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देशी जुगाड़ से बनाया एक सौ मीटर लम्बा व 12 फीट ऊँचा झूलता पुल

  • गांव के बच्चों की पढ़ाई बरसात में होती थी बाधित

  • उफान होने पर आर पार जाना भी कठिन हो जाता था

  • राष्ट्रीय खबर के ब्यूरो चीफ ने किया सम्मानित

हेरहंजः देशी जुगाड़ से बना एक पुल इलाके के लोगों के लिए वरदान साबित हो सकता है।

प्रखंड मुख्यालय से सटे सलैया पंचायत अंतर्गत कटांग नदी में गांव के युवाओं व

अभिभावकों ने मिलकर देशी जुगाड़ से बनाया लगभग 100 मीटर लम्बा व 12 फीट ऊँचा

झूलता पुल।

वीडियो में देखिये पुल और राष्ट्रीय खबर द्वारा उनका सम्मान

ज्ञात हो कि प्रत्येक वर्ष बरसात के महीनों में नदी में अत्यधिक बाढ़ आने के कारण प्रखंड

मुख्यालय से लगभग दर्जनों गांवों का संपर्क टूट जाता था।लोग हाट बाजार व बच्चे स्कूल

नहीं आ पाते थे। सबसे ज्यादा जो बच्चे प्रतिदिन पढ़ाई करने हेरहंज आते हैं, उनको काफी

दिक्कतों का सामना करना पड़ता था। नदी में अत्यधिक पानी का बहाव होने के कारण

बच्चों का पढ़ाई बाधित हो जाती थी। ग्रामीणों ने बताया कि कटांग नदी में पुल निर्माण

करवाने को लेकर हमलोगों ने कई बार विधायक, सांसद, मंत्री व उच्च स्तरीय पदाधिकारी

को लिखित आवेदन भी दिया व निर्माण करवाने का आग्रह किया। कई वर्ष बीत जाने के

बावजूद भी आज तक पुल का निर्माण नही होना दुर्भाग्य की बात है। अंततः ग्रामीणों ने

आपस में बैठक की और बच्चों का पढ़ाई बाधित न हो, लोग हाट बाजार जा सके इसके

लिये यह झुलता हुआ देशी जुगाड़ के माध्यम से पुल बनाया। इसके निर्माण से कम से कम

एक दर्जन गावँ के लोग इस झूलते हुए पुल से जरूरत पड़ने पर हेरहंज आ जा सकेंगे व

अभिभावक अपने बच्चों को नदी पार करा पायेंगे। जिससे नदी में पानी रहने के बावजूद

भी बच्चों का पढ़ाई बाधित नही होगा। लोगों ने बताया कि जिस तरह की देशी सामग्री को

लगाकर इसका निर्माण किया गया है उम्मीद है कि लगभग दो वर्ष तक यह झूलता हुआ

पुल नहीं टूटेगा। इसको बनाने में लगभग एक सप्ताह का समय लगा है

देशी जुगाड़ से पुल बनाने में एक सप्ताह का समय लगा

इस देशी जुगाड़ के माध्यम से झूलता हुआ पुल बनाने वाले ग्रामीणों को राष्ट्रीय खबर के

ब्यूरो चीफ सोनू गुप्ता ने मास्क व गमछा देकर सम्मानित किया। साथ ही करोना को

लेकर डिस्टेंस का खयाल रखने का भी आग्रह किया व इन लोगों को इस पुल को बनाने पर

धन्यवाद भी दिया।

इनसे बना है यह जुगाड़ू पुल

रस्सी, कांटी, कील, बांस, लकड़ी, मोटे मोटे खम्भे, तार, टेम्पर, क्लेम्पू, नट बोल्ट व नदी

के दोनों छोरों के बड़े बड़े वृक्षों को इसका मेन पोल बनाया गया है।

मिलिए पुल के इंजीनियरों से

प्रभात उरांव, निर्मल उरांव,संदीप उरांव,प्रेमचंद उरांव, बीरबल उरांव, जितेंद्र भुइयाँ, श्रवण

राम,कमलेश राम,रविन्द्र राम,सुरेंद्र गंझू,हीरा गंझू सहित लगभग 30 लोगों ने श्रमदान व

देशी जुगाड़ के माध्यम से बनाया झूलता पुल


 

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