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उल्फा के डिप्टी कमांडर-इन-चीफ द्रष्टि राजखोवा का आत्मसमर्पण

  • भारतीय सेना को मिली बड़ी सफलता

  • यह आंतकवादी इलाके के लिए सरदर्द था

  • मेघालय में हथियार डालने के बाद यहां लाया जा रहा है

भूपेन गोस्वामी

गुवाहाटी: उल्फा के डिप्टी कमांडर का आत्मसमर्पण पूर्वोत्तर में उग्रवाद के खिलाफ जंग

में भारतीय सेना की बड़ी सफलता है। उल्फा (आई) के उप कमांडर इन चीफ द्रष्टि

राजखोवा जो असम पुलिस और भारतीय सेना की नींद हराम कर चुके थे। उसे भारतीय

सेना ने पकड़ लिया है, और उसने आत्मसमर्पण कर दिया है। भारतीय सेना सूत्रों के

अनुसार उसके साथ 4 और उल्फा के साथियों ने भी आत्मसमर्पण किया है।सूत्रों के

अनुसार उल्फा (आई) के उप कमांडर इन चीफ दृष्टि राजखोवा ने बुधवार को मेघालय में

आत्मसमर्पण कर दिया। असम सरकार के सूत्रों के अनुसार राजखोवा को सेना ने हिरासत

में लिया है और उसके चार और साथियों ने भी आत्मसमर्पण किया है। राजखोवा को

असम लाया जा रहा है। बता दें कि राजखोवा उल्फा (इंडिपेंडेंट) में शीर्ष क्रम में दूसरे नंबर

पर हैं।मेघालय राज्य से लगती हुई असम और बांगलादेश की सीमा पर भारतीय सेना की

इंटेलिजेंस एजेंसी के सुनियोजित ऑपरेशन के तहत उग्रवादी संगठन उल्फा (यूनाइटेड

लिबरेशन फ्रंट ऑफ असम)-इंडिपेंडेंट के नेता दृष्टि राजखोवा ने अपने कुछ साथियों के

साथ आत्मसमर्पण कर दिया है। खुफिया इनपुट और पिछले नौ महीने के सुरक्षाबलों के

अथक प्रयास का फल मिल गया। असम में उग्रवादी गतिविधियों के लिए जिम्मेदार

उल्फा के टॉप लीडर्स में शुमार राजखोवा वॉन्टेड लिस्ट में था। असम सहित पूर्वोत्तर के

इलाके में शांति स्थापित करने के प्रयासों में राजखोवा का सरेंडर एक बड़ी सफलता है।

उल्फा के इस आतंकवादी से सेना पूछ ताछ कर रही है

उग्रवादी संगठन का सेकेंड-इन कमांड राजखोवा अभी फिलहाल आर्मी इंटेलिजेंस की

कस्टडी में है। उसे उल्फा (आई) के कमांडर इन चीफ परेश बरुआ का करीबी माना जाता

है। राजखोवा और उसके साथियों के पास से भारी मात्रा में हथियार भी बरामद हुए हैं। सूत्रों

के अनुसार राजखोवा कुछ दिनों पहले तक बांगलादेश में ही था। वह कुछ सप्ताह पहले ही

मेघालय की तरफ आया है। 1990 में ही प्रतिबंधित कर दिए गए उल्फा के तीन खूंखार

उग्रवादियों को अगस्त महीने में अरुणाचल प्रदेश के तिराप जिले से गिरफ्तार किया गया

था।जानकारी के अनुसार राजखोवा पिछले तीन महीने से भारत-बांग्लादेश सीमा पर दोनों

पक्षों के सुरक्षा बलों को एक पर्ची देकर पिछले तीन महीने से दोनों तरफ आता जाता रहा

है। राजखोवा को पिछले महीने जाफलॉन्ग के पास देखा गया था, जब ढाका में पाकिस्तानी

उच्चायुक्त इमरान सिद्दीकी उसी इलाके में एक रिजॉर्ट में छुट्टी मना रहे थे। हालांकि, दोनों

की मुलाकात की पु्ष्टि नहीं हो पाई है। लेकिन, भारतीय खुफिया एजेंसियों को जानकारी

मिली थी कि ढाका में पाकिस्तान के रक्षा अताशे ब्रिगेडियर एजाज हाल के महीनों में

उत्तर-पूर्व के विद्रोही नेताओं से मुलाकात करते रहे हैं। एजाज एक स्थानीय अकादमिक के

संपर्क में है जिसे पूर्वोत्तर में विद्रोहियों को समर्थन देने के लिए जाना जाता है।


 

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