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अमेरिका के एंपायर स्टेट बिल्डिंग से भी आकार में बड़ा लेकिन दूर से गुजरेगा

  • खगोलीय पिंड का नाम 1993 बीएक्स 3 है

  • नियर अर्थ स्टडी सेंटर का उदघाटन भी शीघ्र

  • एक और बड़ा उल्कापिंड इसी माह गुजर चुका है

  • कुर्सी से ट्रंप हटेंगे और करीब से गुजर गया बड़ा उल्कापिंड

राष्ट्रीय खबर

रांचीः अमेरिका के एंपायर स्टेट बिल्डिंग का आकार बहुत ही विशाल है। उसके आकार से

बड़ा उल्कापिंड हो तो समझा जा सकता है कि उसकी गति और शक्ति कितनी होगी।

लेकिन खतरे की बात नहीं है। यह बड़ा उल्कापिंड पृथ्वी के काफी करीब से गुजर जाएगा।

वैज्ञानिकों ने इसके अध्ययन के बाद जो गणना की है, उसके मुताबिक इधर अमेरिका में

डोनाल्ड ट्रंप अपनी कुर्सी छोड़ेंगे उधर यह उल्कापिंड बिना कोई नुकसान पहुंचाये पृथ्वी के

बगल से गुजर जाएगा। हाल के दिनों में अमेरिका में राष्ट्रपति शासन, वाशिंगटन की हिंसा

और ट्रंप के खिलाफ महाभियोग के प्रस्तावों की वजह से ही वैज्ञानिकों ने ऐसी राय जाहिर

की है। वैसे यह बार बार स्पष्ट कर दिया है कि आकार में काफी बड़ा होने के बाद भी इस

उल्कापिंड से पृथ्वी को कोई नुकसान नहीं होने वाला है। जिस उल्कापिंड के आगे बढ़ने की

स्थिति पर लगातार निगरानी हो रही है, उसका नाम 1993 बीएक्स 3 है। यह आगामी 18

जनवरी (अमेरिका के समय में 17 जनवरी) को सुबह तीन बजकर 49 मिनट पर पृथ्वी के

सबसे करीब था। यह बताते चलें कि राष्ट्रपति पद संभालने के बाद तीन दिनों के भीतर

नये राष्ट्रपति जो बिडेन नासा के नियर अर्थ स्टडी सेंटर का उदघाटन भी करने वाले हैं।

अभी पृथ्वी के दूर लेकिन तेज गति से आता हुआ

अभी की जानकारी के मुताबिक यह उल्कापिंड वर्तमान में पृथ्वी से करीब 44 लाख मील

की दूरी पर है। यह दूरी पृथ्वी से चांद की दूरी का 18 गुणा है। लेकिन इसके आगे बढ़ने की

धुरी उसे पृथ्वी के करीब ला रही है। वर्ष 1992 में पहली बार जब उसे देखा गया था, तभी से

उसकी निगरानी हो रही है। आकार में यह करीब 1345 फीट चौड़ी है। 

अमेरिका के एंपायर स्टेट बिल्डिंग 1250 फीट ऊंची है। अभी इस उल्कापिंड के आगे बढ़ने

की रफ्तार आठ हजार मील प्रति घंटा है।

अमेरिका के एंपायर स्टेट बिल्डिंग की ऊंचाई 1250 फीट

यानी यह उल्कापिंड किसी राइफल के बुलेट से भी चार गुणा अधिक गति से पृथ्वी की धुरी

की तरफ आ रही है। पृथ्वी के सबसे करीब होने के दौरान भी उसकी दूरी इतनी नजदीक

नहीं होगी कि वह पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण के प्रभाव में आ जाए। इसी वजह से इस

उल्कापिंड से कोई खतरा नहीं होन की जानकारी दी गयी है। बताते चलें कि खगोल

वैज्ञानिक वर्तमान में करीब 25 हजार ऐसे खगोलीय पिंडों की निरंतर निगरानी कर रहे हैं,

जिनके कभी भी पृथ्वी के करीब आने की आशंका है। वैसे धुरी में निरंतर हो रहे बदलाव की

वजह से इनमें से कुछ उल्कापिंड अगली शताब्दी में निश्चित तौर पर पृथ्वी के काफी

करीब होंगे। जो खगोलीय पिंड पृथ्वी के करीब सकते हैं, उनमें से कुछ धूमकेतु भी हैं। इनमें

से अधिकांश का आकार एक किलोमीटर से कम का है। इसलिए पृथ्वी के संपर्क में आने के

बाद भी उनमें से अधिकांश गिरने के पहले ही जलकर राख हो जाएंगे। लेकिन फिर भी

किसी उल्कापिंड के अचानक दिशा बदलकर पृथ्वी की तरफ आने की आशंका से भी कतई

इंकार नही किया जा सकता है।

इसी माह के प्रारंभ में भी एक बड़ा उल्कापिंड पृथ्वी के करीब से गुजर चुका है। 2015 एनयू

13 नाम का यह पिंड आकार में करीब 2230 फीट था। वह भी पृथ्वी के 35 लाख मील की

दूरी से गुजरा है। पृथ्वी के करीब से गुजरते वक्त उस उल्कापिंड की गति 33 हजार 700

मील प्रति घंटा थी। जाहिर है कि इतनी तेज गति से पृथ्वी पर गिरने वाला कोई भी पिंड

अधिक नुकसान कर सकता है।

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