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विकास दुबे एनकाउंटर पर सवाल के बीच जनता में मतभेद है

दीपक नौरंगी

भागलपुरः विकास दुबे का एनकाउंटर सही है या उसे किसी को बचाने के लिए जबरन मारा

गया है, यह सवाल अभी मीडिया और सोशल मीडिया में तेजी से तैर रहा है। कानपुर में

आठ पुलिस वालों की हत्या के बाद से जिस तरीके से विकास दुबे और उसके साथियों की

मुठभेड़ में हत्या हुई है, उससे यह बहस का विषय बन गया है। उससे पूर्व हैदराबाद में भी

एक पशु चिकित्सक के साथ सामूहिक बलात्कार के पास उसे जलाकर मार डालने की

घटना के वक्त भी यह मसला उछला था। वहां भी सारे आरोपी अपराध के घटनास्थल पर

ही मारे गये थे।

पुलिस की कार्रवाई पर क्या कहते हैं भाजपा नेता दीपक सिंह

भागलपुर में खुद ही लगातार इस किस्म के मोर्चों पर संघर्ष करने वाले भाजपा नेता दीपक

जी इस किस्म की कार्रवाई को खुले तौर पर जायज ठहराते हैं। लेकिन उन्होंने एक सबसे

महत्वपूर्ण बात यह कह दी कि पुलिस का ऐसा ही चरित्र आम आदमी के साथ होने वाले

अन्याय के दौरान भी नजर आना चाहिए। यह सिर्फ अकेले विकास दुबे का मामला नहीं है

बल्कि उनके मुताबिक इस किस्म के अपराधियों के साथ अगर प्रारंभ में ही ऐसा व्यवहार

होने लगेगा तो विकास दुबे जैसे लोग समाज में पैदा ही नहीं होंगे।

विकास दुबे एनकाउंटर पर राजनीतिक विवाद जारी

मध्यप्रदेश के उज्जैन से कानपुर लाये जाते वक्त बर्रा के पास हुई इस मुठभेड़ की दलीलों

में बहुत असमानताएं हैं। अनेक साक्ष्य भी ऐसे हैं, जो पुलिस के दावों को कमजोर साबित

करते हैं। इनमें से सबसे बड़ा सबूत विकास दुबे को लाने वाली गाड़ी का बदल जाना है। एक

टोल नाका पर तथा कुछ मीडिया चैनलों ने उसे एक सफारी गाड़ी में ले जाते देखा था। टोल

नाका पर लगे सीसीटीवी कैमरे में भी यह सफारी गाड़ी ही दर्ज हुई थी। लेकिन कानपुर के

निकट जिस गाड़ी के एक्सीडेंट होने का दावा किया गया है, वह सफारी गाड़ी नहीं बल्कि

दूसरी गाड़ी थी। इस वजह से इस पर विवाद उपजना स्वाभाविक है।

भागलपुर के भाजपा नेता ने सवाल किया कि आखिर समाज में मामूली किस्म के

अपराधी इतनी ऊंचाई तक पहुंचते क्यों हैं, इस बात को समझने की जरूरत है। वैसे अगर

पुलिस आम आदमी के साथ होने वाले अन्याय के मौकों पर भी इसी तरह का कड़ी कार्रवाई

करेगी तो समाज में ऐसे अपराधी पनप ही नहीं पायेंगे जो बाद में चलकर पुलिस के लिए

इतनी बड़ी चुनौती बन जाएं।

मामूली अपराधियों को संरक्षण नहीं मिले तो परेशानी नहीं होगी

उन्होंने अपनी बात रखने के क्रम में खुले तौर पर इतने कड़े तेवर के लिए उत्तर प्रदेश के

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की भी तारीफ की। उन्होंने कहा कि जब सत्ता के शीर्ष से

अपराधियों को संरक्षण मिलना बंद हो जाता है तो अपराधी वैसे ही कमजोर हो जाते हैं।

लेकिन न्यायपालिका की अपनी भूमिका है। इस मुठभेड़ पर भी सवाल उठ रहे हैं तो उनकी

जांच के अपने नियम कानून है। लेकिन पुलिस वालों के मारे जाने के बाद पुलिस इतनी

सक्रिय हुई है, इस सोच को बदलकर पुलिस को आम आदमी के साथ होने वाले अन्याय के

खिलाफ भी इतनी ही मुखरता के साथ खड़ा होना चाहिए।


 

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