यान इस ग्रह के चक्कर काट रहा है।

उस ग्रह के हालात का जायजा लेने इस यान को रवाना किया गया था।

जूपिटर यानी बृहस्पति का चक्कर काटने के क्रम में अपनी 16वीं परिक्रमा में इस यान के कैमरे से वहां के सबसे नजदीकी चंद्रमा पर होने वाले ज्वालामुखी विस्फोट की घटनाओं को दर्ज किया है।

बता दें कि इस ग्रह के ईर्द गिर्द चार चंद्रमा है।

इन चंद्रमाओं जैसे उपग्रहों को जून, यूरोपा, गैनिमेड और कैलिस्टो नाम से जाना जाता है।

इनकी खोज वर्ष 1610 में उस काल के महान वैज्ञानिक गैलेलियो ने की थी। इनमें से जून अपने मूल ग्रह के सबसे करीब है। यह सभी आकार में काफी बड़े हैं।

जून के बगल से गुजरते हुए नासा के यान ने बृहस्पति के बारे में अब तक काफी कुछ सूचनाएं भेजी हैं।

इसी क्रम में उसके सबसे निकटस्थ चांद के एक छोर पर हो रहे ज्वालामुखी विस्फोट की घटनाओं को दर्ज किया गया है।

यान पर लगे कई उपकरणों ने अपने विश्लेषण के आधार पर वहां इस किस्म का विस्फोट होने की जानकारी नासा के नियंत्रण कक्ष तक भेजी है।

इस अभियान दल के मुख्य अधिकारी स्कॉट बोल्टन ने कहा कि यह अपने आप में बिल्कुल नई सूचना है, जिसकी उम्मीद किसी को नहीं थी।

उन्होंने स्पष्ट किया कि गत 21 दिसंबर को यह यान जूपिटर के छाया क्षेत्र में चला गया था।

इस छाया क्षेत्र में जाने के पूर्व 12 बजे के करीब यान के उपकरणों ने लो के ध्रुवीय इलाकों की तस्वीरें भेजी थी।

इनके विश्लेषण से इस बात का खुलासा हुआ कि कैमरे ने दरअसल जिन तस्वीरों को कैद दिया है, वे ज्वालामुखी विस्फोट की घटनाएं हैं।

वैज्ञानिक इस बात से हैरान है कि जूपिटर के छाया क्षेत्र में होने के दौरान कड़ाके की ठंड वाले इस चंद्रमा पर ऐसे ज्वालामुखी विस्फोट भी हो सकते हैं।

वैज्ञानिकों का अनुमान है कि बृहस्पति पर होने वाले तरंग बदलावों का असर उसके चंद्रमाओं पर भी पड़ता है।

इसी वजह से ठंडा होने के बाद भी इनके अंदर से लावा फूटकर बाहर निकल आता है। यानी इस चंद्रमाओं के अंदर भी उबलता हुआ लावा अब भी मौजूद है।

नासा का यह यान वर्ष 2021 तक अपना सारा काम पूरा कर पृथ्वी पर वापस लौट आयेगा।

इस लिहाजा से ज्वालामुखी विस्फोट की जानकारी मिलने के बाद वैज्ञानिक इस यान की मदद से कुछ और नई सूचनाओं की उम्मीद बांधे बैठे हैं।

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