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कोरोना के बारे में नियमित जानकारी आपके फायदे में है

  • जितनी जानकारी है उसे भी काम में लगाइये

  • दवा आने तक बचाव की सबसे बेहतर उपाय

  • संक्रमण से दूर रहने का तरीका सोशल डिस्टेंसिंग

  • विषाणुओं को रोककर जीती जा सकती है यह जंग

प्रतिनिधि

नईदिल्लीः कोरोना के बारे में बहुत कुछ अधूरा और अस्पष्ट है। खास तौर पर वैज्ञानिक

परिभाषा में जिन तथ्यों का वर्णन किया गया है, वह आम आदमी की समझ से ऊपर

निकल जाता है। इसलिए यह कोशिश होनी चाहिए कि इस विषाणु के फैलने और उसे

फैलने से रोकने के बारे में अधिकाधिक जानकारी हासिल की जाए। इसमें यह याद रखना

अनिवार्य शर्त है कि व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी से प्राप्त होने वाला ज्ञान आपको परेशानी में भी

डाल सकता है। अब तक ऐसे अनेक संदेश आपकी आंखों से गुजरे होंगे, जो उस वक्त को

सच और हैरान करने वाले लगे थे लेकिन बाद में फर्जी साबित हुए। कुछ लोगों ने अपने

अपने फायदे के लिए ऐसा करना जारी रखा है। बिना सोचे समझे कोरोना के बारे में इस

तरह  की सूचनाओं को तुरंत फॉरवर्ड करने की बीमारी आपको कानूनी पचड़े में भी डाल

सकती है।

अब तक की वैज्ञानिक जानकारी का निष्कर्ष है कि हम सदैव ही वायरसों से घिरे रहते हैं।

यह सुक्ष्म प्राणी लगातार हमपर हमला भी करता रहता है। लेकिन हमारे शरीर की

प्रतिरोधक शक्ति इससे लड़ती रहती है। कई बार कोविड 19 के जैसे वायरस के संक्रमण से

ही हमें सर्दी खांसी होती है। लेकिन शरीर की आंतरिक प्रतिरोधक शक्ति उसे मार कर

बाहर निकाल देती है। कोरोना वायरस यानी अभी का सार्स कोविड -2 इस कड़ी का नया

वायरस है। इसके ईलाज की अंतिम दवा का निर्धारण अभी नहीं हो पाया है।

कोरोना के बारे में प्रारंभिक जानकारी भी बचाव बताती है

सामान्य आकलन के मुताबिक संक्रमित व्यक्ति की खांसी अथवा छींक से निकले विषाणु

कण जमीन या हवा में तीन घंटे तक ही असरदार होते हैं। ऐसे में अगर संक्रमित व्यक्ति

किसी दूसरे से दूर रहे तो किसी और तक यह बीमारी नहीं पहुंचा पायेगा। प्लास्टिक,

स्टेनलेस स्टील, शीशा जैसे चिकना और कठोर सतह पर इसके 72 घंटे तक प्रभावी होने

का आकलन है। लेकिन यह जांचा जा चुका है कि इस दौरान इन सतहों पर वायरस की

मारक क्षमता में तेजी से कमी आती जाती है। इसी तरह कार्डबोर्ड, कागज, कपड़े और टाट

या बोरा जैसी सतहों पर यह 24 घंटे तक रहता है लेकिन अति शीघ्र अपनी मारक क्षमता

खो देता है। यानी इसपर भी तीन घंटे से अधिक की मारक क्षमता नहीं रह जाती। शायद

इसी वजह से इन तमाम आशंकाओं को समाप्त करने के लिए ही एक दूसरे से दूर रहने

तथा समय समय पर हाथ धोने के अलावा बाहर के वस्त्रों को नियमित धोने की सलाह दी

जाती है। साथ ही हर बार साबुन से हाथ धोने के बाद उसे अच्छी तरह सूखाने की भी सलाह

दी गयी है।

गनीमत है कि यह संक्रमण हवा से नहीं फैलता

गनीमत है कि यह नया विषाणु हवा में संक्रमण नहीं फैलाता है। लिहाजा इंसान से इंसान

तक यह संक्रमण जिन माध्यमों से पहुंचता है, उन माध्यमों को रोककर भी हम इससे

जीत सकते हैं। इस बीच विषाणु को हद में रखने की कोशिशों के बीच यह उम्मीद की जा

सकती है कि कोई अच्छी दवा हमारे बीच आ जाएगी। इस विषाणु के बारे में जो जानकारी

अब तक सामने आ चुकी है, उसे भी आम आदमी की भाषा में समझ लें। यह संक्रमण

आपके गले पर सबसे पहले हमला करता है। इंसान के शरीर के अंदर की परिस्थितियां ही

वायरस के उत्पादन की फैक्ट्री बन जाती है। वह लाखों की संख्या में वंशवृद्धि करता है।

सर्दी खांसी होने के दौरान यह वायरस अपनी ताकत और संख्या बढ़ाता चला जाता है।

उसके बाद यह आपके सांस की नलियों पर कब्जा करने लगता है। इसी वजह से सांस की

तकलीफ होती है।

यह जान लेना ही उचित होगा कि इसके संक्रमण का खतरा अधिक उम्र के लोगों पर

अधिक है। लेकिन साथ में कोरोना के बारे में यह भी जान लीजिए कि किसी नौजवान को

भी अगर संक्रमण हुआ तो उन्हें भी अस्पताल में भर्ती कराना पड़ सकता है। साथ ही कम

उम्र के लोग चूंकि सामाजिक तौर पर अधिक मिलते जुलते हैं इससे अन्य लोगों तक

संक्रमण उनके माध्यम से अधिक पहुंचता है। इस वायरस की जानकारी मिले करीब तीन

माह हो चुके हैं। पहली बार चीन से इसकी खबर आयी थी। तब से इस पर निरंतर शोध

जारी है। लेकिन इसके फैलने के बारे में अब तक बहुत कुछ नहीं जाना जा सका है। इसी

वजह से यह पूरी दुनिया में फैलता ही जा रहा है।

वायरस के निष्प्रभावी होने की अपनी समय सीमा है

संक्रमित व्यक्ति की छींक, थूक अथवा खांसी से निकलने वाली छोटी छोटी बूंदों में यह

वायरस होता है। यह कण जिस सतह पर गिरते हैं, उनकी स्थिति पर वायरस कितने दिनों

तक जिंदा रहेगा, यह निर्भर करता है। यह माना जा रहा है कि तापमान बढ़ने से इस

वायरस की मारक क्षमता कम होती चली जाती है। साथ ही यह अलग अलग सतह पर

अलग अलग समय तक ही प्रभावी रह सकता है। लेकिन इसके लिए भी ठोस विज्ञान

सम्मत रिपोर्ट आने की प्रतीक्षा है।

अब तक वैश्विक स्तर पर इसके साढ़े पांच लाख से अधिक केस हो चुके हैं, जिनमें 24

हजार से अधिक लोगों की मौत हुई है और सवा लाख से अधिक लोग पूरी तरह स्वस्थ भी

हो चुके हैं। इसलिए संक्रमण से अस्सी फीसदी लोगों के ठीक होने का रिकार्ड वैज्ञानिकों के

पास है। इसलिए जब तक दवा का आविष्कार न हो, इससे बचाव का सबसे सरल और

पुख्ता तरीका यही है कि लोग एक दूसरे से दूरी बनाये रखें। ताकि एक व्यक्ति का संक्रमण

किसी दूसरे व्यक्ति के माध्यम से होते हुए अन्य लोगों तक नहीं पहुंचे।


 

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