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यूनियन क्लब एंड लाईब्रेरी में सांस्कृतिक संध्या का आयोजन




रांचीः यूनियन क्लब एंड लाईब्रेरी में शरद ऋतु के स्वागत के मौके पर सांस्कृतिक कार्यक्रम का शानदार आयोजन किया गया।

बारिश की आस में भले किसानों की आंखें पथरा गयी हो लेकिन नए ऋतु के स्वागत और पुराने की विदाई की परंपरा का आज निर्वहन किया गया।

यूनियन क्लब में आज शाम शहर के कलाकारों ने वर्षा ऋतु की विदाई और शरद ऋतू के स्वागत के लिए संगीत और नृत्य का महफ़िल सजाया।

कार्यक्रम की शुरुआत-ऐसो श्यामलो सुंदरो गीत से हुई।

रविन्द्र नाथ टैगोर की इस गीत को कलाकारों ने काफी प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया।

गीत के माध्यम से धरती को हरा-भरा बनाने की प्रार्थना की गई।

इसके बाद -ऐ मेघला दिने एकला घोरे थाके ना तो मोन से दर्शकों को मन्त्र मुग्ध किया।

यह 1960 के बांग्ला फ़िल्म शेष परजन्तो का एक गीत है।

कलाकारों ने आज की शाम श्रोताओ को अपने मधुर गीतों से सराबोर कर दिया।

नज़रुल गीत -श्यामा तन्नी मेघो बोरोना के बाद- श्राराबन गगन नेरो गाए के कोरस में गीत संगीत और नृत्य का लोगों ने लुत्फ उठाया।

डॉ पोम्पा सेन बिश्वास ने श्राबोनो राते जोदि, परोमिता लाहिड़ी चौधुरी ने ‘देखेछो की ताके’ प्रस्तुत किया।

गीत-संगीत के माध्यम से वर्षा ऋतु के आगमन, मेघ से उठा उल्लास, भींगने का सुख और वर्षा के जाने की विरह की प्रस्तुति हुई।

लोकप्रिय गीत-छाता धरो हे देवरा।।। के गान और नाच पर पूरा हॉल झूम उठा।

जहाँ एक तरफ संगीत के कलाकारों ने समा बांधे रखा वहीं त्रित्यांग्नाओ ने अपनी मुद्राओं से

लोगों को प्रेक्षागृह नही छोड़ने दिया।

दो दर्जन से ज्यादा गीतों में वर्षा ऋतु के आनंद, उल्लास, को जीवंत किया गया

तथा शरद ऋतु का स्वागत किया गया।

यूनियन क्लब में अक्सर होते हैं ऐसे सांस्कृतिक आयोजन

बंगला फिल्म ‘ओजना शोपोथ’ फिल्म का सुप्रसिद्ध गीत ‘ओ आकाश सोना सोना’ और उसपर नृत्य के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।




गीत-संगीत के इस कार्यक्रम का अवधारणा शिप्रा भट्टाचार्य, रत्ना भट्टाचार्य एवं प्रणति लाहिड़ी का था

जिसको शब्दों के माध्यम से सुसज्जित किया शुभ्रा चटर्जी, सुपर्णा चटर्जी, अंजू ठाकुर एवं निरुपमा सेन ने।

नृत्य से मंत्रमुग्ध किया आइवी, तियाषा, अंकिता, तृषा-तान्या, तन्नी-त्रिशिता, तन्मोयी, तृषा, अभिशी,

निहारिका एवं तुइषा ने।

गीत और वाद्य यंत्रो में थे प्रणति लाहिड़ी, परोमिता, रुमा चटर्जी, सुचेता, सुष्मिता, छंदोश्री,

चैताली, पूर्वा, मौसमी, सुदेष्णा, अरुंधती, देबजानी, अनुराधा, मुक्ति, बेदोत्र्यी, पोम्पा, प्रभा,

सौरव देव, उत्तम घोष, समित दास तथा तोपू दास।

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