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उत्तरप्रदेश में शुरु हो गया आया राम और गया राम का खेल




चुनावी चकल्लस

हरिशंकर तिवारी के पुत्र सपा में शामिल

भाजपा नेताओं ने कड़ी आलोचना कर दी

पश्चिमी उत्तरप्रदेश में चौधरी पर टिकी नजर

सपा ने दो ब्राह्मण चेहरों को अपने खेमा में पाया

राष्ट्रीय खबर

नईदिल्लीः उत्तरप्रदेश में अब चुनावी राजनीति का पारा तेजी से ऊपर की तरफ चढ़ता जा रहा है। ठंड के बढ़ने के बीच ही यूपी में पूर्वांचल की सियासत में ब्राह्मण चेहरा माने जाने वाले हरिशंकर तिवारी के बेटे और विधायक विनय शंकर तिवारी, पूर्व सांसद कुशल तिवारी और भांजे गणेश शंकर पांडेय को समाजवादी पार्टी की सदस्यता दिलाते हुए अखिलेश यादव ने कहा, आज बहुत ही प्रतिष्ठित परिवार के लोग सपा में शामिल हो रहे हैं।




यह इंडियन पॉलिटिक्स है कि जिस नेता को अपने ही दल में दोबारा टिकट मिलने की उम्मीद नहीं होती है वह खेमा बदल कर लेता है। वर्ष 2014 के पहले अनके कांग्रेसी नेता इसके तहत ही भाजपा में शामिल हो गये थे। यह आया राम गया राम ऐसा मसला है, जिसे लेकर राजनीतिक दल अब अधिक टेंशन नहीं पालते हैं। लेकिन इलाका वार नेताओं के खेमाबदल से जातिगत राजनीति बदलती है, इस पर भी किसी को संदेह नहीं है।

इसलिए अब पहली बार बड़ा ब्राह्मण चेहरा समाजवादी पार्टी में आया है तो उसकी चर्चा लाजिमी है। पूर्वांचल के बाहुबली माने जानेवाले हरिशंकर तिवारी के बेटे और भांजे रविवार को बसपा छोड़ समाजवादी पार्टी में शामिल हो गए। इस पर भाजपा नेता और राज्य के कानून मंत्री बृजेश पाठक ने पलटवार करतेहुए समाजवादी पार्टी को गुंडे मवालियों की पार्टी करार दिया और नाम बदलने की सलाह दे डाली। समाजवादी पार्टी की सदस्यता दिलाते हुए अखिलेश यादव नेकहा, आज बहुत ही प्रतिष्ठित परिवार के लोग सपा में शामिल हो रहे हैं।

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दूसरी तरफ कैबिनेट मंत्री पाठक ने कहा कि रिकॉग्नाइज्ड क्रिमिनल्स को अपने खेमे में जोड़नेवाली समाजवादी पार्टी को अपना नाम बदलकर माफियावादी पार्टी कर लेना चाहिए। पाठक का आरोप है कि समाजवादी पार्टी पूरे प्रदेश के हिस्ट्रीशीटरों को अपने दल में जोड़ रही है। सपा जब सत्ता में आती है, तब गुंडे मवाली थानों में कब्ज़ा करके बैठ जाते हैं।

भाजपा से जो निकाले गए हैं, उनको सपा जोड़ रही है। सपा भले ही सरकार बनाने का सपना देख रही है, लेकिन 2017 और 2019 की तरह यूपी की जनता इनका ये सपना तोड़ देगी। इन परस्पर विरोधी आरोपों के बीच का असली संदेश यह है कि भाजपा के अंदर भी यह सवाल खड़ा हो रहा है कि क्या वाकई भाजपा दोबारा सत्ता में आ पायेगी। यूं तो सर्वेक्षण रिपोर्टों का निष्कर्ष अब भी भाजपा के पक्ष में ही है लेकिन दो सर्वेक्षण रिपोर्टों का औसत यही कहता है कि उसके सीटों की संख्या कम हो रही है।




दूसरी तरफ किसान आंदोलन के समाप्त होने के बाद पश्चिमी उत्तरप्रदेश के किसान अपने अपने घरों को लौट गये हैं। वे अपने अपने इलाके में आखिर क्या गुल खिलाने जा रहे हैं, यह अब तक स्पष्ट नहीं है। इसी क्रम में किसान नेता राकेश टिकैत पर पत्रकारों की नजर है। मिशन 2022 को लेकर पूछे गए सवाल पर राकेश ने कहा कि चुनाव तो पांच साल में आते जाते रहते हैं। यूपी विधानसभा चुनावों में उनके रोल को लेकर पूछे सवाल पर टिकैत ने कहा कि अपना वोट दे आएंगे। किसको देंगे नहीं बताएंगे। कैराना में बीते दिनों सीएम के आने पर उन्होंने कहा कि सीएम को आना चाहिए। उन्होंने कहा कि नफा नुकसान लाभ हानि सब जनता है। हम तो इनके पहरेदार हैं।

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राकेश ने कहा कि किसान मज़दूर ही मुख्य मुद्दा है। संयुक्त किसान मोर्चा की कमेटी के सदस्यों में न होने पर राकेश ने कहा कि हम नहीं रहते हम सिर्फ निगरानी बाहर से रखेंगे। श्री टिकैत ने कहा कि 13 महीने दिल्ली में आंदोलन चला और आंदोलन कैसा चलना चाहिए यह पंजाब के लोगों से सीखना चाहिए। पंजाब के सिस्टम को अख्तियार करना चाहिए।

उन्होंने कहा इस आंदोलन में हर गांव से अनाज गया और आटे का कोई धर्म नहीं था। राकेश ने कहा कि किसानों के आंदोलन की ट्रेनिंग थी। टिकैत ने कहा कि आंदोलन के उस गांव की याद हमेशा आएगी। क्योंकि वैचारिक क्रांति पूरे हिंदुस्तान में गई। और युवा बड़ी सोच लेकर वहां से गया।

टिकैत काफी देर तक एमएसपी के बारे में किसानों को महापंचायत में समझाते रहे। इसलिए तमाम दलों के बीच खास तौर पर पश्चिमी उत्तरप्रदेश से इलाके में जयंत चौधरी का कद किसानों के समर्थन से अब भाजपा के मुकाबले कितना बड़ा हो पाया है, इस पर भी लोगों की नजरें लगी हैं। लेकिन यह स्पष्ट है कि उत्तरप्रदेश में जब एक पार्टी से दूसरी पार्टी में लोगों का भागमभाग शुरु हो जाए तो यह समझा जाना चाहिए कि कांटे की टक्कर होने वाली है।



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