fbpx Press "Enter" to skip to content

कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने ईजाद की नई स्प्रे

  • कोरोना की रोकथाम के लिए बनाया नाक का स्प्रे

  •  नैनो बॉडी घेर लेता है वायरस प्रोटिन को

  •  व्यापारिक उत्पादन के लिए प्रयास जारी है

  •  इस नैजल स्प्रे का नाम एयरोनैब रखा गया है

प्रतिनिधि

नईदिल्लीः कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने नाक के लिए एक स्प्रे तैयार

किया है। इसके बारे में दावा किया गया है कि यह कोरोना वायरस को फैलने से अथवा

शरीर के अंदर प्रवेश करने से काफी हद तक रोक सकता है। उल्लेखनीय है कि इस शोध के

साथ भी एक भारतवंशी वैज्ञानिक जुड़ा हुआ है। इसका परीक्षण कर लेने के बाद अब

विश्वविद्यालय के लोग इसके व्यापारिक उत्पादन के लिए विभिन्न कंपनियों से विचार

विमर्श कर रहे हैं। सॉन फ्रांसिस्को के इस शैक्षणिक संस्थान ने इस नाक के स्प्रे के बारे में

दावा किया है कि कोरोना वायरस के स्पाइक प्रोटिन के आचरण को देखते हुए ही इसे

बनाया गया है। यह वायरस के शरीर के अंदर प्रवेश के मार्ग में बाधा उत्पन्न कर देता है।

जिस नाम के स्प्रे को तैयार किया गया है, उसका नाम एयरोनैब रखा गया है। इसे बनाने

वालों का दावा है कि यह मास्क जैसे बचाव की पद्धति से काफी उन्नत बचाव पद्धति है। इसे

वर्तमान में लगातार इस्तेमाल होने वाले पीपीई किट की तरह नाक का रक्षा कवच बताया

गया है। यह कहा गया है कि जब तक कोरोना के लिए दवा अथवा वैक्सिन तैयार नहीं हो

जाए, इससे अनेक लोगों की जान बच सकती है।

कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय के पीटर वाल्टर ने दी जानकारी

कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय के बॉयोकेमिस्ट्री विभाग और बॉयोफिजिक्स के प्रोफसर

पीटर वाल्टर इस शोध से जुड़े रहे हैं। उनके मुताबिक नाक में हवा के दबाव से अंदर जाने

वाला यह स्प्रे दरअसल उन रसायनों का मिश्रण है, जो नाक के अंदर से गले तक एक वैसी

पर्त तैयार करता है जिसकी वजह से कोरोना वायरस के स्पाइक प्रोटिन ही सक्रिय नहीं हो

पाते हैं। जब यह सक्रिय नहीं होता है तो किसी तरीके से अंदर आने वाले वायरस आगे कोई

नुकसान भी नहीं पहुंचा पाते हैं। उनके मुताबिक वायरस के ऊपरी आवरण के इस प्रोटिन

को यह रसायन एक रक्षा कवच बनकर ढक लेता है। इससे कवच के अंदर से वायरस कुछ

काम नहीं कर पाता है।

कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय के मिशेल स्कूल्फ ने उस शोध दल का नेतृत्व किया है,

जिनलोगों ने इसे बनाया है। स्कूल्फ खुद कहते हैं कि इस शोध में कई विधा के वैज्ञानिकों

ने एक साथ मिलकर काम किया है। अनुसंधान की गति और दिशा के बारे में यह बताया

गया है कि दरअसल यह जंगली प्राणी लामा (इलामा) के आचरण को ध्यान में रखकर

तैयार किया गया है। वैसे कोरोना से बचाव की पद्धति कई अन्य जानवरों में प्राकृतिक तौर

पर विद्यमान है।

भारतवंशी वैज्ञानिक डॉ आशीष मांगलिक का भी इसमें योगदान

इस शोध से जुड़े भारतवंशी सहायक प्रोफसर डॉ आशीष मांगलिक ने कहा कि वह पहले से

ही अपने अनुसंधान में नैनो कणों का इस्तेमाल करते आये है। इसलिए इन सुक्ष्म कणों के

आचरण और उनकी क्षमताओं के बारे में पहले से ही बहुत कुछ जानकारी थी। यह सुक्ष्म

कण शरीर के अंदर दरअसल में संकेत भेजने और शरीर के उसके अनुरुप प्रतिक्रिया करने

का निर्देश दिया करते हैं। इंसान तथा अन्य जानवरों के शरीर में मौजूद एंटीबॉडी भी इसी

पद्धति पर काम करता है। लेकिन इसकी खास बात यह है कि इंसानी शरीर में पाये जाने

वाले एंटीबॉडी के मुकाबले यह और भी छोटे आकार के हैं। इसलिए यह ज्यादा जल्दी और

बेहतर तरीके से सक्रिय होते हैं। इन सुक्ष्म कणों यानी नैनो बॉडिस की विशेषता यह भी है

कि उनमें आवश्यक संशोधन करना भी अपेक्षाकृत आसान है।

नैनो कणों में स्थायित्व अधिक होता है

कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने किया नया कमालएक बार सही तरीके से तैयार हो जाने के बाद वे काफी समय तक सक्रिय और स्थिर भी

रहते हैं यानी किसी बाहरी प्रभाव का उनपर जल्दी कोई असर नहीं होता है। वैज्ञानिक

मानते हैं कि इस वैज्ञानिक पद्धति की वजह से उनका व्यापारिक तौर पर उत्पादन भी

सहज और सस्ता है। इसे तैयार करने के लिए वैज्ञानिकों ने ई कोली बैक्टेरिया और खमीर

में उनका उत्पादन किया है। यह दोनों ही नैनो बॉडी बनाने के बड़े कारखाने के तौर पर

सफल साबित हुए हैं। तैयार हो जाने के बाद उसका परीक्षण किया गया है। जिसमें यह

पाया गया है कि यह नैजल स्प्रे नाक के रास्ते से अंदर जाने के बाद वायरस के अंदर आने

के बाद उसको आगे बढ़ने से रोक देता है। दरअसल वायरस जिस वैज्ञानिक पद्धति से

सक्रिय होता है, उस वैज्ञानिक क्रिया को ही यह रसायन रोक देता है क्योंकि वह वायरस के

कवच के प्रोटिन को काम नहीं करने देता। कई संशोधनों के बाद वह नैनो बॉडी तैयार हुई है

जो किसी भी दूसरे से दो लाख गुणा अधिक शक्तिशाली ह । डॉ मांगलिक मानते हैं कि यह

एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है, जिससे पूरी दुनिया को फायदा होने जा रहा है।


 

 

Spread the love
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
More from कोरोनाMore posts in कोरोना »
More from ताजा समाचारMore posts in ताजा समाचार »
More from दिल्लीMore posts in दिल्ली »
More from विज्ञानMore posts in विज्ञान »

2 Comments

Leave a Reply