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पदों के असमान बंटवारे से अफसरशाही में फैला है असंतोष

  • प्रोमोटेड कैडर के आइएएस में भी अन्य लोग उपेक्षित

संवाददाता

रांचीः पदों के असमान बंटवारे को लेकर झारखंड में प्रशासनिक अधिकारियों के बीच एक

अजीब सी आग सुलग रही है। आम तौर पर इसकी भनक बाहर नहीं आती। लेकिन

अंदरखाने में इस असंतोष का अच्छा खासा खामियजा पिछली सरकार को भुगतना पड़

रहा है। झारखंड में विधानसभा चुनाव समाप्त होने के बाद अंदरखाने से छनकर जो

सूचनाएं आ रही हैं, वे इस बात की पुष्टि करती हैं।

मिली जानकारी के मुताबिक राज्य में 33 प्रतिशत आइएएस पदों की भर्ती प्रोन्नति पाने

वालों से की जाती है। इस 33 प्रतिशत में प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों के अलावा अन्य

संवर्ग के अफसर भी होते हैं। आम तौर पर यह स्थापित परिपाटी है कि जिला में

जिलाधिकारी के पद पर पदस्थापना में भी इस अनुपात का ध्यान रखा जाता है। वैसे सूत्र

बताते हैं कि अन्य राज्यों में अलिखित नियम के तौर पर इसका पालन बेहतर तरीके से

किया जाता है। झारखंड में पिछली सरकार के कार्यकाल में अचानक इस नियम को पूरी

तरह ध्वस्त कर दिया गया था। जिसका नतीजा था कि राज्य के 24 में से 23 जिलों में

सीधे आइएएस बने पदाधिकारियों को ही जिलाधिकारी का पदभार सौंप दिया गया था।

इससे राज्य प्रशासनिक सेवा संवर्ग के अधिकारियों में काफी नाराजगी उपजी थी। जिसका

बदला ऐसे अधिकारियों में चुनाव के दौरान भी लिया है, ऐसा चर्चा है।

पदों के बंटवारे में उपेक्षित हैं कई कैडर के लोग

इस मामले की छानबीन के क्रम में जानकार यह भी बताते हैं कि प्रोन्नति पाकर आइएएस

बने अधिकारियों में भी इस बात का ध्यान रखा जाता है कि प्रशासनिक सेवा से आइएएस

बने लोगों को ही जिलाधिकारी नहीं बनाया जाए। इसमें अन्य सेवाओं से आने वालों को भी

उनकी योग्यता के आधार पर जिला की जिम्मेदारी सौंपी जाती है। झारखंड में इसका भी

सही तरीके से पालन नहीं हो पाया है। वैसे इन दिनों मुख्यालय में व्यापक पैमाने पर

तबादले की चर्चा जोर पकड़ चुकी है। राज्य प्रशासनिक सेवा के अफसर इसपर नजर बनाये

हुए हैं । कुछ लोगों के मुताबिक इस सरकार में शीघ्र ही तबादले होने वाले हैं।

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