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विसुवियस के विध्वंस की खोज में जेनेटिक विज्ञान की नई उपलब्धि

आज भी जीवित है यह ज्वालामुखी

दो हजार साल पुराने उत्तक सुरक्षित

भावी अनुसंधान में काम आयेगा यह

दो हजार साल पुराना ब्रेन सही हालत में 

रांचीः विसुवियस के बारे मे जो लोग नहीं जानते हैं, उन्हें सबसे पहले बता दूं कि यह एक

अति प्राचीन और जीवंत ज्वालामुखी है। यह कई हजार वर्षों से लगातार जीवित है और

कई बार उसके जागने की चेतावनियों को नजरअंदाज करने की वजह से आस पास के

लोगों को बड़ी कीमत चुकानी पड़ी है। इसी ज्वालामुखी विध्वंस के बीच इसकी लपट में मरे

एक इंसान की खोपड़ी के अंदर सही सलामत अवस्था में मस्तिष्क के कोष पाये गये हैं।

दिमाग का सेल इस अवस्था में इतने दिनों तक सुरक्षित भी रह सकता है, इसका अंदाजा

पहले लोगों को नहीं था। इस अवशेष के प्राप्त होने और उसके वैज्ञानिक विश्लेषण से

इसकी जानकारी पहली बार मिली है। नेपल्स विश्वविद्यालय फोरेंसिक मानवविज्ञानी,

अध्ययनकर्ता पियर पाओलो पेट्रोन ने अध्ययन में कहा, हम हर्क्लेनियम में पाए गए एक

के रूप में विरूद्ध ऊतक का अध्ययन कर हम भविष्य में जीवन बचा सकते हैं। पेट्रोन ने

कहा, कई अनुसंधान क्षेत्रों पर प्रयोग जारी है, और जो डेटा और सूचना हम प्राप्त कर रहे हैं,

वह हमें विसुवियस के सबसे प्रसिद्ध विस्फोट के दौरान 2000 साल पहले हुए अन्य और

नए पहलुओं को स्पष्ट करने के मुद्दे पर प्रकाश डालने जा रहा है। जिन नमूनों की जांच की

गई, वह 20 साल की उम्र का एक आदमी था, जिसके अवशेष 1960 के दशक में लकड़ी के

बिस्तर पर पाये गए थे। विस्फोट की तीव्र गर्मी और तेजी से शीतलन जो अनिवार्य रूप से

मस्तिष्क की सामग्री को एक कांच की सामग्री में बदल दिया। बाद में न्यूरोनल संरचनाओं

को ठंड ने बरकरार रखा है।

विसुवियस विस्फोट में मारे गये लोग भीषण ताप के शिकार बने

तापमान में तेजी से गिरावट का प्रमाण – विट्रीफाइड ब्रेन टिश्यू द्वारा देखा गया – विस्फोट

के दौरान होने वाली ज्वालामुखी प्रक्रियाओं की एक अनूठी विशेषता है। अब इसके परीक्षण

से भविष्य के प्रारंभिक चरणों के दौरान नागरिक सुरक्षा अधिकारियों द्वारा संभावित

हस्तक्षेपों के लिए प्रासंगिक जानकारी प्रदान कर सकता है। विसुवियस के विस्फोट ने

ज्वालामुखीय राख, गैसों और लावा प्रवाह की एक जहरीली, कई मीटर-मोटी परत में

हरक्यूलिनम को ढंक दिया। इस वजह से उसकी चपेट में आने वाले भीषण ताप से मर गये

लेकिन तुरंत ही तापमान तेजी से गिरा तो यह सारे ढांचे पत्थर के जैसे बन गये थे। जैसा

कि उन्होंने अध्ययन के अनुसार कार्बनिक पदार्थ की जांच की, शोधकर्ताओं ने इलेक्ट्रॉन

माइक्रोस्कोपी और उन्नत छवि प्रसंस्करण उपकरण का उपयोग करके अभूतपूर्व उच्च

रिज़ॉल्यूशन इमेजरी प्राप्त करने में कामयाबी हासिल की।

इस दिमागी तंतु से भविष्य में अनेक लाभ होंगे

पीड़ित के केंद्रीय तंत्रिका तंत्र के सेलुलर संरचना में विस्फोट के बाद के संरक्षण के साथ,

शोधकर्ताओं ने मस्तिष्क और रीढ़ की हड्डी से असाधारण रूप से अच्छी तरह से संरक्षित

मानव न्यूरोनल ऊतक के पुरातत्व में संभवतः सबसे अच्छा ज्ञात उदाहरण का अध्ययन

करने के लिए सुरक्षित रख लिया है। इस बारे में प्रसिद्ध वैज्ञानिक पत्रिका प्लोस में एक

प्रबंध प्रकाशित किया है।

इटली में मौजूद यह विसुवियस ज्वालामुखी कई अवसरों पर भीषण विध्वंस का कारण

बना है। ऐतिहासिक आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 1906 में इसी ज्वालामुखी विस्फोट से एक

सौ लोग मारे गये थे। इस विस्फोट की वजह से इटली में होने वाले 1908 के ओलंपिक

खेलों को अन्यत्र ले जाना पड़ा था। (वीडियो में देखिये इसकी फिल्म)

1913 से 1944 तक कई बार यहां रुक रुक कर विस्फोट होता रहा है। लेकिन इनमें उतना

लावा नहीं निकला है, जो किसी बड़ी तबाही का कारण बने। सिर्फ 1944 में 18 से 23 मार्च

तक लगातार लावा प्रवाहित होता रहा। इससे कई शहरों के हिस्से तबाह हो गये थे।

इसके सबसे बड़े विस्फोट में पोंपेई शहर तबाह हो गया था

वैसे इतिहास के पन्नों में दर्ज आंकड़ों के मुताबिक सबसे बड़ी तबाही 79 एडी में आयी थी।

इसमें लगातार दो दिनों तक काफी तेज गति से लावा निकलता रहा था। इतनी तेज से यह

लावा आस पास के इलाकों में फैलता गया कि लोगों को बच निकलने का मौका भी नहीं

मिला। अब तक की खुदाई में इस हादसे में मारे गये 1150 शवों की सुरक्षित अवस्था में

बरामद किया गया है। इसी क्रम में वैज्ञानिकों को ब्रेन का वह सेल भी मिला है, जो

अप्रत्याशित तौर पर सुरक्षित अवस्था में है।

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