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उत्तराखंड के गंगोत्री धाम की कई समितियों की याचिका पर सुनवाई

नैनीतालः उत्तराखंड के गंगोत्री धाम स्थित पांच मंदिर समिति एवं अन्य की ओर से दायर

याचिका पर सुनवाई करते हुए उच्च न्यायालय ने सरकार एवं उत्तराखंड चारधाम

देवस्थानम बोर्ड को निर्देश दिये हैं कि वह समिति की ओर से याचिका में उठाये गये

बिन्दुओं पर चार सप्ताह में जवाब पेश करे। न्यायालय ने हालांकि समिति को किसी

प्रकार की कोई राहत नहीं दी है और याचिका को सुनवाई के लिये भारतीय जनता पार्टी

(भाजपा) नेता सुब्रमण्यम स्वामी की ओर से दायर जनहित याचिका के साथ संयोजित

कर दिया। मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश रमेश रंगनाथन एवं न्यायमूर्ति रमेश चद्र

खुल्बे की युगलपीठ में हुई। मामले को गंगोत्री धाम पांच मंदिर समिति एवं अन्य की ओर

से चुनौती दी गयी है। याचिकाकर्ताओं की ओर से कहा गया कि अनंत काल से इन मंदिरों

की पूजा एवं प्रबंधन उनके द्वारा की जाती रही है। सरकार ने उन्हें उत्तराखंड चारधाम

देवस्थानम् बोर्ड अधिनियम के तहत शामिल कर दिया है। इससे उनके मौलिक तथा

आध्यात्मिक अधिकारों का हनन हुआ है। समिति की ओर से इन सभी मंदिरों को

देवस्थानम बोर्ड अधिनियम के तहत लाने का विरोध किया गया। महाधिवक्ता एस. एन.

बाबुलकर द्वारा समिति की ओर से उठाये गये प्रश्नों का विरोध किया गया और कहा कि

सरकार के इस कदम से उनके मौलिक एवं आध्यात्मिक अधिकारों का हनन नहीं हुआ है।

अदालत ने भी याचिकाकर्ताओं से पूछा कि वे बतायें कि उनके आध्यात्मिक अधिकारों का

हनन कैसे और किस प्रकार हुआ है? क्या सरकार ने उनकी पूजा और मंत्रोच्चारण की

पद्धति को बदलने को कहा है।

उत्तराखंड के गंगोत्री धाम सहित अन्य धामों पर शिकायत

अदालत की इस तर्क का उनके पास कोई जवाब नहीं था। महाधिवक्ता बाबुलकर ने बताया

कि युगलपीठ ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद सरकार और देवस्थानम् बोर्ड के मुख्य

कार्यकारी अधिकारी गढ़वाल मंडल के आयुक्त को चार सप्ताह में जवाब पेश करने के

निर्देश दिये हैं और याचिका को देवस्थानम् बोर्ड को चुनौती देने वाली जनहित याचिका के

साथ संयोजित कर दिया। गौरतलब है कि भाजपा नेता स्वामी की ओर से जनहित

याचिका के माध्यम से प्रदेश सरकार द्वारा बनाये गये उत्तराखंड चारधाम देवस्थानम्

बोर्ड अधिनियम को चुनौती दी गयी है। याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया है कि

अधिनियम गलत है। सरकार को कोई अधिकार नहीं है। सरकार की ओर से चारधाम

स्थित बदरी-केदार, गंगोत्री-यमुनोत्री मंदिरों के अलावा आसपास के 51 मंदिरों को इस

अधिनियम के तहत शामिल किया गया है।


 

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