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दो महीने से शांतिपूर्ण आंदोलन आज उग्र हो गया, कई स्थानों पर हिंसा

  • बड़े किसान नेता तो अपने इलाके में मौजूद रहे

  • हर संगठन के रुट पर मौजूद थी मीडिया भी

  • कुछेक स्थानों पर बाद में बैरिकेड भी लगे

राष्ट्रीय खबर

नईदिल्लीः दो महीने से शांतिपूर्ण चल रहा आंदोलन आज अचानक उग्र हो गया। आज के

ट्रैक्टर परेड के दौरान यह हिंसा हुई। उस क्रम में अनेक लोग लाल किला तक जा पहुंचे,

जहां आंदोलनकारियों को नहीं जाना था। बात यही तक नहीं रूकी बल्कि कुछ लोग लाल

किला की दीवार पर भी चढ़ गये। यह कौन लोग थे और किस किसान संगठन से जुड़े हुए

लोग थे, इस बारे में दिल्ली पुलिस भी चुप है। लिहाजा यह सवाल उठ रहा है कि कहीं यह

भी किसानों के दो महीने से शांतिपूर्ण आंदोलन को भ्रमित करने की कोई नई साजिश तो

नहीं है।

क्यों है ऐसा संदेह
इस आंदोलन के दौरान ही पिछले तीन दिनों में कई स्थानों पर बिना नंबर की गाड़ियों पर पुलिस के अफसर आंदोलनकारियों के कैमरों में कैद हुए हैं। सोशल मीडिया पर यह सब कुछ सार्वजनिक तौर पर उपलब्ध है। जब मीडिया की मौजूदगी में आंदोलनकारियों के नेता अपने दल बल के साथ दूसरे इलाकों में थे तो यहां पर कौन से लोग आये थे

सरकार से कृषि कानूनों की वापसी की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे अन्य किसान

संगठन के नेता तो अपने दल बल के साथ उन रूटों पर ही नजर आये, जिनके लिए उन्हें

अनुमति दी गयी थी। इसलिए यह कौन लोग थे, यह सवाल फिर से महत्वपूर्ण हो गया है।

जेएनयू हिंसा और दिल्ली दंगा के वक्त भी ऐसे अज्ञात चेहरे नजर आये थे, जिनके बारे में

आज तक पुलिस पता नहीं लगा पायी। जेएनयू में छात्र संगठन के पदाधिकारियों पर

हमला करने वाले नकाबपोश भी आज तक गुमनाम ही रहे। इसलिए दो महीने से शांतिपूर्ण

चल रहे आंदोलन के असली आंदोलनकारियों के दूर रिंग रोड पर होने के दौरान वे कौन

लोग थे, जिन्होंने दिल्ली पुलिस को चकमा देकर लाल किला की प्राचीर तक की दूरी तय

की, यह बड़ा सवाल आंदोलनकारियों से कम और सरकार से बड़ा बन चुका है।

राजपथ पर परेड के दौरान ही हंगामा किसने प्रारंभ किया

राजपथ पर देश की आन, बान और शान का प्रदर्शन चल रहा था ठीक उसी समय इन

उपद्रवियों ने घमासान कर दिया। दोपहर 2 बजे तक किसान लाल किले की प्राचीर तक

पहुंच गए और वहां उस जगह अपने झंडे लहरा दिए जहां हर साल 15 अगस्त को

प्रधानमंत्री तिरंगा फहराते हैं। कहीं ट्रैक्टर से बैरिकेड तोड़ दिए गए, कहीं रास्ते में खड़े किए

गए बसों को पलट दिया गया तो कहीं पर तलवार से हमला कर दिया गया। पुलिस ने

किसानों को रोकने के लिए आंसू गैस के गोले दागे तो कुछ जगहों पर हल्का लाठीचार्ज

किया गया। पुलिस ने मंगलवार को लगभग 90 मिनट तक चली अफरातफरी के बाद

प्रदर्शनकारी किसानों को लालकिला परिसर से हटा दिया।

दो महीने से शांतिपूर्ण आंदोलन कर रहे मोर्चा ने घटना की निंदा की

श्रीगंगानगर से किसानों का बड़ा जत्था पांच फरवरी को रवाना होगासंयुक्त किसान मोर्चा ने ट्रैक्टर परेड के दौरान हिंसा में शामिल लोगों से मंगलवार को खुद

को अलग कर लिया और आरोप लगाया कि कुछ असामाजिक तत्वों ने घुसपैठ कर ली है,

अन्यथा आंदोलन शांतिपूर्ण था। संघ ने अवांछित और अस्वीकार्य घटनाओं की निंदा की है

और खेद जताया है। कुसंयुक्त किसान मोर्चा में किसानों के 41 संघ हैं। वह दिल्ली की कई

सीमाओं पर केंद्र सरकार के तीन कृषि कानूनों के खिलाफ हो रहे प्रदर्शन की अगुवाई कर

रहा है। ट्रैक्टर परेड के दौरान दिल्ली के आईटीओ पर एक किसान की मौत हो गई। पुलिस

ने बताया कि मृतक किसान से जुड़ी जानकारियां जुटाई जा रही हैं। पुलिस ने बताया कि

किसानों ने शव को तिरंगे में लपेट कर आईटीओ क्रॉसिंग पर रखा है और पुलिस को शव

पोस्टमॉर्टम के लिए नहीं ले जाने दे रहे हैं।

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