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शहरी इलाके में डेढ़ सौ बंदरों से लोग परेशान

प्रतिनिधि

जलपाईगुड़ीः शहरी इलाके में अचानक डेढ़ सौ बंदर घुस आये हैं। इतनी अधिक संख्या में

बंदरों के अचानक शहरी इलाके में चले आने से शहर के हर इलाके में लोग परेशान हो गये

हैं। आम तौर पर बंदरों का इतना बड़ा झूंड लोग देखने के लिए अभ्यस्त नहीं हैं। ऊपर से

बंदरों की बंदरों वाली हरकत से भी लोगों को हर किस्म का नुकसान हो रहा है। अपने अपने

घरों की छतों पर बंदरों के तांडव से लोगों के कपड़ों का काफी नुकसान हो चुका है। इसके

अलावा मौका पाते ही बंदर रसोई के अंदर या खाना रखने इलाकों तक धावा बोल रहे हैं।

शहरी इलाके के स्थानीय लोगों का अनुमान है कि जलपाईगुड़ी के सदर इलाके में बंदरों का

यह बहुत बड़ा झूंड राजगंज, बोदागंज या वैकुंठपुर के जंगल से चला आया है। अब शहरी

इलाके में आने के बाद अपनी भागम भाग में वे सामान भी तोड़ रहे हैं। दरअसल इस शहरी

इलाके में भी काफी पेड़ हैं। वनों का आच्छादन अधिक होने के साथ साथ यहां फलों के पेड़

भी काफी तादाद में हैं। स्थानीय लोग मान रहे हैं कि शायद आम, जामुन, कटहल और

अमरुद के पेड़ों के लोभ से ही बंदरों का यह झूड यहां ठिकाना बना चुका है। वैसे शहरी

इलाके में आने की वजह से इतनी अधिक संख्या में लोगों की भीड़ देखकर भी जंगली

जानवर हैरान और परेशान है। कई बार सिर्फ लोगों द्वारा खदेड़े जाने पर भी भागने के

चक्कर में वे अधिक नुकसान कर रहे हैं।

शहरी इलाके में छतों से कपड़े लेकर भाग रहे बंदर

सबसे अधिक परेशानी छत या बाहर सूख रहे कपड़ों को लेकर है। अपनी आदत के

मुताबिक बंदर इन कपड़ों की खींचातानी करते है। अनेक कपड़ों को वे अपने साथ ले जाते

हैं और कई मामलों में इस खींच तान की वजह से लोगों के कपड़े फट भी रहे हैं। स्थानीय

निवासी सुब्रत मंडल ने कहा कि पहले भी यहां सिर्फ फल खाने के लिए बंदर आया करते

थे। लेकिन इस बार उनकी संख्या पहले के मुकाबले बहुत अधिक है। आम तौर पर जंगल

में भी बंदरों का इतना बड़ा झूंड नहीं देखा जाता है। कई इलाकों में लोगों ने उन्हें भगाने के

लिए पटाखे भी फोड़े हैं। इसके बाद भागने के क्रम में मनुष्यों के पूर्वजों ने अधिक नुकसान

कर दिया है। अब वन विभाग के अधिकारियों के आने के बाद इन बंदरों के झूंड को धीरे

धीरे सावधानी से फिर से जंगल की तरफ ले जाने की कोशिश शुरु हो गयी है।


 

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