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अंतरिक्ष में बेतरतीब तरीके से घूम रहा ‘घुसपैठिया’

  • वैज्ञानिकों ने ओउमुआमुआ’ नाम दिया

  • सिगार या खीरे जैसा है इसका आकार

  • कहीं न कहीं टकराने के बाद ऐसा हुआ है

प्रतिनिधि

नई दिल्ली: अंतरिक्ष में बेतरतीब तरीके से घूमते इस वस्तु पर वैज्ञानिकों की कड़ी नजर

है। कुछ-कुछ सिगार की शक्ल वाला अंतरिक्ष में ये ‘घुसपैठिया’ बेतरतीब तरीके से घूम रहा

है और वैज्ञानिकों का कहना है कि आने वाले अरबों सालों तक वो ऐसा ही करता रहेगा।

हमारे सौरमंडल से बाहर के इस ऐस्टरॉइड या क्षुद्रग्रह से टकराकर आ रही रोशनी पर

रिसर्च के बाद बेलफास्ट के वैज्ञानिकों ने ये बात कही है। क्वींस यूनिवर्सिटी के डॉक्टर वेस

फ्रेजर कहते हैं कि कभी न कभी इसकी टक्कर हुई होगी।

वैज्ञानिकों को अपनी ओर आकर्षित करने वाले इस अजीब खगोलीय वस्तु को

‘ओउमुआमुआ’ नाम दिया गया है। इस बारे में एक और दिलचस्प जानकारी सामने आई

है। ओउमुआमुआ किसी अन्य सौरमंडल से आया है। आकाश में इसके रास्ते से पता

चलता है कि ये हमारे पड़ोसी सौरमंडल में उत्पन्न नहीं हुआ है। शुरू में ये सोचा गया कि ये

चीज धूमकेतु हो सकती है, लेकिन इसमें धूमकेतु के व्यवहार, जैसे- धूल कण, बर्फ और

गैस मिश्रित पुच्छल संरचना जैसा कुछ नहीं पाया गया।

अंतरिक्ष में नजर आये इस क्षुद्रग्रह का नामकरण भी हुआ

ओउमुआमुआ क्षुद्रग्रह जैसा है, लेकिन इसका आकार असामान्य है क्योंकि इसे सिगार या

खीरे जैसा बताया जा रहा है। इसकी अधिकतम लंबाई-चौड़ाई 200 मीटर बताई जा रही है।

क्वींस यूनिवर्सिटी की टीम इसकी प्रकृति और इसके घूर्णन का सटीक पता लगाना चाहती

थी। ऐसा करने के लिए टीम ने कुछ समय तक इसकी चमक की विविधताओं का

अध्ययन किया। डॉक्टर फ्रेजर और उनकी टीम ने पाया कि यह अन्य छोटे तारों (क्षुद्र

ग्रहों) की तरह एक अंतराल पर नहीं घूम रहा बल्कि यह अव्यवस्थित तरीके से घूम रहा

था। ये किसी जिम्नास्ट की तरह पलट रहा था। साल 2018 में बीबीसी फोर के स्काई ऐट

नाइट कार्यक्रम में क्वींस यूनिवर्सिटी के शोधकतार्ओं ने इसे टेबल टेनिस के बैट की मदद

से दिखाया था। रिसर्च टीम ने बीबीसी फोर के प्रस्तुतकर्ता क्रिस लिन्टॉट से कहा था कि

यह बहुत तेजी से डगमगाने लगता है और यही कारण है कि हम इसे पलटने वाला कह रहे

हैं। बहुत संभावना है कि ओउमुआमुआ पहले किसी वस्तु से टकराया होगा। शोधकर्ता उस

टक्कर का वास्तविक समय नहीं बताते, लेकिन वो कहते हैं कि इसका इसी तरह पलटना

कम से कम एक अरब साल तक जारी रहेगा। वो कहते हैं कि पलटने से इसके सतह पर

तनाव और विकृति पैदा होती है जिससे निश्चित ही जैसे धरती पर ज्वार आता है और धीरे

धीरे कम होता है, उसी तरह इसकी ऊर्जा में कमी आएगी।

धीरे धीरे इसकी ऊर्जा की ताकत में कमी आयेगी

हालांकि यह प्रक्रिया बहुत धीमी है और इसमें बहुत लंबा वक्त लगेगा। वो कहते हैं कि हम

इसकी हाई-रिजॉल्यूशन इमेज नहीं ले सके हैं जिससे ये देख सकें कि इसकी सतह पर कोई

गड्ढा तो नहीं है, जिससे यह पता चल सके कि इसने पलटना कब शुरू किया था। अब

ओउमुआमुआ जैसी चीजों की और सघनता से खोज की जा रही है। इस खोज से अनुमान

लगाया गया है कि हमारे सौरमंडल में 10 हजार से अधिक ऐसी ही वस्तुएं नेपच्यून (वरुण

ग्रह) की कक्षा में होनी चाहिए। समस्या है कि आकार में बेहद छोटे और अंधकार होने की

वजह से इन्हें ढूंढ पाना बहुत मुश्किल है। हालांकि, अब एक नया टेलिस्कोप आ रहा है जो

इस शोध को आगे बढ़ाने में बड़ी भूमिका निभाएगा। यह लार्ज सिनॉप्टिक सर्वे टेलिस्कोप

है जो अगले कुछ वर्षों में आ जाएगा।

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