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उद्धव ठाकरे के नेतृत्व में बनेगी तीन पहिया महाराष्ट्र सरकार

  • इंद्र का सिंहासन दे तब भी भाजपा का भरोसा नहीः संजय राउत
  • राउत के नये बयान से भाजपा खेमा फिर से हताश हुआ
  • काफी सोच विचार के बाद कांग्रेस ने तय किया समर्थन
वी शिवकुमार

मुंबईः उद्धव ठाकरे महाराष्ट्र के अगले मुख्यमंत्री होंगे। पहले ही एनसीपी

ने यही मांग रखी थी। लेकिन तब उस मांग को शिवसेना ने ठुकरा दिया था।

शिवसेना अपनी तरफ से मुख्यमंत्री के लिए तीन अन्य नामों को आगे

बढाना चाहती थी। आज तीनों दलों के नेताओं की बैठक के बाद अंततः उद्धव

ठाकरे के नाम पर ही सहमति बनी। बैठक से बाहर आने के बाद मराठा नेता

शरद पवार ने इस बात की घोषणा कर दी। इस घोषणा से काफी दिनों से चले

आ रहे राजनीतिक नाटक का पटाक्षेप होने की संभावना बन गयी है। इन

तीन दलों की बैठक और उसके बाद उद्धव ठाकरे के नाम की घोषणा होते

ही महाराष्ट्र के राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ने भी अपने दिल्ली जाने

का कार्यक्रम स्थगित कर दिया है।

इस बीच संजय राउत का बयान भाजपा के लिए वज्रपात जैसा रहा। उन्होंने

आज सुबह फिर कहा था कि इंद्र का सिंहासन भी अगर भाजपा देन को तैयार

हो तो अब शिवसेना उसे स्वीकार नहीं करेगी। पचास-पचास के फार्मूले पर

बात हुई थी। उस बात से मुकर जाने के बाद अब भाजपा पर कैसे भरोसा किया

जा सकता है। श्री राउत ने नये सिरे से यह बयान देकर अंदरखाने में चल रहे

भाजपा की कोशिश को जोरदार झटका लगा जो अंदरखाने में चल रही थी।

दूसरी तरफ यह लगभग साफ हो चला है कि अब महाराष्ट्र में तीन पहिया

सरकार बनने जा रही है। यानी शिवसेना की अगुवाई में बनने वाली सरकार

को एनसीपी और कांग्रेस का समर्थन प्राप्त होने जा रहा है।

तीनों दलों के लिए न्यूनतम सांझा कार्यक्रम तय करने के लिए लगातार

मंथन कर रहे हैं। आज शाम इस मुद्दे पर तीनों दलों के नेताओं की बैठक

भी हुई।

उद्धव ठाकरे का नाम आने के बाद एनसीपी भी पीछे हटी

शिवसेना के सामने संभवतः एनसीपी नेता शरद पवार ने कुछ अवधि के लिए

एनसीपी का मुख्यमंत्री बनाने का प्रस्ताव रखा था। लेकिन इस पर बात नहीं

बनी है। दूसरी तरफ शिवसेना की तरफ से इसका नेतृत्व उद्धव ठाकरे करें, इस

बात पर भी शिवसेना सहमत नहीं थी। लेकिन बाद में यह सारी बातें तय हो

गयी हैं। कांग्रेस के खेमे में निर्णय लेने में हुए विलंब की वजह बाबरी मसजिद

विध्वंस और सावरकर पर शिवसेना के साथ उसका वैचारिक मतभेद था।

अब लगता है कि भाजपा को परास्त करने की प्राथमिकता ने कांग्रेस को

इससे हटने को मजबूर कर दिया है। कांग्रेस के नेता इन मुद्दों पर अलग अलग

राय रखने पर सहमत है। कई लोगों का सार्वजनिक बयान आया है कि इससे

कांग्रेस को नुकसान होगा। लेकिन दिल्ली दरबार अब जाकर इसे मानने पर

सहमति व्यक्त कर चुका है। कांग्रेस के रणनीतिकारों का तर्क है कि यह ऐसे

मुद्दे हैं, जिनका महाराष्ट्र में सरकार संचालन से कोई लेना देना नहीं है। दूसरी

तरफ अपनी जिद पर अड़े रहकर राज्य को दोबारा चुनाव में झोंकने के फैसला

खुद कांग्रेस के लिए भी नुकसानदायक साबित हो सकता है। इसी वजह से

न्यूनतम सांझा कार्यक्रम तय कर पांच साल तक बेहतर तरीके से सरकार

चलाना ज्यादा फायदे की बात है।

तीनों को भाजपा के खिलाफ लाने में शरद पवार की मुख्य भूमिका

सूत्रों की मानें तो खुद एनसीपी नेता शरद पवार ने कांग्रेस नेतृत्व को यह

समझाया है कि महाराष्ट्र में भाजपा को पछाड़ने से पूरे देश में जो राजनीतिक

संकेत जायेगा, उसके बेहतर परिणाम सामने आयेंगे। इसी वजह से कांग्रेस ने

मराठा क्षत्रप की बातों को गंभीरता से लिया है। लिहाजा यह माना जा सकता

है कि महाराष्ट्र की सरकार में शीघ्र ही तीन पहिया गाड़ी चलने लगेगी। इसमें

सबसे अगले चक्के पर शिवसेना होगी और पीछे के दोनों चक्कों पर एनसीपी

और कांग्रेस का समर्थन होगा। शिवसेना के जानकार मानते हैं कि इस गाड़ी

के आगे बढ़ने पर निर्दलीय और अन्य भी धीरे धीरे इस सरकार की गाड़ी की

सवारी करने आ जाएंगे। साथ ही शिवसेना की तरफ से सरकार से बाहर

चलने वाली भाजपा को भी तोड़ने का पर्याप्त अवसर होगा।

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