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दो आंदोलनकारी किसानों की और मौत से मामला और गरमाया

  • बारिश में भी किसानों का आंदोलन 39वें दिन जारी

  • बात नहीं बनी तो गणतंत्र दिवस पर अलग परेड

  • कुंडली सीमा पर दो किसानों ने आज दम तोड़ा

  • अनेक संगठनों के लोग भी समर्थन में पहुंचे

राष्ट्रीय खबर

नयी दिल्ली: दो आंदोलनकारी किसानों की मौत और कड़ाके की ठंड के बीच बारिश के बीच

भी किसानों का आंदोलन आज 39वें दिन भी जारी रहा। कल इसी आंदोलन के संबंध में

केंद्र सरकार के साथ किसान यूनियनों के नेताओं की फिर से वार्ता होनी है। आंदोलन की

मूल मांगों में से दो पर पहले ही सहमति बन चुकी है। इस बीच सोनीपत के कुंडली बॉर्डर

पर कृषि कानूनों के खिलाफ आंदोलन कर रहे दो किसानों की रविवार को मौत हो गई है।

अंदेशा है कि ठंड में हृदयघात होने से दोनों की मौत हो गई। मिली जानकारी के अनुसार

आज गोहाना के गांव गंगाना का किसान कुलबीर सिंह (52) पारकर माल के पास स्थित

अपने टैंट में मृत पाये गये। गांव से साथ आए किसानों ने मामले की सूचना कुंडली थाना

पुलिस को दी। किसानों ने बताया कि कुलबीर शनिवार रात को ठीक था। वह थोड़ी थकान

महसूस कर रहा था। रात खाना खाने के बाद टैंट में सो गए थे। सुबह उठे तो कुलबीर मृत

मिला। वह लगातार आंदोलन में पहुंच रहा था। अब पांच दिन से वह आंदोलन स्थल पर

था। उसके कुछ देर बाद ही पंजाब के जिला संगरूर के गांव लिदड़ा का किसान शमेशर (45)

की हालत बिगड़ गई। उन्हें उपचार के लिए नागरिक अस्पताल लाया गया, लेकिन उनकी

मौत हो गई। साथी किसान कर्म सिंह ने बताया कि शमशेर पांच दिन पहले पंजाब से आया

था। आज को उसके सीने में दर्द हुआ था। उसे सामान्य अस्पताल में लेकर गए। जहां

उसकी मौत हो गई। पुलिस ने शव का पोस्टमार्टम कराया। शमशेर के साथियों ने

अस्पताल में सरकार के खिलाफ नारेबाजी भी की।

दो आंदोलनकारियों की मौत के बाद नारेबाजी भी हुई

आज बारिश में भी किसानों का आंदोलन रविवार को 39वें दिन जारी रहा। राष्ट्रीय

राजधानी की सीमा पर किसान संगठनों के लोग बारिश में भी धरना प्रदर्शन करते रहें और

मांगें पूरी होने तक आंदोलन जारी रखने का संकल्प व्यक्त करते रहें। किसान संगठनों

और सरकार के बीच कल अगले दौर की बातचीत निर्धारित है। इस बीच किसान संगठनों

ने अपना रुख कड़ा कर दिया है और कहा है कि वार्ता विफल होने पर 26 जनवरी को

गणतंत्र दिवस के दिन राजधानी में ट्रैक्टर ट्राली परेड निकली जाएगी । इससे पहले

राजभवन का घेराव करने तथा आंदोलन के कई अन्य कार्यक्रमों की भी घोषणा की है।

किसानों के समर्थन में वकीलों , पूर्व रक्षाकर्मियों, मजदूर संगठनों और कलाकारों ने अपना

समर्थन दिया है । कुछ लोगों ने विदेश से आकर एकजुटता व्यक्त की है । किसान संगठन

राशन पानी लेकर सीमा पर डटे हैं और लंबे समय तक आंदोलन जारी रखने की बात कह

रहे हैं।

किसान बोता है तो पूरा हिंदुस्तान खाता है: हुड्डा

सोनीपत: हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री एवं नेता विपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने रविवार को कहा

कि किसान की तकलीफ पूरे देश की तकलीफ है, क्योंकि बोता तो किसान है लेकिन खाता

पूरा हिंदुस्तान है। श्री हुड्डा ने शनिवार को यहां पत्रकार वार्ता में कहा कि कहा कि सरकार

को बिना देरी लगाए तीनों कृषि कनूनों को रद्द करना चाहिए और किसानों की सहमति

से ही भविष्य में कोई फैसला लेना चाहिए। उन्होंने कहा कि अब हालात बेहद

चिंताजनक हो चुके हैं। लगातार आंदोलनरत किसानों की जानें जा रही हैं। पिछले 24 घंटे

में तीन किसानों की शहादत हो चुकी है। इसलिए अन्नदाता के प्रति सरकार की अनदेखी

बेहद पीड़ा पहुंचाने वाली है। उन्होंने कहा कि सरकार ने बुजÞुर्गों तक को भी नहीं बख्शा

और उनके पेंशन में हर साल होने वाली 250 रुपये की बढ़ोतरी को भी रोक दिया। हालांकि

जिस गठबंधन सहयोगी जेजेपी के सहारे ये सरकार चल रही है उसने बुजर्गों को 5100

रुपये पेंशन देने का वादा किया था। लेकिन सत्ता में आने के बाद उसने अपने वादे के उलट

पहले से जारी पेंशन बढ़ोत्तरी को भी रोकने का काम किया है।

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