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वैक्सिन कूटनीति के मोर्चे पर चीन को पछाड़ दिया है भारत ने

  • पड़ोसी देशों का पूरा ख्याल रख रहा है भारत

  • दुनिया के अन्य देशों को भी वैक्सिन दिया गया

  • अनेक देशों को भारत की दवा क्षमता का पता चला है

राष्ट्रीय खबर

नईदिल्लीः वैक्सिन कूटनीति के मोर्चे पर भारत को बड़ी सफलता हाथ लगी है। ऐसा भी

कहा जा सकता है कि कोरोना के इस वैश्विक संकट ने भारत को दवा उद्योग में

अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर वह मान्यता दिलायी है, जिसकी कल्पना तक नहीं की गयी थी।

इसकी खास वजह कोरोना वैक्सिन की उदारतापूर्वक आपूर्ति और पड़ोसी देशों की खुलकर

मदद करना है। वैक्सिन के मोर्चे पर भारत की इस बढ़त से चीन परेशान है और वैश्विक

मंचों पर उसकी यह चिंता बार बार झलक रही है। व्यापार के मोर्चे पर यह एकमात्र क्षेत्र है,

जिसमें चीन तेजी से पिछड़ता जा रहा है। अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर यह मान्यता स्थापित हो

रही है कि तीसरी दुनिया के देशों के लिए दवा मंगाने का सस्ता रास्ता भारत से होकर

निकलता है। पूरी दुनिया में दवा का कारोबार भी किसी एक विकसित देश के वार्षिक बजट

से कहीं अधिक होता है। ऐसे में अगर दवा उद्योग का वैश्विक कारोबार का बड़ा हिस्सा

भारत के खाते में आ गया तो सीमा विवाद में फंसे चीन को इससे भारी नुकसान होने का

अंदेशा ही उसे परेशान कर रहा है।

भारत को वैक्सिन कूटनीति की यह सफलता अपनी उदार नीतियों की वजह से मिली है।

कोरोना से जुड़े आर्थिक संकट ने भी भारत के लिए संभावनाओँ के नये द्वार खोले हैं।

दरअसल वैक्सिन बनाने वाले अन्य विकसित देश अपने लिए वैक्सिन का भंडारण कर रहे

हैं। दूसरी तरफ चीन ने अपनी वैक्सिन को भी कमाई का जरिया बनाने की चाल चली थी।

इधर भारत, दुनिया का सबसे बड़ा वैक्सिन निर्माता होने की वजह से अधिक उत्पादन कर

अन्य देशों की मदद करने में जुट गया है। पड़ोसी देशों को पहली खेप बतौर भेंट भेजे जाने

के बाद अब अन्य खेप भेजने की तैयारियां चल रही हैं। भारत ने सिर्फ पड़ोसी देशों की ही

मदद नहीं की है।

वैक्सिन कूटनीति के तहत ही ब्राजिल की विशेष मदद की गयी

संकट में पड़े देश ब्राजिल के विशेष आग्रह पर लीक से हटकर उसे भी वैक्सिन भेजी गयी

है। इसी तरह मोरक्को, दक्षिण अफ्रीका और सऊदी अरब को भी वैक्सिन भेजे गये हैं।

पहली बार इस बात का खुलासा हुआ है कि बांग्लादेश पहले चीन से वैक्सिन खरीदना

चाहता था लेकिन मुनाफा कमाने की चीनी रणनीति ही उल्टी पड़ गयी। दरअसल चीन ने

बांग्लादेश को यह प्रस्ताव दिया था कि उसकी वैक्सिन के तीसरे चरण के क्लीनिकल

ट्रायल को बांग्लादेश में भी करने का जो खर्च आयेगा, वह बांग्लादेश वहन करे। दरअसल

ऐसा कर चीन वैक्सिन की लागत को दूसरे के कंधे पर डालकर अधिक मुनाफा कमाना

चाहता था। इसी वजह से बांग्लादेश ने भारत का रुख किया और भारत से उपहार स्वरुप

वैक्सिन की पहली खेप वहां पहुंचन के बाद बांग्लादेश में भी टीकाकरण का अभियान

प्रारंभ हो चुका है। पाकिस्तान को छोड़कर सभी पड़ोसी देशों को वैक्सिन भेजे जा चुके हैं।

लिहाजा भारतीय दवा उद्योग की क्षमता की जानकारी पहली बार उन देशों तक पहुंच रही

है, जो इससे पहले विकसित देशों की बहुराष्ट्रीय कंपनियों पर आश्रित थे। वैक्सिन पहुंचने

के बाद अब अन्य देशों की सरकारें अपनी जरूरत की अन्य दवाइयों की कीमत और

आपूर्ति पर भी अनौपचारिक चर्चा प्रारंभ कर चुकी है। लिहाजा यह कोरोना संकट भी

वैक्सिन कूटनीति की बदौलत भारत के लिए दवा उद्योग के लिए नई संभावनाओं के

द्वार खोल चुका है।

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