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दो पहिया वाहनों का ईपास झारखंड सरकार का अव्यवहारिक फैसलाः महेंद्र पाठक

हज़ारीबाग: दो पहिया वाहनों के लिए भी ई पास पर भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के राष्ट्रीय

परिषद के सदस्य ,सह झारखंड राज्य के सहायक सचिव महेंद्र पाठक ने प्रेस बयान जारी

कर कहा कि मोटरसाइकिल के लिए पास बनाना सरकार के अव्यवहारिक फैसला है।

कोरोना महामारी की लड़ाई में सख्ती जरूरी है। उसके लिए बसों को रोका गया , चार

पहिया गाड़ी के लिए अंतर जिला के लिए पास जरूरी है । लेकिन जिले के अंदर जरूरी

कार्यों के लिए दो पहिया चार पहिया प्राइवेट गाड़ियों में ईपास बनाना को व्यावहारिक नहीं

है। सरकार की फैसला गलत है , क्योंकि एक महीना से स्वास्थ्य सुरक्षा सप्ताह यानी

लॉकडाउन के माध्यम से महामारी को रोकने का प्रयास सरकार कर रही है । जिसका सभी

लोगों ने स्वागत किया, लेकिन सभी लोगों को पास बनाने के लिए संभव नहीं है। सभी

लोगों के पास एंड्राइड मोबाइल, कंप्यूटर या मोदी जी का डिजिटल इंडिया नहीं है और है

भी तो उन्हें पास बनाने के लिए अक्ल नहीं है। ऐसी परिस्थिति में जब पूरे राज्य के अंदर

खाद्य सामग्री, आवश्यक वस्तुओं के छोड़कर सारे दुकानों में ताले लगे हुए हो तो, इस

तरह का पास कि जरुरी नही है। इसलिए सरकार को वापस लेना चाहिए । अपने घर के

अगल-बगल सब्जी की दुकान या राशन की दुकान ,दवाई लेने के लिए बाहर निकलना ही

पड़ेगा और उसके लिए पास नहीं होना महंगा पड़ेगा। पुलिसिया डंडा चलेगी ।

दो पहिया वाहनों की जांच से परेशानियां बढ़ेंगी

प्रशासन एवं पुलिस की लोगो को परेशान करेगी और अवैध वसूली भी होगी । वैसी

परिस्थिति में सरकार को विचार करना चाहिए की कि दोपहिया हो या चार पहिया वाहन

गैर जरूरी कार्यों के लिए बाहर ना निकले इसकी जांच हो। लेकिन जरूरी सेवाओं के लिए दो

पहिया चार पहिया वाहनों को जिला के अंदर चलने की अनुमति बगैर पास की देनी चाहिए

। एक तरफ कोराना महामारी का डर, दूसरी तरफ बेरोजगारी भुखमरी से निबटने के लिए

सरकार की कोई तैयारी नहीं ,एक महीना के लॉकडाउन में रोज कमाने खाने वाले एवं

मध्यम वर्गीय परिवार ऐसे ही आर्थिक रूप से परेशान है। केंद्र सरकार या राज्य सरकार कि

किसी भी तरह के सहयोग नहीं है या आर्थिक सहायता लोगों को नहीं मिल रहा है । लोग

परेशान एवं भुखमरी के कगार पर है ,इसलिए सरकार को चाहिए जरूरी सेवाओं के लिए दो

पहिया व चार पहिया वाहन को बगैर पास के जिले के अंदर चलने की अनुमति दें बड़े

पैमाने पर राहत कार्य चलाए, जिसे आम जनता की गुस्सा का इजहार सरकार को नहीं

करना पड़ेगा । लॉकडाउन में जब सारे धंधे बंद हैं तो बैंक के कर्ज चुकाना भी लोगों के लिए

मुश्किल हो रहा है । इसलिए कर्ज की वसूली पर भी रोक लगनी चाहिए, जिस के धंधे बंद

है, उनके खाते एन पी ए न हो यह भी सरकार को देखना जरूरी है । नही तो आने वाले दिन

में छोटे छोटे व्यवसाय करने वालों के खाते एनपीए में चला जाएगा , वह बेमौत मारे

जाएंगे।

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