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सार्वजनिक संपत्ति को निजी हाथों में बेचने का दस्तावेज है केंद्रीय बजटः भाकपा




रांचीः सार्वजनिक संपत्ति को निजी हाथों में बेचने की सरकार की इच्छा इस बजट से साफ




जाहिर हो रही है। केंद्रीय बजट, 2021-22 पर भाकपा, झारखंड ने अपनी प्रतिक्रिया देते हुए

कहा है कि आम बजट आम-अवाम नहीं का नहीं है, बल्कि खास तबका को ख्याल में

रखकर तैयार किया गया है। इस संबंध् में भाकपा के राष्ट्रीय परिषद सदस्य के.डी. सिंह,

कार्यालय सचिव सह राज्य कार्यकारिणी सदस्य अजय कुमार सिंह और राज्य परिषद

सदस्य उमेश नजीर ने संयुक्त रूप से कहा है कि केरल, तमिलनाडु और प. बंगाल का

विशेष रूप से नाम लिया गया है और सैकड़ों किलोमीटर राजमार्ग बनाने की बात कह कर

वहां की जनता को लुभाने का प्रयास किया है, जहां हाल में चुनाव होने वाले हैं। राजमार्ग

को बनाने की जिम्मेदारी चहेते निजी घराने को सौंपने का प्रस्ताव देकर, सरकार ने

कारपोरेट हितैषी होने का प्रमाण दिया है। इस बजट में झारखंड की उपेक्षा गयी है, जबकि

यह राज्य सबसे अधिक टैक्स और खनिज-संपदा देता है। इस राज्य के रॉयल्टी और

जीएसटी पैसा भी सरकार समय पर रिलीज नहीं कर रही है। इससे राज्य का विकास

प्रभावित हो रहा है। भाकपा नेताओं ने कहा है कि मजदूर-किसान, छात्र-नौजवानों,

महिलाओं की समस्या पर इस बजट में कुछ भी नया नहीं है। जबकि प्रधानमंत्री इन तबके

की ‘मन की बात’ में बराबर बात करते रहे हैं। श्रमिकों की सुविधा के लिए कोई प्रावधान

नहीं रखा गया है। श्रमिकों के लिए सिर्फ न्यूनतम वेतन निधारण की बात कही गयी है,

लेकिन उसमें भी कोई स्पष्टता नहीं है। महिला-सुरक्षा, जो वर्तमान समय की एक

चुनौतीपूर्ण समस्या है, उसके लिए बजट में कुछ भी स्पष्ट नहीं है।

सार्वजनिक संपत्ति बेचने के खुला एलान के अलावा आम आदमी को कुछ नहीं

वहीं जिस तरह से महंगाई अपने चरम पर है और मध्यमवर्ग तथा गरीब जनता इस




समस्या से त्रस्त है, उस पर अंकुश लगाने का इस बजट में कोई प्रावधान नहीं है। रोजगार

सृजन और बुनियादी ढांचे के विकास के लिए उक्त बजट में कोई चर्चा नहीं है। लघु व

मध्यम उद्योग, जिसकी बात हमेशा करते रहे हैं, उसके लिए महज 15, 700 करोड़ रुपये

का प्रावधन है। जबकि इसके लिए और व्यापक पफंड की जरूरत है। भाकपा का आरोप है

कि यह बजट देश के सार्वजनिक उपक्रमों को बेचने की अभिव्यक्ति दे रही है। एलआईसी

और जीआईसी, जो भारत में सार्वजनिक उपक्रम का एक महत्वपूर्ण और अध्कि मुनाफा

कमाने वाली इकाई है तथा ये इकाइयां कभी घाटे में नहीं गयी व जरूरत पड़ने पर सरकार

को मदद की है, उस क्षेत्रा में भी 74 प्रतिशत हिस्सा निजी कंपनियों देकर उसके स्वामित्व

निजी हाथों में सौंपने का काम किया है। साथ ही दो बैंकों के निजीकरण की घोषणा की है।

टैक्स की स्थिति यथावत है। भाकपा का कहना है कि पूरे देश में निजी सहयोग से 100

सैनिक स्कूलों को खोलने की घोषणा की गयी है, यह शिक्षा के व्यवसायीकरण की ओर

सरकार का कदम है। हमें आशंका है कि ये खुलेंगे या नहीं, इस पर कुछ नहीं कहा जा

सकता। लेकिन पुराने सैनिक स्कूलों को निजी घराने के हाथों में सौंपने की एक साजिश है।

कंप्यूटर की दुनिया में रहने वाले छात्रों की चर्चा की गयी है, भाकपा का कहना है ‘क’ की

दुनिया तथा कबाड़ी दुनिया में रहने वाले बच्चों की शिक्षा की बात नहीं है। उच्च शिक्षा के

लिए आयोग की गठन की बात करते हुए सरकार ने इस क्षेत्रा से अपना पल्ला झाड़ने का

प्रयास किया है। वहीं स्वास्थ्य क्षेत्र में 135 प्रतिशत की बजट में बढ़ोत्तरी की गयी है।

 



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