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उद्धव ठाकरे की ताजपोशी की औपचारिकता शिवाजी पार्क में

  • सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद फडणवीस ने डाले हथियार
  • अजीत पवार को शरद पवार ने माफ किया तो सामने आये
  • किस पार्टी से कितने मंत्री इस पर चल रही माथा पच्ची
वी शिवकुमार

मुंबईः उद्धव ठाकरे की ताजपोशी अब एक रस्म अदायगी होगी। पहले

अजीत पवार और उसके बाद देवेंद्र फडणवीस के हथियार डाल देने के

बाद उनकी राह में कोई कांटा नहीं बचा है। वैसे इस मामले में तेजी तो

सुप्रीम कोर्ट के फैसले से ही आयी थी। अदालत ने कल ही साफ कर

दिया था कि 27 नवंबर की शाम तक महाराष्ट्र विधानसभा में बहुमत

का परीक्षण कराया जाए।

साथ ही शीर्ष अदालत ने इस पूरे कार्यक्रम का लाइव टेलीकास्ट एवं

वीडियो रिकार्डिंग करने का भी आदेश जारी किया है। इसके बाद

बहुमत को लेकर टालमटोल करने की कोई स्थिति बची नहीं थी।

जस्टिस रमना ने कहा कि कोर्ट और विधायिका के अधिकार पर लंबे

समय से बहस चली आ रही है। लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा होनी

चाहिए. लोगों को अच्छे शासन का अधिकार है। राज्यपाल के फैसले

की न्यायिक समीक्षा हो सकती है या नहीं? इस पर कोर्ट ने सभी

पक्षकारों को लिखित दलीलें 8 हफ्ते में देने को कहा है। वहीं सुप्रीम

कोर्ट ने कहा कि लोकतांत्रिक मूल्यों, नागरिकों के सुशासन के

अधिकार को बनाए रखने के लिए महाराष्ट्र में बहुमत निर्धारित करने

के लिए फ्लोर टेस्ट के लिए अंतरिम आदेश पारित करना आवश्यक है।

इधर शिवाजी पार्क में होने वाले उद्धव ठाकरे के शपथग्रहण समारोह की

अनुमति देते हुए मुंबई हाई कोर्ट ने साफ कर दिया है कि इसे रोज का

कारोबार न बना लिया जाए।

उद्धव ठाकरे का फैसला हुआ तो अजीत सामने आये

एनपीसी नेता अजीत पवार के बारे में कहा जा रहा है कि वह कल रात

ही शरद पवार से मिले थे। चर्चा इस बात की भी है कि पवार परिवार के

अनेक सदस्यों ने उनसे परिवार के भीतर ऐसी स्थिति पैदा नहीं करने

की बात कही थी। परिवार के इस दबाव के साथ साथ बहुमत उनके

साथ नहीं होने की स्थिति के बाद उन्होंने शरद पवार के सामने माफी

मांगी है। चर्चा है कि शरद पवार ने उन्हें माफ भी कर दिया है। इसके

बाद ही वह मीडिया के सामने आयी। उन्होंने सफाई दी कि उनके

निर्णय को पार्टी अध्यक्ष के खिलाफ बगावत नहीं माना जाना चाहिए।

अंदरखाने में जारी माथापच्ची के बारे में खबर है कि शिवसेना की

तरफ से 15 तथा एनसीपी और कांग्रेस की तरफ से 13-13 मंत्री बनाये

जा सकते हैं। उप मुख्यमंत्री का पद एनसीपी के पास तथा विधानसभा

अध्यक्ष का पद कांग्रेस के पास होगा।

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