Press "Enter" to skip to content

तूफानगंज इलाके में भाजपा छोड़कर तृणमूल में भाग रहे समर्थक




कूचबिहारः तूफानगंज इलाके में भाजपा खेमा में तटबंध टूटने जैसी हालत है। भाजपा




छोड़कर तृणमूल में शामिल होने वालों की बाढ़ आ गयी है। फिर से टीएमसी के सरकार में

आने के बाद यहां बेहतर प्रदर्शन करने के बाद भी भाजपा के साथ ऐसा क्यों हो रहा है,

इसके दो कारणों की अधिक चर्चा होने लगी है। लोग मानते हैं कि उत्तर बंगाल में भाजपा

का प्रदर्शन काफी अच्छा रहा है। इसी वजह से यहां के भाजपा नेता उत्साहित भी हैं।

लेकिन अब तूफानगंज इलाके से जो संकेत मिल रहे हैं, उससे यह खतरा भी बढ़ रहा है कि

धीरे धीरे दूसरों इलाकों तक भी यह बीमारी फैल जाएगी। तूफानगंज इलाके की भाजपा

विधायक इलाके में लगातार दौरा कर अपने समर्थकों का मनोबल बढ़ाने की कोशिशों में

लगी हैं। इसके बाद भी आज तूफानगंज और नाटाबाड़ी इलाके में एक सौ से अधिक भाजपा

समर्थकों ने तृणमूल का झंडा थाम लिया है। बलरामपुर और पालपाड़ा इलाके में भी सौ से

अधिक परिवारों ने टीएमसी में योगदान किया है। चुनाव से पूर्व यह सभी भाजपा समर्थक




ही थे। मिली जानकारी के मुताबिक तूफानगंज के ही दक्षिण फली मारी के अस्सी परिवार,

शिलघाघरी के 29 परिवार, नाककाटी के 50 परिवार भाजपा छोड़कर तृणमूल में शामिल हो

गये हैं। चर्चा है कि अभी और लोग टीएमसी में शामिल होने वाले हैं। चुनाव तक भाजपा का

झंडा ढोने वाले क्यों दल बदल रहे हैं, इस बारे में समझा जा रहा है कि दरअसल सत्ता दल

की तरफ जाने में लोगों को फायदा दिख रहा है।

तूफानगंज और नाटाबाड़ी से टीएमसी हार चुकी है

यह स्थिति तब है जबकि तूफानगंज और नाटाबाड़ी दोनों में टीएमसी प्रत्याशी चुनाव हार

गये हैं। इनमें से अधिकांश लोग राजनीतिक परेशानियों और प्रताड़ना से बचने के लिए

खेमा बदल कर रहे हैं। दूसरी तरफ पार्टी बदलने वालों का कहना है कि भाजपा ने उन्हें

गलत सलत समझाया था। अब सच्चाई समझ लेने के बाद वे तृणमूल में जाना पसंद

करते हैं। समझा जाता है कि सरकारी योजनाओं का लाभ पाने के लिए भी यह खेमा बदल

हो रहा है क्योंकि अंततः सरकार तो तृणमूल की ही है।



More from एक्सक्लूसिवMore posts in एक्सक्लूसिव »
More from पश्चिम बंगालMore posts in पश्चिम बंगाल »
More from राजनीतिMore posts in राजनीति »

Be First to Comment

Leave a Reply

Mission News Theme by Compete Themes.
%d bloggers like this: