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अमेरिकी विशेषज्ञ ने कहा युद्ध हुआ तो चीन का सब कुछ बिगड़ जाएगा




ताइवान को लेकर बन रहा हैं बड़े युद्ध का माहौल
चीन का सारा विकास स्वाहा हो जाएगा युद्ध से
ताइवान के पक्ष में मजबूती खड़े हैं दूसरे देश
रुस ने कहा ताइवान को चीन का हिस्सा है

वाशिंगटनः अमेरिकी विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर ताइवान को लेकर चीन अपनी जिद पर अड़ा रहता है तो युद्ध अवश्यंभावी है। वैसी स्थिति में अमेरिकी सहित ताइवान के अन्य मित्र देश भी इसमें हस्तक्षेप करेंगे।




ऐसी स्थिति चीन को वहां पहुंचा देगी, जहां अब तक उसके विकास की सारी उपलब्धियां खत्म हो जाएगी। युद्ध का परिणाम चाहे जो हो लेकिन चीन को फिर से सब कुछ शुरु करना पड़ेगा।

इसलिए ताइवान को जबरन अपने देश में शामिल करने की जिद के पहले चीन को सारे अंतर्राष्ट्रीय समीकरणों पर दोबारा से गौर कर लेना चाहिए।

अमेरिकी नौसेना के कर्नल रहे ग्रांट न्यूजहैम ने पहली बार अपनी यह राय जाहिर की है। वह इसके पहले जापान के साथ अमेरिकी नौसेना के संपर्क अधिकारी के पद पर रह चुके हैं।

जापान की नौसेना के साथ जुड़े होने की वजह से उन्हें चीन और ताइवान की भौगोलिक स्थिति और सामरिक शक्ति का बेहतर अनुभव है।

उन्होंने कहा कि चीन के अधिकारी लगातार यह दबाव बना रहे हैं कि ताइवान उनके देश का हिस्सा रहा है इसलिए उसका एकीकरण किया जाए।




चीन और ताइवान के बीच हाल के दिनों में जिस तरीके से तनाव बढ़ा हुआ है, उसकी वजह से ही ताइवान के पक्ष में खड़े देशों ने दक्षिण चीन के सागर में एक साथ मिलकर सैन्य अभ्यास भी किया है। इस दौरान ही अमेरिका के परमाणु पनडुब्बी के किसी अज्ञात वस्तु से टकराने की वजह से भी तनाव कायम है।

अमेरिकी विशेषज्ञ की राय चीन की जिद के समय

अमेरिकी विशेषज्ञ की राय के बीच रुस ने ताइवान को चीन का हिस्सा बताया है। दरअसल तनाव के इस मौके पर रुस के ऐसे बयान को भी गंभीर समझा जा रहा है।

इनदिनों रुस भी पूर्व के सोवियत संघ के समय एक रहे देशों के एकीकरण के प्रयास में लगा हुआ है। इसलिए उसने चीन के पक्ष में बयान देकर चीन के साथ अपने रिश्ते और बेहतर बनाने की कूटनीतिक चाल चली है।

रुस की इस टिप्पणी के बाद भी स्पष्ट है कि ताइवान के पक्ष में फिलहाल अमेरिका और मजबूती के साथ खड़ा रहेगा क्योंकि एशियाई क्षेत्र में अपनी सैनिक मौजूदगी को कायम रखने के लिए यह अमेरिकी चाल है।

साथ ही वह अपने मित्र देशों मसलन जापान को भी अपने पक्ष में रखते हुए ताइवान के सैन्य संतुलन को कायम रखना चाहता है।



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