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कंप्यूटर कार्यों की गति और सुरक्षा बढ़ाने जुटा है अमेरिका 




  • आंकड़ों को नये तरीके से सुरक्षित और तेज बनाने का प्रयोग

  • हैकरों के हमलों से परेशान हैं बड़ी संस्थाएं

  • सुरक्षा कवच को अन्य तकनीक से बनाना है

  • कंप्यूटरों को एक लाख गुणा तेजकरने का काम

राष्ट्रीय खबर

रांचीः कंप्यूटर कार्यों को और तेज करने की आवश्यकता अब हर दिन महसूस की जा रही

है। जैसे जैसे सूचना तकनीक का विकास हो रहा है, उस पर हमारी निर्भरता भी बढ़ती जा

रही है। इसके बीच ही अमेरिकी रक्षा प्रशासन एक ऐसी पद्धति तैयार करना चाहता है, जो

काफी तेज हो और हैकरों की पहुंच के बाहर भी रहे। दरअसल इसके लिए वर्तमान में जिस

इनक्रिप्सन विधि का इस्तेमाल होता है, उसे हैकर कई बार तोड़ लेते हैं। इसके बाद ही

जरूरी और गोपनीय दस्तावेज सार्वजनिक होते हैं अथवा उन सुरक्षा संबंधित दस्तावेजों के

सार्वजनिक हो जाने से कूटनीतिक परेशानियां भी बढ़ती हैं। बताते चलें कि काफी सुरक्षित

तरीके से  रखे गये अमेरिकी दस्तावेज भी लीक हुए थे। विकिलिक्स के नाम से जो

दस्तावेज सामने आ गये थे, उसने कई देशों में तख्ता पलट तक कर दिया था। कंप्यूटर

कार्यों को वर्तमान में जिस मशीन लैंग्वेज के जरिए इंसान से कंप्यूटर के बीच पहुंचाया

अथवा प्राप्त किया जाता है, उसके बारे में जानकारी अब सार्वजनिक है। इस तकनीक का

विकास होने के साथ साथ उसमें सेंध लगाने वालों की संख्या भी बढ़ी है। कई बार एक देश

का दूसरे देश के कारोबार पर हमला करने के लिए भी सामूहिक तौर पर हैकर काम करते हैं

और उससे परेशानियां और बढ़ जाती हैं। अमेरिकी रक्षा प्रशासन इन्हीं कंप्यूटर कार्यों को

और बेहतर और सुरक्षित तरीके से संपन्न करने की दिशा में प्रयासरत है। अभी भी आंकड़ों

का इनक्रिप्सन तो होता है लेकिन वे अभेद्य नहीं होते। अब इस बात पर काम चल रहा है

कि इन्हीं आंकड़ों को नई विधि से इनक्रिप्ट किया जाए ताकि वे हैकरों की पहुंच के बाहर

चले जाएं। इस किस्म की पद्धति के सफल होने के साथ साथ कंप्यूटर कार्यो की गति को

वर्तमान से और अधिक तेज करने की भी योजना है।

कंप्यूटर कार्यों पर आधारित होती चली गयी हैं हमारी दिनचर्या

इस नई विधि में आंकड़ा और इनक्रिप्सन के साथ साथ एक और अभेद्य सूचना तकनीक

दीवार बनाने की योजना है। इस विधि से जिसके पास इन आंकड़ो को देखने का अधिकार

होगा, उसके अलावा कोई और इन आंकड़ों तक पहुंच भी नहीं पायेगा। दरअसल यह विधि

भी सूचना तकनीक पर आधारित एक चाभी जैसी होगी। जिसके पास यह चाभी होगी वही

इसे खोल पायेगा। दूसरों के नजरों से इन आंकड़ों  की चाभी कहां हैं, यह नजर तक नहीं

आयेगी। कंप्यूटर कार्यों में सिर्फ हैकरों का खतरा भी नहीं होता बल्कि कंप्यूटर कार्यों में

काम आने वाले साफ्टवेयर और हार्डवेयर में भी जासूस छिपे होते हैं। इस मामले में चीन

सबसे अधिक बदनाम है जो अलग अलग तरीकों से अपने इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की मदद

से जासूसी कर व्यापारिक लाभ उठाता रहा है। डिफेंस एडवांस्ड रिसर्च प्रोजेक्ट एजेंसी

(डीएआरपीए) के प्रोग्राम मैनेजर टॉम रोंडेयू ने कहा कि आज के दौर में यह समझ पाना ही

कठिन है कि कौन सा कंप्यूटर सुरक्षित है और एक बार असुरक्षित कंप्यूटर में किसी

संवेदनशील आंकड़े को खोलने के बाद उसके गोपनीय बने रहने की कोई गारंटी नहीं होती।

एक बार कंप्यूटर कार्यों में गोपनीयता भंग होने की वजह से अनेक बार बहुत बड़े बड़े

आर्थिक अपराध भी हुए हैं। झारखंड और भारतीय संदर्भ में जामताड़ा का उल्लेख भी इसी

किस्म के साइबर अपराधों के लिए अधिक होता है। लेकिन इससे बड़े बड़े वित्तीय अपराध

भी इसी रास्ते से होते हैं। जिस विधि को विकसित करने पर अमेरिकी रक्षा प्रशासन काम

कर रहा है वह दरअसल मूल आंकड़ों और उसके इनक्रिप्सन के ऊपर एक चादर जैसा

समझा जा सकता है। अगर कोई बिना सटीक चाभी के इसमें प्रवेश करने की कोशिश

करता है तो यह चादर उसे इधर उधर भटकता रहता है और असली आंकड़ों को उसकी

पहुंच से बाहर रखता है।

हैकर अगर कोशिश करे तो भी वह भटकता रह जाएगा

किसी कारण से किसी रास्ते से अनधिकृत तौर पर प्रवेश की स्थिति में यह तकनीक पूरी

व्यवस्था को ही बंद कर देती है। ताकि आंकड़े सुरक्षित रहें और अनधिकृत व्यक्ति की

पहुंच से हमेशा बाहर ही रहें। लेकिन जैसे जैसे सूचना तकनीक का विकास हो रहा है, इन

सुरक्षा विधियों की वजह से भी वर्तमान प्रजाति के कंप्यूटरों कार्यों का गति धीमी हो जाती

है क्योंकि कंप्यूटर के अंदर उपकरणों को मूल कार्य के अलावा भी ढेर सारे काम करने पड़

जाते हैं। इसलिए अमेरिकी रक्षा प्रशासन अपनी इस सुरक्षा विधि के साथ साथ नये

प्रोसेसर भी बनाना चाहता है, जो वर्तमान कंप्यूटर कार्यों की तुलना में एक लाख गुणा

अधिक गति से काम कर सकते। इसके लिए भी एक बिना लाभ के काम करने वाली संस्था

एसआरआई इंटरनेशनल और इंटैल की एक इकाई को ऐसा प्रोसेसर तैयार करने की

जिम्मेदारी सौंपी गयी है।



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