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विक्रम लैंडर का रोवर प्रज्ञान सुरक्षित होने का दावा

  • नासा की तस्वीरों और आंकड़ों का अध्ययन किया

  • चैन्नई के विशेषज्ञ ने तस्वीरों को भी सांझा किया

  • लैंडर के मलवों से कुछ ही दूरी पर है यह छोटा यान

  • इसरो ने कहा वह इन तमाम दावों की जांच कर रहा है

प्रतिनिधि

नईदिल्लीः विक्रम लैंडर के अचानक गायब होने की वजह से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित

इसरो के अनेक वैज्ञानिक हताश हुए थे। चंद्रयान 2 के मिशन पर मुख्य यान से अलग होने

के दो मिनट के भीतर ही विक्रम लैंडर से कंट्रोल रुम का संपर्क टूट गया था। अब जाकर

इसके बारे में अच्छी जानकारी यह आयी है कि इस विक्रम लैंडर में भेजा गया चंद्रयान 2

का रोवर प्रज्ञान सुरक्षित है। चेन्नई के एक तकनीकी विशेषज्ञ ने इसका खुलासा किया है।

उन्होंने नासा की तस्वीरों का अध्ययन करने के बाद तमाम आंकडों का विश्लेषण करते

हुए यह कहा है कि यह रोवर पूरी तरह ठीक है। शन्मुघ सुब्रमणियम नाम के इस तकनीकी

जानकार ने अपनी जानकारी सोशल मीडिया पर भी सांझा की है। उन्होंने ही इससे पहले

चांद पर विक्रम लैंडर के क्षतिग्रस्त हिस्से के होने की जानकारी सबसे पहले दी थी। उन्होंने

नासा की तस्वीरों के आधार पर बताया गया है कि यह प्रज्ञान रोवर कुछ मीटर आगे

खिसक गया है।

विक्रम लैंडर दो मिनट बाद खो गया था

याद रहे कि पिछले वर्ष के चंद्रयान 2 के अभियान के अंतिम चरण में उसके विक्रम लैंडर के

चांद पर उतरने की घटना के साक्षी बनने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी भागे भागे पहुंचे थे।

उनके कंट्रोल रुम में होने के दौरान ही विक्रम लैंडर का कंट्रोल रुम से संपर्क टूट गया था।

इससे वहां के वैज्ञानिकों में निराशा छा गयी थी। लेकिन वैज्ञानिक आंकड़ों के मुताबिक इस

पूरे अभियान का सिर्फ यही दो मिनट असफल रहा था। अन्यथा कम ईंधन में अंतरिक्ष की

यात्रा के सारे अन्य प्रयोग पूरी तरह सफल रहे थे। अब इतने दिनों के बाद यह अच्छी खबर

आयी है कि चांद पर इसी विक्रम लैंडर के साथ भेजा गया रोवर यान जिसका नाम प्रज्ञान

रखा गया था, सुरक्षित है। अब यह बताया गया है कि जिस स्थान पर विक्रम लैंडर के टूटे

फूटे हिस्से नजर आये हैं, यह रोवर उससे चंद मीटर की दूरी पर खिसक गया है।

इसकी खोज करने वाले सुब्रमणियम ने कहा है कि रोवर को इस तरीके से खोजना काफी

कठिन काम था। चांद के दक्षिणी ध्रुव पर मौजूद इस विक्रम लैंडर के कबाड़ में और क्या

कुछ सुरक्षित है, उसकी जानकारी से भविष्य के चंद्रयान अभियानों को फायदा होने जा रहा

है। दरअसल चांद के इस हिस्से में रोशनी बहुत कम है। इसी वजह से यहां किसी बाहरी

चीज को खोजने में कठिनाई होती है। शायद इसी कम रोशनी की वजह से नासा के

वैज्ञानिक विक्रम लैंडर का मलबा खोजने के बाद भी इस प्रज्ञान को नहीं देख पाये थे।

लैंडर के मलवे से थोड़ी दूरी पर पड़ा है यह रोवर

उनका मानना है कि कंट्रोल रुम से लैंडर को जो निर्देश भेजे गये थे, वह उसने प्राप्त किया

था और रोवर को आगे निर्देशित किया था। लेकिन लैंडर किसी कारण से अपनी तरफ से

कंट्रोल रुम को अपना संदेश वापस नहीं भेज पाया। इसलिए मुख्य यान से अलग होने के

दो मिनट के भीतर ही उसका संपर्क टूट गया था। तय योजना के मुताबिक विक्रम लैंडर को

चांद पर आहिस्ता उतरना था लेकिन ऐसा नहीं हो पाया। वह काफी तेजी से नीचे गिरा और

उसी वजह से वह टूट गया था।

सुब्रमणियम का यह दावा सामने आने के बाद इसरो के अध्यक्ष के शिवन ने कहा है कि

इसरो के वैज्ञानिक इस दावे की जांच कर रहे हैं। दरअसल चंद्रयान 2 को लेकर इतनी रुचि

इसलिए भी थी क्योंकि यह चांद के दक्षिणी हिस्से में आहिस्ते से यान उतारने का पहला

प्रयोग था। अब नये दावे के बाद इस बात की चर्चा प्रारंभ हो चुकी है कि क्या फिर से किसी

बाहरी निर्देश के जरिए वहां पड़े इस प्रज्ञान रोवर को चालू किया जा सकता है। इस रोवर को

चांद के इस इलाके में कई प्रयोग करने थे। इसरो के अध्यक्ष ने कहा कि उनके अपने

वैज्ञानिक इन तमाम आंकड़ों की जांच परख कर रहे हैं। उसका निष्कर्ष आने के बाद भी

पक्के तौर पर इसरो की तरफ से कुछ कहा जा सकेगा।


 

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