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कनाडा के चुनाव में दो लाख मतपत्र गायब होने के मामला सामने आया




ओटावाः कनाडा के चुनाव में दो लाख मतपत्र गायब होने के मामला तूल पकड़ रहा है। दरअसल इस चुनाव में जस्टिन ट्रूडो किसी तरह अपनी कुर्सी बचाने में कामयाब रहे हैं।




बहुमत से दूर होने की वजह से अब उन्हें विरोधी दलों की मदद से ही विशेष विधेयकों को पारित कराना पड़ेगा।

इस उधेड़बून के बीच ही वहां दो लाख मतपत्र गायब होने की खबर सार्वजनिक हो गयी है। बता दें कि यह कनाडा के चुनाव में अब तक का सबसे महंगा चुनाव रहा है।

जस्टिन ट्रूडो किसी तरह सत्ता में वापस तो आ गये लेकिन तीसरी बार के चुनाव में वह बहुमत हासिल नहीं कर पाये हैं।

अब सरकार की स्थिति कुछ ऐसी है कि महत्वपूर्ण विधेयकों को पारित कराने के लिए यह सरकार विरोधी दलों के समर्थन पर आश्रित हो गयी है।

चुनाव में उन्हें कांटे की टक्कर देने वाले एरिन ओ टूले ने कहा है कि यह सत्ता हथियाने का एक गंदा खेल था।




कोरोना संकट की वजह से यह चुनाव बाद में भी कराये जा सकते थे। अब दो लाख मतपत्र गायब होने की सूचना पर सभी के कान खड़े हो गये हैं।

बुधवार को यह सूचना सार्वजनिक हुई थी मतपत्र गायब हुए हैं जबकि पूर्ण बहुमत से ट्रूडो की पार्टी अब भी 12 सीट पीछे हैं।

कनाडा के चुनाव में पहली बार इतने मतपत्र लापता

36 दिनों के चुनाव प्रचार के बाद वोट के परिणाम जाहिर होने के बाद यह पता चला है। इसलिए लोग इन गायब हुए मतपत्रों का आखिर क्या हुआ है, इस बारे में सवाल उठाने लगे हैं।

कनाडा में ईमेल के जरिए भी मतदान करने की विधि लागू है। इसके तहत हर बार ही हजारों लोगों को या तो समय पर ईमेल नहीं मिलता है या ईमेल मिलने के बाद भी वे मतदान करने से चूक जाते हैं।

यह एक पूर्व विदित सत्य है। लेकिन इस बार पता चला है कि 1269979 मतपत्र इसके लिए जारी किये गये थे। इनमें से 209893 मतपत्र वापस नहीं लौटे हैं।

इनकी संख्या औसत से काफी अधिक होने की वजह से ही रास्ते में लापता हुए इन मतपत्रों के बारे में सवाल उठ गये हैं।



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