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उत्तर प्रदेश में कांग्रेस में अदिती के तेवर से घमासान की स्थिति




लखनऊः उत्तर प्रदेश में कांग्रेस के एकमात्र बचे गढ़ रायबरेली से पार्टी की विधायक अदिति सिंह के

तेवर बागी बने हुये हैं।

पार्टी की ओर से मिले कारण बताओ नोटिस का एक तरह से उन्होंने मजाक उड़ाया और सवाल भी खड़ा कर दिया कि कहां है नोटिस।

पार्टी के बहिष्कार के बाद भी महात्मा गांधी की जयंती पर विधानमंडल के विशेष सत्र में

भाग लेने वाली अदिति सिंह को कांग्रेस विधानमंडल दल के नेता ने कल नोटिस भेजकर दो दिन में जवाब मांगा है।

इस नोटिस की बाबत अदिति ने कहा कि उनको कोई नोटिस नहीं मिला है।

पार्टी के नेता ने मीडिया में नोटिस दिया होगा। उनके तेवर पार्टी के इस बर्ताव के कारण बेहद तल्ख हैं।

महात्मा गांधी की 150 वीं जयंती पर आहूत विधान मंडल के विशेष सत्र को लेकर कांग्रेस पार्टी में घमासान तेज हो गया।

बहिष्कार के बावजूद सदन की कार्यवाही में शामिल होने पर पार्टी की विधायक अदिति सिंह को

कांग्रेस विधानमंडल दल के नेता अजय कुमार लल्लू ने अनुशासन तोड़ने का नोटिस भेजते हुए

दो दिन में जवाब तलब किया है। उधर रायबरेली में कांग्रेसियों ने

अदिति के कार्यालय के बाहर प्रदर्शन भी किया।

उत्तर प्रदेश में इस मुद्दे पर कई नेताओं के बयान भी आये

अदिति सिंह ने कहा कि विधानसभा में विशेष सत्र में विधायक राजेश सिंह और विधान परिषद के

सदस्य दिनेश सिंह भी शामिल हुये थे।

पार्टी विधानमंडल दल ने क्या उन्हें भी नोटिस भेजा है।

हालांकि मुझे कोई नोटिस नहीं मिला है।

विधायक दल के नेता अजय कुमार लल्लू मीडिया में नोटिस देने के बजाय मुझे देते।

विधानसभा के 2 अक्तूबर को 36 घंटे के विशेष सत्र के कांग्रेस के बहिष्कार के बावजूद अदिति सिंह ने

सदन में पहुंच कर सभी को चौंका दिया था।

सदन में अदिति ने कहा कि वो एक पढ़ी लिखी विधायक हैं और यहां विकास पर चर्चा हो रही है

इसलिये उन्होंने आना जरूरी समझा।

अदिति ने इससे पहले पार्टी लाईन से अलग जम्मू कश्मीर से धारा 370 हटाये जाने के केन्द्र सरकार के निर्णय का समर्थन किया था।

कांग्रेस विधायक दल के नेता अजय कुमार लल्लू ने अदिति सिंह को नोटिस जारी कर दो दिन में जवाब मांगा है।

अजय कुमार और एक अन्य विधायक अनुराधा मिश्रा ने कहा कि अदिति को पार्टी के

अनुशासन को मानना ही होगा।

अनुशासनहीनता किसी भी तरह से सहन नहीं होगी।

कांग्रेस की विधायक होते हुये वो पार्टी की राय से अलग नहीं हो सकती।

इससे अच्छा है कि वो पार्टी से त्यागपत्र दे दें।



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