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मोदी के करीबी रहे एके शर्मा बने यूपी भाजपा के उपाध्यक्ष

योगी को पहली बाजी में मात दी अमित शाह ने

चुनाव से पहले पार्टी के अंदर गुटबाजी चरम पर

योगी को ही बड़ी चुनौती मानती है दिल्ली

राष्ट्रीय खबर

लखनऊः मोदी के करीबी अधिकारी के तौर पर परिचित एके शर्मा को अंततः उत्तरप्रदेश

भाजपा का उपाध्यक्ष बनाकर लखनऊ भेजा गया है। जाहिर है कि वह संगठन के रास्ते से

अब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर नियंत्रण के लिए भेजे गये हैं। उनके नाम की चर्चा

पहले राज्य में उपमुख्यमंत्री बनाने पर हुई थी लेकिन योगी ने उसका विरोध कर दिया था।

हाल के दिनों में योगी आदित्यनाथ के दिल्ली दौरे और बड़े नेताओं के साथ उनकी

मुलाकात के दौरान भी इसकी कई बार चर्चा हुई थी। इसलिए माना जा रहा है कि सभी

पक्षों की राय सुन समझ लेने के बाद यह बीच का रास्ता निकाला गया है। वैसे श्री शर्मा को

यहां भेजे जाने के बाद पार्टी के अंदर की गुटबाजी कम होगी या और बढ़ेगी, यह देखने

वाली बात होगी। समझा जा रहा है कि भाजपा नेतृत्व अगले वर्ष यहां होने वाले

विधानसभा चुनाव को लेकर चिंतित है। खास तौर पर किसान आंदोलन के बाद उपजी

परिस्थितियों के बाद जातिगत समीकरणों को साधने के लिए भी पूर्व विधान पार्षद श्री

शर्मा को वहां प्रमुख जिम्मेदारी दिये जाने की सोच काफी अरसे से चल रही थी। भारतीय

प्रशासनिक सेवा के अधिकारी रहे श्री शर्मा पूर्व में नरेंद्र मोदी के करीबी लोगों में माने जाते

रहे हैं। दूसरी तरफ इस बात की भी चर्चा है कि कोरोना प्रबंधन के मामले में राज्य सरकार

की विफलता से भी भाजपा का केंद्रीय नेतृत्व चिंतित है। इसी वजह से वहां संगठन में नई

जान फूंकने की यह कवायद की गयी है। उन्हें इस वर्ष श्री मोदी के संसदीय क्षेत्र वारणसी में

भी कोरोना की स्थिति में सुधार के लिए भेजा गया था। वह मूल रुप से पूर्वी उत्तर प्रदेश के

मउ के रहने वाले हैं।

मोदी के करीबी अधिकारी उत्तर प्रदेश के मउ निवासी है

कोरोना की दूसरी लहर के दौरान गंगा में तैरती लाशों की वजह से उत्तर प्रदेश सरकार

जबर्दस्त आलोचनाओं के केंद्र में आ गयी थी। इस दौरान लग रहे आरोपों पर प्रदेश सरकार

का कोई भी व्यक्ति सही तरीके से उठ रहे सवालों का उत्तर भी नहीं दे पाया था। इससे भी

पार्टी की लोकप्रियता में कमी आयी है, इसे शायद भाजपा का नेतृत्व स्वीकार कर चुका है।

दूसरी तरफ पश्चिमी उत्तर प्रदेश के इलाकों में किसान आंदोलन की वजह से भाजपा के

स्थानीय नेता अपने इलाकों का दौरा तक नहीं कर पा रहे हैं। हाल ही में संपन्न पंचायत

चुनाव में किसान आंदोलन की नाराजगी का परिणाम भी भाजपा नेतृत्व की जानकारी में

है। इससे पूर्व उन्हें उत्तरप्रदेश में मंत्री बनाने की चर्चा के साथ ही योगी आदित्यनाथ की

कुर्सी खतरे में होने की चर्चा भी फैलने लगी थी। लेकिन यह माना जा सकता है कि अपने

जिद्दी स्वभाव के कारण योगी किसी बात पर समझौता नहीं करने पर अड़ गये थे। ऐसा

पहले भी उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के चयन के दौरान भी उनके अड़ जाने की वजह से

प्रधानमंत्री की पसंद मनोज सिन्हा को सीएम नहीं बनाया जा सका था। भाजपा के प्रभारी

राधा मोहन सिंह और बीएल संतोष ने यहां आकर विधायकों से अलग अलग बात भी की

थी। अंदरखाने से इस बात की जानकारी मिल रही है कि केंद्रीय मंत्रिमंडल के पुनर्गठन में

यूपी के किसी दलित को स्थान दिया जाएगा जबकि किसी जाट को यूपी के कैबिनेट में

एडजस्ट करने की तैयारी है।

केंद्रीय मंत्रिमंडल का भी पुनर्गठन किये जाने की चर्चा

इस बीच आरएसएस ने भी अपनी तरफ से यह स्पष्ट संदेश दिया था कि इस चुनाव के

दौरान अगर यूपी में कोई बदलाव किया जाता है तो उसका पूरे प्रदेश के साथ साथ वर्ष

2024 में होने वाले लोकसभा चुनाव पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। इसी वजह से अब इन

तमाम परिस्थितियों को ध्यान में रखकर मोदी के करीबी श्री शर्मा को संगठन की

जिम्मेदारी सौंपकर बिगड़ी हुई परिस्थितियों को अनुकूल बनाने की कवायद प्रारंभ की

गयी है।

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