युवा वैज्ञानिकों ने बना डाला एक डॉलर का माइक्रोस्कोप

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  • गरीबों की सुविधाओं को ध्यान में रखा

  • टूटने फुटने का खतरा नहीं

  • गरीबों के ईलाज में वरदान

  • बदल देगी इस उद्योग को

प्रतिनिधि

नईदिल्लीः युवा वैज्ञानिकों की जोड़ी ने ऐसा कमाल कर दिखाया है, जिससे पूरी उद्योग की स्थिति ही बदलने वाली है।

इन दोनों ने मिलकर एक ऐसा माइक्रोस्कोप तैयार किया है, जिसकी लागत मात्र एक डॉलर है।

आम तौर पर अच्छे किस्म के माइक्रोस्कोप बाजार में दो हजार डॉलर तक आते हैं।

यूट्यूब के वीडियो में देखिये एक डॉलर का माइक्रोस्कोप

https://www.youtube.com/watch?v=HHwEPQj9bn8

इतनी अधिक कीमत होने की वजह से अनेक गरीब देशों के दूर दराज के इलाकों में

माइक्रोस्कोप खरीदना संभव नहीं होता।

अब इस सस्ते लेकिन कारगर माइक्रोस्कोप के आने से इन इलाकों में भी

जांच की विधि सरल और आसान हो जाएगी।

वैज्ञानिकों ने जब इस पर काम प्रारंभ किया था तो उनकी सोच में गरीब देश के गरीब लोग ही थे।

लिहाजा उनलोगों ने कागज से यह माइक्रोस्कोप ऐसा बनाया, जिसे आसानी से  तोड़ा या फोड़ा नहीं जा सकता।

काफी ऊंचाई से गिरने के बाद भी कागज का बना होने की वजह से

यह तैयार हुआ नीचे आता है और पहले की तरह काम करता रहता है।

स्टैंडफोर्ड विश्वविद्यालय के रिसर्च स्कॉलर मनु प्रकाश और जिम साइबुस्की ने यह कमाल कर दिखाया है।

हर किस्म के प्रारंभिक परीक्षण में सफल होने के बाद इन माइक्रोस्कोप की एक खेप

तमिलनाडू के ग्रामीण इलाकों तक भेजी गयी थी।

मनु के मुताबिक वहां से बच्चों को इस माइक्रोस्कोप का इस्तेमाल करने की तस्वीरें रोज आती हैं।

इन्हें देखकर ही लगता है कि जिस मकसद से यह काम प्रारंभ किया गया था, वह पूरा होने जा रहा है।

युवा वैज्ञानिकों ने इसका नाम फोल्डोस्कोप रखा है

दोनों ने इस विधि से तैयार सस्ते माइक्रोस्कोप का नाम फोल्डोस्कोप रखा है।

यानी इसे मोड़कर कहीं भी ले जाया जा सकता है।

वैसे इससे वैज्ञानिक दुनिया में जबर्दस्त तब्दीली भी आने की उम्मीद की जा रही है।

अनेक किस्म के वैज्ञानिक परीक्षणों के दौरान दूर दराज के इलाकों में

महंगे माइक्रोस्कोप ले जाना या तो संभव नहीं होता

अथवा उन्हें काम करने लायक बनाने का खर्च अधिक हो जाता है।

अब इस पेपर निर्मित माइक्रोस्कोप को कहीं भी ले जाया जा सकता है

और वैज्ञानिक परीक्षण के नतीजे तत्काल हासिल किये जा सकते हैं।

इसे बनाने वाली जोड़ी ने दरअसल ग्रामीण इलाकों में पानी के प्रदूषण को

ध्यान में रखते हुए इसे तैयार करना प्रारंभ किया था।

परीक्षण में यह माइक्रोस्कोप यह काम करने में पूरी तरह सफल रहा है।

अब तो इसकी मदद से स्कूली बच्चे भी कीट पतंगों और पानी के अलावा

मिट्टी पर चल रहे जीवाणुओं की गतिविधियों को देखते हुए बेहतर शिक्षा प्राप्त कर पा रहे हैं।

साथ ही ग्रामीण इलाकों पर ज्यादा असर डालने वाली बीमारियों की पहचान में भी

यह माइक्रोस्कोप खून की जांच में वरदान साबित होने लगा है।

मनु प्रकाश मानते हैं कि वह इसे स्कूल के बच्चों के लिए एक पेंसिल जैसा बनाना चाहते हैं।

उनकी इच्छा है कि यह माइक्रोस्कोप हर स्कूली बच्चे की जेब में हो

और उसकी पढ़ाई में निरंतर मदद करता रहे।

इसके होने से बच्चो जो बातें पुस्तकों में पढ़ रहे हैं,

उन्हें सही तरीके से देख और समझ सकेंगे,

इससे शिक्षा के नये दरवाजे खुल जाएंगे।

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