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देश में चीन समर्थक गद्दार आखिर कौन लोग हैं

देश में चीन समर्थक कुछ तत्व निश्चित तौर पर हमारे आपके बीच छिपे हैं। 

एक साथ दो धाराएं बहती नजर आ रही हैं। पहला तो आम नागरिकों का है, जो

गलवान घाटी के बाद से ही चीन के रवैये और हरकतों से नाराज हैं। इनलोगों ने केंद्र

सरकार की तरफ से चीनी उत्पादनों पर प्रतिबंध लगाने के कड़े फैसले का समर्थन किया

है। वे चाहते हैं कि वाकई देश के कारोबार की चीन पर निर्भरता कम हो। देश में चीन के जो

माल बाजार में छाये हुए हैं, उनके विकल्प के तौर पर भारत अपने उद्योग और खास तौर

पर कुटीर उद्योगों को बढ़ावा दे। लेकिन देश में चीन समर्थक गद्दार भी हैं, जो इस कोरोना

काल में भी मौका का फायदा उठाने से नहीं चूकते। यह स्थिति तब है जबकि प्योगोंग

झील से लेकर अरुणाचल प्रदेश तक भारत चीन सीमा पर तनाव की स्थिति है। ताजी

सूचना के मुताबिक चीनी सेना द्वारा कथित तौर पर पांच लोगों का अपहरण किया गया

है। उनकी पहचान तोच सिंगकम, प्रसात रिगलिंग, दोंगतू इबिया, तनू बाकर और नागरु

दिरी के तौर पर की गई है और पांचों तागिन समुदाय के हैं। उल्लेख करें कि कुछ महीने

पहले, इसी तरह की घटना हुई थी। बता दें कि इस साल मार्च में 21 वर्षीय युवक तोगली

सिनकम को पीएलए ने मैकमहोन रेखा के नजदीक असापिला सेक्टर में पकड़ लिया था।

अरुणाचल प्रदेश में युवकों का अपहरण चीन के मंसूबों के संकेत है

जबकि उसके दो दोस्त बचकर भागने में कामयाब हुए थे । पीएलएल ने करीब 19 दिन

तक बंधक बनाए रखने के बाद युवक को रिहा किया । अरुणाचल प्रदेश के कांग्रेस

विधायक निनॉन्ग एरिंग ने दावा किया है कि अरुणाचल प्रदेश की सीमा से चीनी सेना

द्वारा पांच से अधिक लोगों का अपहरण किया गया है। दूसरी सूचना भी इससे जुड़ी हुई है

कि भारतीय सेना ने 17,500 की ऊंचाई पर मुश्किकल में फंसे तीन चीनियों को बचाया है।

भारतीय सेना ने चीनी नागरिकों को दवा, ऑक्सीचजन, भोजन, गर्म कपड़े दिए और पूरा

मार्गदर्शन दिया, जिसके बाद वे अपने गंतव्य पर लौट आए। यह वाकया उत्तरी सिक्किम

के पठार क्षेत्र में बीते 3 सितंबर का है। इन दो सूचनाओं के बीच तीसरी सूचना रांची की है,

जहां सरकारी अस्पताल में मेड इन चाइना नजर आ रहा है। जाहिर सी बात है कि चीन ने

हवाई जहाज से राहत सामग्री के तौर पर रांची के ऊपर यह सामान गिराया तो नहीं होगा।

यह देश के अंदर चीन समर्थको की चालबाजी है। ऐसा भी हो सकता है कि सरकारी स्तर

पर प्रतिबंध लगाने के एलान के बाद भी चोर दरवाजे से सब कुछ पूर्ववत ही चल रहा हो।

जब मेड इन चाइना के पीपीई किट के रांची के सदर अस्पताल में होने की जानकारी मिली

तो इसकी जांच आवश्यक थी। यह सोचना ही कठिन था कि इतना कुछ घटित होने के बाद

भी चीन का माल कुछ इस तरीके से सरकारी अस्पतालों में पहुंच रहा होगा। सूचना पर

भरोसा नहीं करने की वजहें और भी थी। चीन से पीपीई किट का आयात सबसे पहले असम

ने किया था। लेकिन जांच में सही नहीं पाये जाने की वजह से उन्हें नकार दिया गया था।

देश में चीन समर्थक नहीं हैं तो चीनी माल कैसे है

इसी तरह इंडियन काउंसिल फॉर मेडिकल रिसर्च ने भी चीन में निर्मित पीपीई किटों के

इस्तेमाल पर रोक लगा दी थी। इतना कुछ होने के बाद भी सदर अस्पताल यानी सरकारी

परिसर तक चीन में निर्मित सामान कैसे पहुंचे, यह सवाल ही देश में चीन समर्थक गद्दारों

के छिपे होने की पुष्टि कर देता है। कुछ अरसा पहले तक कुछ लोगों ने इस बात का

अभ्यास कर लिया था कि किसी एक विचार से असहमत होने वालों को तुरंत ही

पाकिस्तान चले जाने की बात कही जाती है। इस किस्म की हरकतों के पीछे अधिकांश

अदृश्य चेहरे होते थे, जिनकी बातों को दूसरे लोग आनन फानन में प्रसारित किया करते

थे। अब देश में चीन समर्थक गद्दार होने की पुष्टि होने के बाद ऐसे लोगों के लिए क्या कुछ

कहा जाएगा, यह देखना रोचक बात होगी। बहुत अधिक संभावना इसी बात का है कि इस

मुद्दे पर बालू डालने का काम किया जाए। क्योंकि जो नाम इसमें जुड़े हो सकते हैं, उनका

खुलासा होने पर खुद सरकारों को ही इससे परेशानी हो सकती है। जैसे जैसे दिन बीत रहे हैं

कई चीजें स्वच्छ पानी की तरह साफ होती चली जा रही है। पहले जो बातें समझ में नहीं

आती थी, इस कोरोना संकट ने उन्हें समझने का ज्ञान भी प्रदान किया है। लिहाजा जिन

मुद्दों पर सरकार स्पष्टवादिता से बचती है, उन बातों के पीछे के मर्म को अब जनता भी

पहले के मुकाबले अब कम समय में अच्छी तरह समझ रही है। लेकिन देश में चीन

समर्थक व्यापारिक घराने कौन कौन हैं, इसकी पहचान जरूरी है ताकि हम यह फर्क

महसूस कर सकें कि हमें जो कुछ दिखाने की कोशिश हो रही है और जो असली तस्वीर है,

दोनों में कितना अंतर है।


 

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