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देश में अब कोरोना के दो और टीकों को मंजूरी प्रदान कर दी गयी




देश में अब कोरोना संक्रमण के दोबारा बढ़ने के बीच ही दो नये कोरोना टीकों को मंजूरी दी गयी है. इसके अलावा एक खाने वाली गोली को भी इस्तेमाल के लिए स्वीकृत किया गया है। इस सूचना के साथ साथ दक्षिण अफ्रीका से यह सूचना भी आयी है कि नया ओमीक्रॉन वेरियंट ही अब डेल्टा वेरियंट पर भारी पड़ रहा है।




कुछ वैज्ञानिक उपलब्ध आंकड़ों के आधार पर यह मान रहे हैं कि अंततः यह ओमीक्रॉन ही खतरनाक डेल्टा वेरियंट के लिए कारगर साबित होगा। यानी जहर से जहर को काटने के सिद्धांत की बात हो रही है। लेकिन देश में अब अचानक से कोरोना रोगियों की संख्या तेजी से बढ़ने की वजह से फिर से प्रतिबंध लागू किये जा रहे हैं।

इसके लिए देश में आम जनता का गैर जिम्मेदाराना आचरण ही जिम्मेदार हैं, जिन्होंने कोरोना गाइड लाइनों का पालन नहीं किया है। इनमें विदेश से आने वालो के अलावा भीड़ में नाहक ही जाने वाले भी शामिल हैं। मिली सूचना के मुताबिक भारत के औषधि नियामक ने कोविड-रोधी दो टीकों के साथ ही एक ऐंटीवायरल गोली को आज मंजूरी दे दी।

विषय विशेषज्ञ समिति (एसईसी) ने एक दिन पहले ही बायोलॉजिकल ई के कॉर्बेवैक्स, सीरम इंस्टीट्यूट और नोवावैक्स के कोवोवैक्स टीके तथा मार्क ऐंड रेजबैक की मोलनुपिराविर टैबलेट को हरी झंडी दी थी। दो और टीकों को मंजूरी मिलने से भारत के पास तीसरी खुराक में और भी टीकों का विकल्प हो गया है।

केंद्र ने दूसरी खुराक के 9 महीने बाद तीसरी खुराक लेने की हाल ही में मंजूरी दी है। हालांकि शुरुआती चरण में स्वास्थ्यकर्मियों, अग्रिम मोर्चे पर तैनात कर्मचारियों और दूसरी बीमारियों से ग्रस्त वरिष्ठ नागरिकों को ही तीसरी खुराक दी जाएगी। इसके अलावा 15 से 18 साल के किशोरों के टीकाकरण को भी हरी झंडी दे दी गई है।

देश में अब एक खाने वाली दवा भी स्वीकृत हो चुकी

कॉर्बेवैक्स और कोवोवैक्स मार्च तक बाजार में उपलब्ध हो सकते हैं। बायोलॉजिकल ई द्वारा विकसित कॉर्बेवैक्स देश का पहला स्वदेशी रिसेप्टर-बाइंडिंग डोमेन (आरबीडी) प्रोटीन वैक्सीन है। नैनोपार्टिकल वैक्सीन कोवैक्स का उत्पादन सीरम के पुणे संयंत्र में किया जाएगा। इसी तरह ऐंटीवायरल दवा मोलनुपिराविर का उत्पादन देश में 13 कंपनियां करेंगी और कोविड से पीड़ित वयस्क रोगियों को आपात स्थिति में यह दवा दी जाएगी।

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मांडविया ने ट्वीट में कहा, कोविड के खिलाफ लड़ाई को और मजबूती मिली है। सीडीएससीओ ने एक ही दिन में 3 दवाओं को सीमित आपात उपयोग की मंजूरी मंजूरी दी है। दोनों टीके वयस्कों के लिए मंजूर किए गए हैं, लेकिन कोवोवैक्स का परीक्षण बच्चों पर भी किया जा रहा है।




नतीजे अच्छे आए तो भविष्य में बच्चों के लिए भी इस टीके को मंजूरी मिल सकती है। बायोलॉजिकल ई ने कहा कि कॉर्बेवैक्स को डायनावैक्स के सीपीजी 1018 एडजुवेंट और फिटकरी (एलम) के साथ विकसित किया गया है, जो शरीर में कोरोनावायरस के खिलाफ प्रतिरक्षा बढ़ाता है।

कंपनी ने टीके का तीन चरण का परीक्षण पूरा किया है, जिसमें देश की 33 जगहों पर 18 से 80 वर्ष के 3,000 वॉलंटियर शामिल थे। कंपनी का दावा है कि तीसरे चरण के अध्ययन में यह कोविशील्ड की तुलना में बेहतर प्रतिरक्षा प्रदान करने वाला रहा है।

कंपनी ने दावा किया है कि वायरस के वुहान स्वरूप के खिलाफ यह 90 फीसदी और डेल्टा स्वरूप के खिलाफ 80 फीसदी से ज्यादा असरदार रहा है। बायोलॉजिकल ई की प्रबंध निदेशक महिमा दातला ने कहा, कोविड सुरक्षा कार्यक्रम के प्रयास से टीके के विकास में तेजी आई और शुरुआती विकास में इसने अहम भूमिका अदा की।

सीरम इंडस्टीट्यूट के मुख्य कार्याधिकारी अदार पूनावाला ने कहा कि भारत में नोवावैक्स के टीके का उत्पादन और बिक्री कोवोवैक्स ब्रांड नाम से की जाएगी।

क्लीनिकल ट्रायल में एक टीका 90 फीसद कारगर रहा है

क्लीनिकल परीक्षण में यह टीका 90 फीसदी असरदार रहा है। नोवावैक्स के अध्यक्ष और मुख्य कार्याधिकारी स्टैनली सी एरिक ने कहा, नोवावैक्स और हमारी साझेदार सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया साथ मिलकर टीके को भारत सहित दुनिया भर में उपलब्ध कराएंगी।

देश में बच्चों को कोरोना का टीका देने के साथ साथ पहले ही कोरोना के दो टीके लगा चुके लोगों को तीसरा बुस्टर डोज देने पर भी विचार चल रहा है। जाहिर है कि दो और नये टीकों के आने से इस काम की गति और तेज होगी। वैसे भी देश में इतनी अधिक आबादी का टीकाकरण अपने आप में एक बड़ी उपलब्धि है।

जिसकी बदौलत कोरोना की दूसरी लहर के बाद उसे थामने में मदद मिली है। फिर भी देश में आम लोग अब भी जिस तरीके से गैर जिम्मेदार आचरण किया है उससे देश में तीसरी बार कोरोना की वजह से आर्थिक संसाधन खर्च करने पड़ रहे हैं, यह गलत बात है।



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