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शुक्र ग्रह पर जीवन के संभावनाएं दिखी तो वैज्ञानिक उत्साहित

  • पृथ्वी से बाहर जीवन की तलाश में नये तथ्य सामने आये

  • फॉस्फेन के आधार पर जीवन के होने का अनुमान

  • ऊपरी वायुमंडल में गैस के होने का पता चला

  • अभी यकीनी तौर पर कुछ नहीं कह सकते

प्रतिनिधि

नईदिल्लीः शुक्र ग्रह पर भी जीवन हो सकता है, इस खोज ने वैज्ञानिकों तक की धड़कने

बढ़ा दी है। दरअसल वहां माइक्रोबॉयल जीवन के होने की सूचना से ऐसा माना गया है कि

वहां दूसरे किस्म का जीवन भी हो सकता है। वर्तमान में इस ग्रह पर गहराई से इस पर

पहले अनुसंधान नहीं हो पाया था। जिस आधार पर वैज्ञानिक वहां जीवन की संभावना की

राय व्यक्त कर रहे हैं वह एक सुक्ष्म जीवन है। फॉस्फेन नामक इस सुक्ष्माणु के होने के

संकेत शोधकर्ताओं को मिले हैं। इसी वजह से शुक्र ग्रह पर जीवन की संभावनाएं प्रवल हो

गयी है। उल्लेखनीय है कि पृथ्वी के बाहर जीवन की तलाश का वैज्ञानिक अभियान काफी

अरसे से चल रहा है। इसके पहले अन्य कई ग्रहों पर भी मिथेन के भंडार नजर आने की

वजह से जीवन होने की उम्मीद जतायी गयी थी लेकिन उसके आगे का कोई ठोस साक्ष्य

अब तक सामने नहीं आया है। इस सुक्ष्माणु के होने का पता चलने के बाद अब वहां जीवन

की संभावनाओं की तलाश और तेज हो गयी है। यह अनुमान व्यक्त किया गया है कि वहां

के वायुमंडल पर और अनुसंधान के इसके आंकड़े एकत्रित कर ही आगे का विश्लेषण किया

जा सकता है। वैसे यह उम्मीद भी है कि इस फॉस्फेन के होने के बाद ऐसा भी हो सकता है

कि वहां के लिए खास तौर पर कोई अंतरिक्ष अभियान की योजना बने ताकि किसी खास

किस्म के रोवर को वहां भेजकर अंदर का हाल जाना जा सके। वहां के नमूने एकत्रित किये

बिना सिर्फ अंतरिक्ष से नजर रखने पर ढेर सारी बातों का पता ही नहीं चल पाता है।

शुक्र ग्रह पर अन्य ग्रहों पर मिथेन के जैसी ही

दरअसल फॉस्फेन पाये जाने के बाद वैज्ञानिकों ने जीवन की उम्मीद इसलिए जतायी है

क्योंकि किसी जीवन के बिना इसका उत्पादन नहीं हो सकता। यह भी कुछ मिथेन के होने

जैसी ही स्थिति है। जो जीवन के होने की वजह से ही पैदा होता है। अब यह जीवन कैसा है

अथवा किस स्वरुप में हैं, इस बारे में अभी वैज्ञानिक कोई आकलन नहीं करना चाहते हैं।

वैसे यह भी माना जा रहा है कि अगर वाकई वहां जीवन है तो वहां आवश्यकतानुसार

फेरबदल कर वहां इंसानों के बसने लायक स्थिति भी बनायी जा सकती है। कुछ इसी तरह

वैज्ञानिक चांद पर भी इंसानों की बस्ती बसाना चाहते हैं। शुक्र ग्रह पर फॉस्फेन पाये जाने

की वजह से वैज्ञानिक यह मान रहे हैं कि वहां जीवन है क्योंकि पृथ्वी पर भी उसका

उत्पादन ऑक्सीजन रहित माहौल में ही किया जाता है। वैसे इस संभावना को व्यक्त

करने के साथ साथ वैज्ञानिकों ने स्पष्ट कर दिया है कि वहां जीवन है, इसकी कोई पुष्टि

अभी तक नहीं हुई है। अभी सिर्फ फॉस्फेन की वजह से इसकी संभावना जतायी जा सकती

है। वहां के वायुमंडल के ऊपरी सतह पर इसके होने की वजह से ही आंतरिक परिस्थितियों

के और गहन अध्ययन की आवश्यकता है।

कार्डिफ विश्वविद्यालय के शोध दल की रिपोर्ट है

फॉस्फेन नामक गैस के आधार पर ऐसी राय ब्रिटेन के कार्डिफ विश्वविद्यालय के शोधदल

ने व्यक्त किया है। इस शोध दल के नेता और प्रोफसर जेन ग्रीब्स ने कहा कि पृथ्वी पर भी

यह गैस सुक्ष्माणुओं के जरिए ही पैदा किया जा सकता है। इसलिए अगर वहां गैस है तो

यह माना जा सकता है कि वहां भी सुक्ष्माणुओं की मौजूदगी हो सकती है। इस पूरे शोध के

बारे में नेचर एस्ट्रोनॉमी पत्रिका में एक लेख भी प्रकाशित किया गया है। वैसे इसके आगे के

अन्य आंकड़ों के उपलब्ध होने तक और अधिक आकलन किया जाना संभव नहीं है। वैसे

इसका पता चलने के बाद खगोलकेंद्रों का ध्यान भी अब खास तौर पर शुक्र ग्रह की तरफ

चला गया है। जो खगोल दूरबीन से वहां पर नजर रखने लगे हैं।


 

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