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अमेरिका ने गुप्त अंतरिक्ष प्लेन तैयार करने के बाद उसका परीक्षण कर लिया







  • चहल पहल से लोगों का ध्यान आकृष्ट हुआ
  • सैन्य अभियान परीक्षणों के लिए ही भेजा था
  • इससे पहले भी भेजे गये थे चालक रहित विमान
  • अंतरिक्ष में साल भर चक्कर काटकर उतरा जहाज
प्रतिनिधि

नईदिल्लीः अमेरिका ने गुप्त मिशन के तहत एक अंतरिक्ष प्लेन तैयार कर लिया है।

इस बारे में वहां की गुप्तचर एजेंसी केंद्र पेंटागन की तरफ से कोई औपचारिक घोषणा

तो नहीं की गयी है। लेकिन इस प्लेन के फ्लोरिडा हवाई अड्डे पर उतरने की घटना

को लोगों ने न सिर्फ देखा है बल्कि अपनी मोबाइलों में कैद भी कर लिया है।

अब अपुष्ट चर्चा इस बात की हो रही है कि यह अंतरिक्ष प्लेन दरअसल

अंतरिक्ष में जाने के बाद पूरी पृथ्वी का चक्कर काटकर वापस लौटा है।

पूरी दुनिया के बाहर से अंतरिक्ष का चक्कर काटकर लौटने वाले इस प्लेन का

नाम एक्स-37 बी रखा गया है। रविवार को उसके वापस उतरने के बाद इस बात

की पुष्टि हो गयी कि यह पिछले दो वर्षों से अपनी उड़ान पर था और अंतरिक्ष में

पृथ्वी के चारों तरफ घूमकर आंकड़े एकत्रित कर रहा था। जाहिर है कि सैन्य

और गुप्तचर अभियान के लिए तैयार यह हवाई जहाज अंतरिक्ष से

अपने यंत्रों की मदद से दुनिया भर के तमाम आंकड़े एकत्रित करता रहा है।

अमेरिका ने गुप्त प्लेन के नजर आ जाने के बाद इसके रहस्यों पर से भी पर्दा

उठाया है। इसे बोइंग कंपनी ने खास तौर पर पेंटागन के लिए ही तैयार किया था।

चालक रहित यह विमान नासा के केनेडी स्पेस सेंटर पर सुबह के 3 बजकर 51 मिनट

पर उतरने देखा गया। दरअसल इस प्लेन के उतरने के पहले ही वहां की

चहलपहल देखकर लोगों का ध्यान इस तरफ आकृष्ट हो गया था।

अमेरिका ने गुप्त प्लेन के आने से नहीं दी थी जानकारी

बाद में इस अजीब किस्म के प्लेन को देखकर लोगों की रूचि और बढ़ी।

जिसके हवाई पट्टी पर उतर जाने के बाद भी उस प्लेन से कोई यात्री नहीं उतरा।

तब जाकर वहां इस यान को सकुशल उतारने के काम में जुटे लोगों राज खोला

कि यह चालक रहित विमान 780 दिनों की उड़ान पूरी करने के बाद

अब वापस लौटा है। यह भेद भी पहली बार उजागर हुआ कि यह पेंटागन

का पांचवा अभियान है।

इस चालक रहित विमान का आकार किसी बस के जितना बड़ा है।

इसके अंदर स्पेस शटल में होने वाले अधिकांश उपकरण रखे गये हैं।

इसे वर्ष 2017 में एक स्पेस एक्स फॉल्कन 9 रॉकेट के माध्यम से

अंतरिक्ष में भेज दिया गया है। अंतरिक्ष में पहुंच जाने के बाद उसकी

तमाम गतिविधियों को नियंत्रण कक्ष से देखा और नियंत्रित किया जा रहा था।

वैसे यान के माध्यम से अंतरिक्ष में क्या कुछ प्रयोग किये गये हैं,

इस बारे में अब तक कोई जानकारी नहीं दी गयी है।

इस वजह से ऐसा माना जा सकता है कि यह शुद्ध तौर पर सैन्य अभियान ही था।

इसी वजह से इसके बारे में गोपनीयता बरती जा रही है।

वैसे इस तकनीक के सफल प्रमाणि होने से अंतरिक्ष वैज्ञानिक इस बात को

जानकर उत्साहित हैं कि अब अंतरिक्ष अभियान के लिए ऐसे विमानों का

उपयोग बार बार किया जा सकेगा। वरना पहले एक बार इस्तेमाल होने वाले

यानों के निर्माण में काफी लागत आती थी। दोबारा उपयोग में आने वाले विमान

से कमसे कम इस खर्च में कटौती की जा सकती है।

लोगों की जानकारी में आने के बाद अमेरिकी प्रशासन ने खोली जुबान

मामले की जानकारी सार्वजनिक होने के बाद एयरफोर्स की प्रभारी और

नवनियुक्त सचिव बारबरा बैरेट ने कहा कि हर बार इस किस्म के अभियान

के सफल होने से अमेरिकी सेना को नई नई उपलब्धि हासिल होती है।

इससे अंतरिक्ष के मामलों में हमारी दक्षता और सैन्य कुशलता और बेहतर

होती चली जा रही है। उन्होंने इस विमान के उतरने के बाद पहली बार इस बात

की घोषणा की कि अमेरिका के इस किस्म के विमान के अंतरिक्ष में होने के

कुल 2865 दिन पूरे हो चुके हैं। अमेरिकी वायुसेना के प्रमुख जनरल डेविड

एल गोल्डफेइन ने कहा कि अब अमेरिका वायुसेना के लिए आसमान भी कोई

सीमा नही रही है। अगर अमेरिकी कांग्रेस ने इन परियोजनाओं के लिए धन

मुहैय्या कराने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी तो निश्चित तौर पर अमेरिका अंतरिक्ष

में दूसरों के मुकाबले काफी आगे निकल जाएगा। जहां से भावी सैन्य संतुलन

को अपने पक्ष में रखने में काफी मदद मिलेगी।



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