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अमेरिका के बड़े अस्पताल में अजीब किस्म की घटना की शिकायत मिली

  • स्वास्थकर्मी ने जानबूझकर नष्ट किये कोरोना वैक्सिन

  • विसकांसिन हेल्थ केयर से जुड़ी है यह घटना

  • स्थानीय पुलिस के अलावा एजेंसियां भी पहुंची

  • टीकाकरण की खामियां उजागर हो गयी इसमें

राष्ट्रीय खबर

रांचीः अमेरिका के बड़े अस्पताल के तौर पर ख्यातिप्राप्त विसकांसिन हेल्थ केयर से

अजीब किस्म की शिकायत मिली है। वहां के एक स्वास्थ्यकर्मी ने जानबूझकर कोरोना

वैक्सिन के पांच सौ डोज नष्ट कर दिये। इस घटना की शिकायत पुलिस तक पहुंचने के

बाद मामले की जांच प्रारंभ करते हुए उक्त स्वास्थ्यकर्मी को हिरासत में भी ले लिया गया

है। अमेरिका के बड़े अस्पताल विसकांसिन के मिलाबूके के पास स्थित अस्पताल में यह

घटना घटी है। अस्पताल प्रबंधन ने इस घटना को स्वीकार करते हुए कहा है कि पुलिस

मामले की जांच कर रही है। अस्पताल प्रबंधन का यह भी कहना है कि घटनाक्रम कुछ ऐसे

हैं, जिनसे यह संदेह होता है कि ऐसा जानबूझकर किया गया है। अस्पताल के पास इसके

बाद कम वैक्सिन बचे हैं। बचे हुए वैक्सिन का उपयोग आउरोरा मेडिकल सेंटर में किया

जाना है। वहां सुरक्षित अवस्था में ठंडे तापमान पर रेफ्रिजरेटर के अंदर रखे गये वैक्सिनों

को निकालने की बात उस कर्मचारी ने स्वीकारी है। लेकिन अब तक उसका नाम

सार्वजनिक नहीं किया गया है। वैसे अब तक यह भी स्पष्ट नही किया गया है कि आखिर

उस स्वास्थ्यकर्मी ने ऐसा क्यों किया। उनकी मानसिक स्थिति के बारे में भी अब तक

औपचारिक तौर पर कोई जानकारी नहीं मिल पायी है। घटना की सूचना मिलने के बाद

अमेरिकी फूड एंड ड्रग एडमिंस्ट्रेशन तथा फेडरल ब्यूरो ऑफ इनवेस्टिगेशन के अधिकारी

भी वहां पहुंचे हैं। वहां पहुंचने वाले एफबीआई के प्रवक्ता लिओनार्ड पीस ने कहा कि एजेंसी

को इस घटना की जानकारी मिली है लेकिन एजेंसी की जांच के बारे में उन्होंने कोई भी

टिप्पणी करने से इंकार कर दिया। दूसरी तरफ एफडीए की प्रवक्ता स्टीफेनी काकोमो ने

इस बारे में पूछे जाने पर सीधे अस्पताल से बात करने की बात कही।

अमेरिका के बड़े अस्पताल की घटना पर सरकार चौकन्नी

इस मामले को अधिक गंभीरता से इसलिए भी लिया जा रहा है क्योंकि यहां कोरोना

संक्रमण बढ़ा हुआ है। पिछले बुधवार को वहां कोरोना से चालीस लोगों की मौत हुई है। अब

वैक्सिन के पांच सौ डोज नष्ट किये जाने की वजह से कमसे कम पांच सौ लोगों को

वैक्सिन देने में अधिक समय लगेगा। इस घटना के प्रकाश में आने के बाद केंट स्टेट

विश्वविद्यालय के विशेषज्ञ टारा सी स्मिथ ने कहा कि यह एक घटना इस बात की तरफ

भी हमारा ध्यान आकृष्ट करती है कि भविष्य में वैक्सिन के रखरखाव और उस तक

स्वास्थ्यकर्मियों की पहुंच के संबंध में भी अतिरिक्त सावधानी बरती जाए। अमेरिका में

मॉर्डना और फाइजर बॉयोएनटेक वैक्सिन टीकाकरण का काम प्रारंभ होने के बाद सबसे

पहले स्वास्थ्यकर्मियों को भी इसके टीके लगाये जा रहे हैं। वैक्सिन नष्ट करने की इस

एक घटना से उस योजना पर संदेह उत्पन्न हो गया है, जिसके तहत प्रारंभिक दौर में 20

मिलियन लोगों को इस वैक्सिन का टीका लगाया जाना है। अमेरिका के बड़े अस्पताल से

ऐसी शिकायत मिलने के बाद अन्य अस्पतालों में भी अब वैक्सिन के रखरखाव पर

सतर्कता बरती जाने लगी है।

वैसे इस एक घटना ने भारत जैसे विकासशील देशों में भी कोरोना वैक्सिन के नाम पर

गड़बड़ी की आशंकाओँ को और मजबूत कर दिया है। वैसे भी झारखंड, बिहार और उत्तर

प्रदेश के इलाकों में नकली दवा का कारोबार पहले से ही एक सुसंगठित व्यापार है। ऐसे में

अस्पतालों तक पहुंचायी गयी वैक्सिन में घालमेल किया जाना और भी आसान हो

जाएगा। वैसे भी अमेरिका से इस बात की भी शिकायत मिली है कि नियम तोड़कर

अस्पतालों से जुड़े लोगों अपने रिश्तेदारों और परिचितों को भी वैक्सिन के टीके लगाये हैं।

भारत में नकली दवा के कारोबारी फायदा उठा सकते हैं

इससे भारत में भी पहले वैक्सिन पाने की होड़ में नये किस्म का भ्रष्टाचार के पनपने की

आशंका से भी इंकार नहीं किया जा सकता है। अमेरिका के बड़े अस्पताल में जब कोई

स्वास्थ्यकर्मी ही वहां फ्रीज से वैक्सिन निकालकर नष्ट कर सकता है तो भारत में भी

अस्पतालों में वैक्सिन रखने का यही इंतजाम होता है। ऐसे में असली वैक्सिन के बदले

नकली वैक्सिन रख देना भी संभव है, जिस आशंका को दूर करने के लिए अब तक कोई

उपाय नहीं किये गये हैं। भारत में भी कोरोना वैक्सिन के टीकाकरण का ड्राई रन चल रहा

है। अनुमान है कि अगले सप्ताह से कोरोना की पहली कतार में खड़े स्वास्थ्यकर्मियों को

पहली खेप में उसका टीका लगना प्रारंभ होगा। भारत की अपनी वैक्सिन उत्पादन क्षमता

काफी अधिक होने की वजह से वैक्सिन की कमी की कोई आशंका नहीं है। अब अमेरिका

के बड़े अस्पताल की घटना से सिर्फ वैक्सिन की कालाबाजारी और नकली वैक्सिन के

कारोबार पर अधिक ध्यान देना की जरूरत महसूस की जा रही है। इस वैक्सिन को सिर्फ

12 घंटे तक कमरे के सामान्य तापमान पर रखा जा सकता है। दूसरी तरफ उसे कम

तापमान पर छह महीने तक रखा जा सकता है। लिहाजा वैक्सिन तैयार होने के बाद

उसका जल्द से जल्द इस्तेमाल होना ही कई गड़बड़ियों का कारण बन सकता है। अमेरिका

के बड़े अस्पताल के स्वास्थकर्मी ने वैक्सिन के 57 वायल असुरक्षित अवस्था में बाहर छोड़

दिये थे, जिससे वे नष्ट हो गये

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