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उन्नाव की घटना कानून को सख्त होने का संकेत देती है

उन्नाव की घटना में एक बलात्कार पीड़िता को सरे आम जला दिया गया। इसे लेकर पूरे देश में विवाद और आक्रोश

उपजने  के बीच ही हैदराबाद से यह सूचना आयी है कि महिला पशु चिकित्सक से बलात्कार करने के चारों आरोपी

पुलिस मुठभेड़ में मारे गये हैं।

इस घटना के बारे में जो जानकारी मिली है उसके मुताबिक वह लड़की अपने वकील से मिलने रायबरेली जाने

वाली थी। स्टेशन जाने के रास्ते में ही शिवम और शुभम नामक दो युवकों ने उसे जला दिया।

डाक्टरों के मुताबिक महिला 90 फीसदी तक जल चुकी है।

डॉक्टरों ने बताया है कि उसकी हालत बेहद गंभीर है उन्नाव के बिहार थाना क्षेत्र के सिंदूपुर गांव में

बलात्कार की एक पीड़िता को पांच लोगों ने कथित तौर पर आग के हवाले कर दिया।

बलात्कार के आरोपी को यह साहस कैसे हुआ इसे समझने की जरूरत है

महिला का आरोप है कि तड़के करीब चार बजे शिवम त्रिवेदी आदि पांच लोगों ने उसे रोक लिया

और ज्वलनशील पदार्थ डालकर जिंदा जलाकर मार डालने का प्रयास किया।

उन्होंने बताया कि सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और महिला को पहले जिला अस्पताल ले जाया गया ।

रायबरेली के लालगंज थाने में महिला ने बलात्कार के आरोप में शिवम और शुभम नामक

दो युवकों को नामजद किया था। पुलिस के मुताबिक इस आग लगाने की घटना में शामिल लोगों में से

एक बलात्कार कांड का आरोपी भी है।

कांग्रेस सहित विपक्षी दलों ने राज्य सभा में शून्य काल के दौरान उन्नाव बलात्कार कांड पर चर्चा की अनुमति

न दिये जाने पर हंगामा किया जिसके बाद सभापति वेंकैया नायडू ने सदन की कार्यवाही दोपहर 12 बजे तक

स्थगित कर दी।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उन्नाव के बिहार क्षेत्र में हुई घटना का संज्ञान लेते हुए अधिकारियों को सरकारी खर्च

पर पीड़िता को चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के निर्देश दिये। मुख्यमंत्री ने जिला प्रशासन व पुलिस के अधिकारियों

को आरोपियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई करने और न्यायालय से प्रभावी दण्ड दिलाने कार्यवाही करने के निर्देश दिये है।

श्री योगी ने मण्डलायुक्त, लखनऊ एवं पुलिस महानिरीक्षक को तत्काल घटना स्थल का निरीक्षण कर शाम तक

अपनी रिपोर्ट उपलब्ध कराने के निर्देश भी दिए हैं।

उन्नाव की घटना न्यायपालिका को अपना रवैया बदलने को कह रही है

इस पूरी घटना पर देश में आक्रोश होने के बाद भी जो गंभीर तथ्य सामने निकल कर आता है, उसमें कानून के प्रति

लोगों का भय कम होना भी है। बलात्कार के आरोपियों में से एक अगर इस जलाने के मामले में शामिल था तो यह

स्पष्ट है कि कानूनी प्रावधानों का भय उसे नहीं था। ऐसे में बलात्कार जैसे मामलों में कानून को अपना रुख थोड़ा

और कड़ा करने की जरूरत है।

इसके लिए कानूनी प्रावधानों में संशोधन किये बिना भी न्यायिक सक्रियतावाद से इसे आसानी से लागू किया जा

सकता है। हैदराबाद में बलात्कार के आरोपियों को पुलिस मुठभेड़ में मारे जाने की घटना के बीच ही इस मुद्दे पर देश

का ध्यान बना हुआ है।

हाल के वर्षों में बलात्कार के आरोपियों के अधिक आक्रामक रुख सामाजिक सोच को प्रदर्शित करने वाले प्रमाण है।

ऐसा माना जा सकता है कि बलात्कार जैसे जघन्य अपराध में शामिल लोगों को इस बात की चिंता नहीं है कि

उनके एक कृत्य से समाज का कितना नुकसान होता है।

जिनलोगों को इस सामाजिक कृत्य की चिंता नहीं है, उन्हें कानून की कड़ाई से भी सामाजिक तौर पर यह सामाजिक

संदेश देने की जरूरत है कि इस किस्म के अपराध में शामिल लोगों के लिए समाज में बच निकलने अथवा दोबारा

सम्मान अर्जित करने का कोई रास्ता नहीं बचता है।

अपराधियों को बच निकलने का रास्ता नहीं मिलना चाहिए

दरअसल कानून की बारिकियों के बीच से ऐसे आरोपी जब बेदाग बच निकलते हैं तो पूरे समाज को जो संदेश मिलता है,

वह अपराध को किसी न किसी रुप में बढ़ावा देने वाला साबित होता है।

इसलिए अब पूरे देश में इस किस्म की घटनाओं को रोकने के लिए नये सिरे से न्यायिक सक्रियतावाद को बढ़ावा

देकर बलात्कारियो के प्रति कठोर नजरिया अपनाने की जरूरत है।

इसके माध्यम से हम समाज में कमसे कम इस श्रेणी के अपराधों में शामिल होने वालों के मन में यह

खौफ पैदा कर सकते हैं कि इस किस्म के अपराध में शामिल होने की स्थिति में उनका हश्र बुरा होने वाला है।

हैदराबाद में पुलिस मुठभेड़ की सच्चाई क्या है, इसे जाने बिना भी वर्तमान में देश का एक बड़ा तबका पुलिस की

कार्रवाई के पक्ष में खड़ा है।

यदि इस किस्म के अपराधों की सजा की जिम्मेदार पुलिस पर इसी तरीके से न्याय करने पर छोड़ दिया गया तो

आने वाले दिनों में इस शक्ति का दुरुपयोग भी हो सकता है। इसलिए न्यायपालिका को सिर्फ अपना दृष्टिकोण

कठोर कर ऐसे अपराधों में शामिल असली अपराधियों के प्रति सख्त रवैया अपनाने से भी देश में ऐसे अपराध

कम किये जा सकते हैं।

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