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ढाका का वैलेंटाइन डे वसंत उत्सव और कोविड विजय के तौर पर

  • दोनों पर्वों की तिथियां एक ही पड़ी थी

  • सपरिवार ही उत्सव में शामिल होने आये

  • कई प्रतिबंध भी रहे लेकिन खुशी में कमी नहीं

  • बांग्ला पंजिका के तहत ही रही कार्यक्रमों की धूम

अमीनूल हक

ढाकाः ढाका का वैलेंटाइन डे इस पर वसंत उत्सव के तौर पर पूरी तरह छाया रहा।

दरअसल आम तौर पर इस प्रेम दिवस के तौर पर विश्व विख्यात वैलेंटाइन दिवस की

मानसिकता बांग्लादेश में बहुत कम है। लोग इसके बारे में जानते तो हैं लेकिन बांग्लादेश

की संस्कृति इसे अपनाने का माहौल नहीं बनाती। इस बार ढाका का वैलेंटाइन दिवस पूरी

तरह भिन्न रहा। बांग्ला पंजिका में भी कल का दिन वसंत उत्सव का था। चूंकि इस

त्योहार को पहले से ही धूमधाम से मनाया जाता आया है। इसलिए ढाका का वैलेंटाइन डे

दरअसल पूरे समाज के लिए उत्सव का माहौल बन गया। इस दौरान खुशियां मनाते लोगों

के बीच यह खास तौर पर कोरोना पर विजय के पर्व के तौर पर भी नजर आया। इतने दिनों

की पाबंदी के बाद पहली बार लोग खुलकर इस तरीके से सार्वजिनक स्थलों पर मिल पाये।

वरना इससे पूर्व विभिन्न त्योहारों के आयोजनों के दौरान भी कोरोना गाइड लाइन की

पाबंदियां लगी रहती थी।

वीडियो में महसूस कीजिए कैसा रहा यह त्योहार का मिजाज

ढाका के सोहरावर्दी मैदान में मुख्य समारोह नजर आया। यूं ही सभी को मालूम है कि

बांग्लादेश में कोई भी त्योहार हो उसे धूमधाम से और सभी वर्गों के लोग मिलकर ही

मनाते हैं। प्रधानमंत्री शेख हसीना ने काफी समय पहले ही यह एलान कर दिया था कि धर्म

सभी का अलग अलग है लेकिन त्योहार सभी के लिए एक जैसे हैं। उसके बाद से धीरे धीरे

हर ऐसे त्योहार के अवसर पर सारे लोग धर्म विभेद को भूलकर ऐसे समारोहों का आनंद

उठाने में जुट जाते हैं। ढाका का वैलेंटाइन डे इस बार इसका जीता जागता नमूना बना

क्योंकि वसंत उत्सव की तिथि भी कल यानी 14 फरवरी ही थी।

ढाका का वैलेंटाइन डे पिछले साल की भी याद दिलाता रहा

इस दौरान बार बार लोगों ने इस बात को भी याद किया कि पिछले साल जब यह त्योहार

मनाया जा रहा था तो किसी को इस बात की भनक तक नहीं थी कि कितनी बड़ी आपदा

उनकी तरफ चुपके से बढ़ती चली आ रही है। इस खुशी के मौके पर भी लोगों ने उस

भयानक दौर को याद किया, जिसमें अनेक लोगों को मरने के बाद अपने स्वजनों के हाथों

अंतिम संस्कार का भी अवसर प्राप्त नहीं हुआ। ढाका के सोहरावर्दी मैदान में अधिक उम्र

एवं बच्चों के आने पर इस बार भी पाबंदी थी। इसके बाद भी फूलों का त्योहार मनाने में

ढाका वासी पीछे नहीं रहे। वैसे वहां के फूल विक्रताओं के मुताबिक पिछले वर्ष जहां 70

करोड़ रुपये के फूल बिके थे, इस बार सिर्फ 25 करोड़ के फूलों का कारोबार हो पाया है।

ढाका का वैलेटाइन डे स्वपन के लिए पूरे परिवार के लिए आनंद का त्योहार रहा। पूरा

परिवार पीले रंग के पोशाक पहनकर यहां आया था। वे भी फूल खरीद रहे थे। आयोजन

समिति के मंजर रहमान ने बताया कि आयोजन में कोई कमी तो नहीं थी लेकिन ढाका

विश्वविद्यालय के बकुल तला में जो वसंत उत्सव मनाया जाता रहा है, उसकी अनुमति

नहीं मिली थी। लेकिन लोग इससे भी नाखुश नहीं है। सुबह सात बजे से रात के दस बजे

तक खुले मंच पर अलग अलग किस्म के सांस्कृतिक आयोजन होते रहे। कुल मिलाकर

कोरोना पर इंसानी जीत के तौर पर ही लोगों ने ढाका का वैलेटाइन डे को दूसरी मिजाज से

मनाया और उसका सपरिवार आनंद उठाया।

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