fbpx Press "Enter" to skip to content

पश्चिम एशिया में एक हजार अतिरिक्त सैनिक तैनात करेगा अमेरिका




वाशिंगटनः पश्चिम एशिया में अमेरिका ने एक हजार सैनिक तैनात करने का

फैसला लिया है। अमेरिका ने ओमान की खाड़ी में तेल के टैंकरों पर हुए

हमले के मद्देनजर पश्चिम एशिया में अपने एक हजार अतिरिक्त सैनिक

तैनात करने का फैसला किया है। अमेरिका के कार्यवाहक रक्षा मंत्री

पैट्रिक शानाहन ने सोमवार को एक वक्तव्य जारी कर यह जानकारी दी।

श्री शानाहन ने कहा, ‘‘ अमेरिका की सेंट्रल कमान की ओर से अतिरिक्त

सैनिकों की मांग को देखते हुए और ज्वाइंट चीफ ऑफ स्टाफ तथा

व्हाइट हाउस से सलाह करने के बाद, मैंने पश्चिम एशिया में वायु,

नौसैनिक समेत तमाम रक्षा चुनौतियों का सामना करने के लिए लगभग

एक हजार अतिरिक्त सैनिकों की तैनाती को अधिकृत किया है।’’

श्री शानाहन ने कहा कि अमेरिका ईरान के साथ किसी भी प्रकार का

संघर्ष नहीं चाहता है। क्षेत्र में अपने हितों और कर्मियों की सुरक्षा के

लिए वह अतिरिक्त सैनिकों की तैनाती कर रहा है। अमेरिकी रक्षा मंत्री

ने कहा, ‘‘ हाल में ईरान की ओर से किए गए हमलों से हमें मिली खुफिया

जानकारी और पुख्ता हुई है जिसमें ईरानी सुरक्षाबलों के उद्देश्यों का

पता चलता है।’’ ओमान की खाड़ी में गुरुवार को होरमुज जलडमरूमध्य के

नजदीक दो तेल टैंकरों अल्टेयर और कोकुका करेजियस में विस्फोट किया गया था।

पश्चिम एशिया में ईरान और अरब के खाड़ी देशों के जल क्षेत्र में

हुए इस हादसे के कारणों का अभी तक पता नहीं चल सका है।

अमेरिका के विदेश मंत्री माइक पोम्पियो

ने इसके लिए ईरान को जिम्मेदार ठहराया है। श्री पोम्पियो के मुताबिक

अमेरिका ने खुफिया जानकारी के आधार पर ये आरोप लगाए हैं।

अमेरिकी सेना ने अपने दावे के पक्ष में एक वीडियो जारी किया है

जिसमें ईरानी सुरक्षाबल एक टैंकर से विस्फोटक हटाते हुए दिख रहे हैं।

ब्रिटेन के विदेश मंत्रालय ने ईरानी सेना के रिवोल्यूशनरी गार्ड दल को

ओमान की खाड़ी में तेल के टैंकरों पर हमले के लिए जिम्मेदार ठहराया है।

ईरान के विदेश मंत्री मोहम्मद जावेद जरीफ ने कहा है कि अमेरिका,

इजरायल और सऊदी अरब उसके खिलाफ अभियान चलाकर तेल टैंकरों पर

हुए हमलों के झूठे आरोप लगाने का प्रयास कर रहे हैं। रूस के उपविदेश

मंत्री सर्गेई रयाबकोव ने जांच से पूर्व ईरान पर आरोप लगाने वाले देशों को

चेतावनी दी है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने गत वर्ष मई में ईरान

परमाणु समझौते से अपने देश के अलग होने की घोषणा की थी।

इसके बाद से ही दोनों देशों के रिश्ते बहुत ही तल्ख हो गये हैं।

इस परमाणु समझौते के प्रावधानों को लागू करने को लेकर भी

संशय की स्थिति बनी हुई है। गौरतलब है कि वर्ष 2015 में ईरान ने

अमेरिका, चीन, रूस, जर्मनी, फ्रांस और ब्रिटेन के साथ एक समझौते पर

हस्ताक्षर किए थे। समझौते के तहत ईरान ने उस पर लगे आर्थिक प्रतिबंधों

को हटाने के बदले अपने परमाणु कार्यक्रम को सीमित करने पर सहमति जतायी थी।



Rashtriya Khabar


One Comment

Leave a Reply

WP2FB Auto Publish Powered By : XYZScripts.com