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दो बड़े ब्लैकहोल आपस में टकराये तो तेज रोशनी फैली

  • बहुत दूर तक अंतरिक्ष में फैला था प्रकाश

  • ब्लैकहोल अब भी इंसानी आंखों से ओझल

  • आने वाले दिनों में इनकी टक्कर फिर होगी

  • सुदूर अंतरिक्ष में फिर नजर आया नया नजारा

प्रतिनिधि

नईदिल्लीः दो बड़े ब्लैकहोल का टकराना कोई नई बात नहीं है। खगोल वैज्ञानिक पहले से

ही इस बात को जानते हैं कि इंसानी आंखों से ओझल रहने वाले इन खगोलीय पिंडों के बीच

आपसी टकराव होता रहता है। लेकिन पहली बार ऐसे दो बड़े ब्लैकहोल के टकराने के बाद

वहां से निकली तेज रोशनी को वैज्ञानिक देख पाये हैं। वैज्ञानिकों ने इस घटना को एक माह

पूर्व ही देख लिया था लेकिन इससे संबंधित हरेक तथ्य का विश्लेषण कर लेने के बाद

पहली बार इसके बारे में औपचारिक घोषणा की गयी है। घनघोर अंधेरे में रहने वाले दो

ब्लैकहोल एक दूसरे के प्रति आकर्षित होते हैं, इसकी जानकारी भी पहले से थी। एक

दैत्याकार ब्लैकहोल आकाश गंगा से भी दूर एक अन्य बड़े ब्लैकहोल को अपनी तरफ खींच

रहा है, इसके बारे में पहले ही जानकारी मिल चुकी है। इस बार दो बड़े ब्लैकहोल के टकराने

से जो तेज रोशनी फैली है, उसके बारे में शोध जारी है। वैसे भी खगोल विज्ञान यह कहता है

कि जब ऐसे ब्लैक होल आपस में टकराते हैं तो उनका प्रभाव आस के तारों पर भी पड़ता है।

भीषण गुरुत्वाकर्षण के दो आकारों के नजदीक आने के कारण आस पास के सारे तारे भी

इसके प्रभाव में आ जाते हैं। ऐसे तारों का ब्लैकहोल के अंदर टूटकर सोखे जाने के दौरान

उनके गैसों का भी विकिरण होता है। इसलिए समझा जा सकता है कि जब दो बड़े

ब्लैकहोल आपस में टकराये होंगे तो वहां से कितनी ऊर्जा का विकिरण हुआ होगा, जो

पृथ्वी पर स्थापित टेलीस्कोप से देखा जा सका है। विज्ञान के स्थापित और प्रमाणित

सिद्धांतों के अनुसार चूंकि ब्लैकहोल ही हमारी आंखों से ओझल हैं तो उनके टकराव को भी

नहीं देखा जा सकता।

दो बड़े ब्लैकहोल के टकराव में आस पास के तारे भी टूटते हैं

लेकिन दोनों के अंदर भीषण गुरुत्वाकर्षण के बीच असंख्य तारे भी समाये हुए हैं। हाल ही

में ब्लैकहोल के बाहरी आवरण से लौटने वाले रेडियो तरंगों की मदद से ब्लैकहोल के

पहचान की तकनीक विकसित हुई है। इसके जरिए कई ब्लैकहोलों का अनुमानित चित्र भी

तैयार किया जा सका है। इन दो बड़े ब्लैकहोल के पास ही मौजूद तीसरे ब्लैकहोल की वजह

से इन दोनों के टकराव के विकिरण को देख पाना संभव हुआ है। इस टकराव से निकली

ऊर्जा को अपनी तरफ खींचने के क्रम में इस तीसरे ब्लैकहोल ने रोशनी की स्थिति पैदा कर

दी थी।

इस घटना के बारे में वैज्ञानिकों का अनुमान है कि दोनो के टकराव से निकली भीषण ऊर्जा

से ही आस पास का इलाका विद्युती तौर पर चार्ज हो गया था। इसी कारण इस रोशनी को

देखा जा सका है। वरना ब्लैकहोल के होने अथवा टकराने को देख पाना संभव नहीं है।

अलबत्ता इनके गुरुत्वाकर्षण के प्रभाव में आकर टूटते और विखंडित होकर उसमें समाते

तारों को पहले भी देखा गया है। शोधकर्ताओं का अनुमान है कि इस टकराव का आकार

हमारे सूर्य से करीब डेढ़ सौ गुणा अधिक था और यह घटना शायद अंतरिक्ष में काफी दूर

घटित होने की वजह से वहां की रोशनी के संकेत को यहां तक पहुंचने में भी काफी वक्त

लगा है।

ऐसी घटनाओं में गुरुत्वाकर्षण बल का भी विकिरण

कैलिफोर्निया इंस्टिटियूट ऑफ टेक्नोलॉजी पासाडेना के वैज्ञानिक इस पर काम कर रहे हैं।

इससे जुड़े मैथ्यू ग्राहाम ने कहा कि ऐसी घटनाओं में गुरुत्वाकर्षण बल का भी विकिरण

होता है। उन्हें समझने और विश्लेषित करने के माध्यम से इन घटनाओँ को समझा जा

सकता है। यह भी माना जा रहा है कि प्रारभिक टकराव के बाद दोनों एक दूसरे की चक्कर

काट रहे हैं और करीब 18 महीने के भीतर वे टकराकर एक हो जाएंगे। उस दौरान और भी

ऊर्जा निकलेगी। इस वजह से अंतरिक्ष के उस इलाके पर भी वैज्ञानिक लगातार नजर रखे

हुए हैं ताकि वहां से फिर से रोशनी के विकिरण को देखा और समझा जा सके


 

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