fbpx Press "Enter" to skip to content

टीवी रेटिंग की धोखाधड़ी का खेल अब बंद हो

टीवी रेटिंग के मामले में महत्वपूर्ण सूचना यह है कि अगले तीन महीनों तक यह जारी नहीं

की जाएगी। दरअसल टीआरपी के माध्यम से ही टीवी रेटिंग का खेल ऊपर नीचे होता

रहता है। कौन सा चैनल सबसे ज्यादा देखा जाता है, इसी बाजारवाद के तर्क पर

अधिकाधिक विज्ञापन बटोरे जाते हैं। इस मुद्दे पर विवाद होने की वजह से बीएआरसी ने

ऐसा फैसला लिया है। वैसे इस टीवी रेटिंग की बात करें तो इन टीवी चैनलों की कुल पहुंच

आज भी दूरदर्शन के मुकाबले बहुत कम है। टीवी चैनल जिस तकनीक पर आधारित

प्रसारण करते हैं, उनके जरिए भारत के अधिकांश दूरस्थ गांवों तक वे नहीं पहुंच पाये हैं।

जिन गांवों में किसी तरह लोगों ने डिश टीवी खरीद भी लिये हैं तो कई बार समय पर

रिचार्ज नहीं करा पाने की वजह से ऐसे टीवी चैनल वहां देखे नहीं जाते हैं। लिहाजा कागजी

आंकड़ों से खेलने से तो बेहतर है कि सरकार भी व्यवहारिक तथ्यों पर अपनी विज्ञापन

नीति तय करें। वरना अपनी पसंदीदा चैनल को अधिक राजस्व का लाभ दिलाने का यह

खेल अंततः देश की अर्थव्यवस्था में कोई फायदा नहीं पहुंचाने वाला है। मुंबई में जो

हेराफेरी पकड़ी गयी है, वह स्वतः सिद्ध है। वैसे भी इसके जरिए टीवी रेटिंग तय करना

समझदारी भरा फैसला तो नहीं है। कोई भी व्यक्ति अगर पैसे के प्रभाव से दिनभर अपने

घर में टीवी चालू रखता है तब भी स्वाभाविक इंसानी प्रवृत्ति की वजह से वह एक चैनल

पर टिककर नहीं रहेगा, यह तय बात है। इसके अलावा उस घर के सारे लोग पूरे समय तक

सिर्फ टीवी के सामने ही बैठे रहेंगे, यह भी सत्य से परे हैं।

टीवी रेटिंग में अनपढ़ भी अंग्रेजी चैनल देखता है

इसलिए जबरन की रेटिंग के खेल को बढ़ावा देने वाले बड़े चैनलों को एक कतार में खड़ा

कर उन्हें बराबर बराबर विज्ञापन देने का काम सरकार को करना चाहिए। इससे नीति

निर्धारकों को भले ही अपने पसंद के चैनलों को फायदा पहुंचाने में दिक्कत जाएगी लेकिन

अंततः सरकार जिस जनता तक अपनी बात पहुंचाना चाहती है, वह समान रुप से प्रसारित

होगी। भारत में दूरदर्शन की पहुंच इन सारे टीवी चैनलों की कुल पहुंच से मुकाबले बहुत

अधिक है, यह वैज्ञानिक तथ्य है क्योंकि दूरदर्शन जिन इलाकों तक पहुंचा है, वहां ऐसे

टीवी चैनल नहीं पहुंच सकते क्योंकि ऐसी आधारभूत संरचना को खड़ा करने के पीछे

भारत सरकार ने काफी धन खर्च किया है। ठीक उसी तरह भारत की सरकारी टेलीफोन

कंपनी बीएसएनएल का मुकाबला कर पाना किसी दूसरे मोबाइल सेवा प्रदाता के लिए

संभव नहीं है। निजी कंपनियां मुनाफा का कारोबार करती हैं जबकि सरकारी प्रतिष्ठानों ने

देश की आधारभूत संरचना को विकसित करने का काम किया है। यह अंतर इतनी जल्दी

समाप्त नहीं होने वाला। इसलिए दूरदर्शन और बीएसएनएल को शीर्ष प्राथमिकता सूची में

रखना भी सरकार का दायित्व है। वर्तमान में यह दोनों ही सरकारी उपेक्षा के सबसे बड़े

शिकार नजर आते हैं। सरकार को सबसे पहले अपनी सोच में तब्दीली लाने की

आवश्यकता है। टीवी रेटिंग में जो निजी विज्ञापनदाताओं की प्राथमिकताएं हैं, वह भी

विज्ञापन देने वाली कंपनियों के जिम्मे छोड़ दिया जाना चाहिए।

जिसे विज्ञापन देना है उसके जिम्मे यह काम छोड़िये

हर विज्ञापन दाता यह अच्छी तरह जानता है कि जिस विज्ञापन पर पैसा खर्च कर रहा है,

उसका लाभ उसे मिलना चाहिए। लिहाजा वह सिर्फ टीवी रेटिंग के भरोसे कभी नहीं रहता।

वह अपने स्तर पर भी बाजार में सर्वेक्षण कर इसकी जांच कर लेता है कि किस टीवी चैनल

में विज्ञापन देने का कितना लाभ उसे मिल रहा है। लिहाजा टीवी रेटिंग के नाम पर हो रहे

गोरखधंधे को प्रोत्साहित करने अथवा उसे जारी रखने का कोई औचित्य नहीं है। इस बात

को समझना होगा कि टीवी रेटिंग के बहाने भी विज्ञापन जारी करने में बिचौलिये हावी होते

हैं। जब यह रेटिंग ही नहीं होगी तो बिचौलिये अपने आप ही गायब हो जाएंगे। आज के दौर

में खास कर कोरोना से उत्पन्न आर्थिक संकट के दौर में इस पर ध्यान देना सरकार की

प्राथमिकता भी है क्योंकि केंद्र और राज्य सरकारें सभी इस वक्त आर्थिक तंगी को झेल

रही हैं। जिसे विज्ञापन के लिए पैसे खर्च करना है उसके जिम्मे यह काम छोड़ देना चाहिए

कि वह किस टीवी चैनल को विज्ञापन देकर कितना लाभ पाता है। जहां तक सरकारी

विज्ञापनों का सवाल है तो सभी को बराबर बराबर देकर भी सरकार बड़ी आसानी से इस

बात को समझ सकती है कि टीवी रेटिंग की दावेदारी का असली सच क्या है क्योंकि

सरकारी विज्ञापनों की पहुंच के जरिए सरकार खुद यह समझ जाएगी कि उसके विज्ञापन

किस वर्ग तक कैसे पहुंचे। बीएआरसी ने जिस प्रतिबंध को तीन महीने के लिए लागू किया

है, उसे सरकार भी मानें तो टीवी चैनलों का यह गोरखधंधा ही बंद हो जाएगा।


 

Spread the love
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
More from HomeMore posts in Home »
More from अपराधMore posts in अपराध »
More from घोटालाMore posts in घोटाला »
More from ताजा समाचारMore posts in ताजा समाचार »
More from साइबरMore posts in साइबर »

Be First to Comment

Leave a Reply

... ... ...
%d bloggers like this: