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त्रिवेणी सैनिक के वरिष्ठ अधिकारी की गोली मारकर हत्या

  • पकरी बरवाडीह के एजीएम गोपाल सिंह को गोली मारी गयी
  • गोली लगने से घटनास्थल पर ही हुई अधिकारी की मौत
  • किसी उग्रवादी संगठन ने अब तक नहीं ली है जिम्मेदारी
अशोक शर्मा- इंदजीत  कुमार गिरि

हजारीबागः त्रिवेणी सैनिक माइनिंग के वरिष्ठ अधिकारी गोपाल सिंह की

आज रात हत्या कर दी गयी। अज्ञात अपराधियों ने उनकी गोली मारकर

हत्या की है। वह पकरी बरवाडीह कोल माइंस के एजीएम  पद पर कार्यरत

थे।  प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक  गोली लगने से गोपाल सिंह की मौत

घटनास्थल पर हो गई थी।

इस घटना की जिम्मेवारी किसी उग्रवादी आपराधिक संगठन ने अभी तक

नहीं ली। यह घटना बुधवार की रात्रि 9  बजे की है। घटना की पुष्टि सदर

थाना प्रभारी नीरज कुमार सिंह ने की है। घटना के संदर्भ में प्राप्त जानकारी

के अनुसार त्रिवेणी सैनिक कोल माइनिंग कंपनी के एजीएम गोपाल सिंह

अपना निजी काम को लेकर रात्रि में अपने आवास से  हजारीबाग शहर के

स्थित जुगनू पार्क  में गये थे। घटनाक्रम को देखकर ऐसा प्रतीत होता है कि

अपराधी उनका लगातार पीछा कर रहे थे। इसी दरमियान अपराधियों ने

मौका पाकर जुलू पार्क में ही गोपाल सिंह को गोली मारकर हत्या कर दी।

अपराधियों द्वारा दागी गयी तीन गोली गोपाल सिंह के सीने में लगी है ।

जिस कारण उसकी मौत घटनास्थल पर ही हो गई। घटना की जानकारी

मिलने पर हजारीबाग सदर थाना प्रभारी नीरज सिंह अपने दल बल के साथ

घटनास्थल पर पहुंचकर मृत शरीर को अपने कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के

लिए सदर अस्पताल हजारीबाग भेज दिया तथा अपराधियों की धरपकड़ के

लिए छापामारी अभियान किया जा रहा है।  शहर के सभी मुख्य रास्तों पर

बैरिकेडिंग लगाकर चेकिंग अभियान चलाया जा रहा है। जिससे अपराधियों

को धर पकड़ संभव हो सके।

त्रिवेणी सैनिक के अधिकारी ने नक्सलियों का विरोध किया

गोपाल सिंह के संदर्भ में प्राप्त जानकारी के अनुसार एनटीपीसी की पकरी

बरवाडीह क्षेत्र में जमीन अधिग्रहण तथा कोल माइंस खुलवाने में त्रिवेणी

सैनिक के एजीएम गोपाल सिंह की महत्वपूर्ण भूमिका रही है।  गोपाल सिंह

का अधिग्रहण एवं उत्खनन समेत माइनिंग के अन्य कामों में महारत

हासिल थी , क्षेत्र में जमीन अधिग्रहण करना तथा विरोध करने वाले

व्यक्तियों को साम,  दाम, दंड, भेद किस तरह का प्रयोग करके जमीन

अधिग्रहण एवं माइंस खुलवाने में एक्सपर्ट माने जाते रहे थे। बड़कागांव क्षेत्र

में बहुत कम समय में प्रशासन समेत अन्य क्षेत्रों में अपनी अच्छी खासी

पहचान बना रखी थी।

पिछले नक्सली हमले में गाड़ी जलाने का वीडियो यहां देखें

वही  चीरू बरवाडीह कोल माइंस खुलवाने में

महत्वपूर्ण भूमिका होने की वजह से गोपाल सिंह कई अपराधिक गिरोह एवं

उग्रवादी संगठन के निशाने पर थे। वर्ष 2018  –  2019 मैं प्रतिबंधित

नक्सली संगठन भाकपा माओवादियों ने चिरू बरवाडीह कोल माइंस पर

लेवी को लेकर गाड़ी जलाने एवं कोल माइंस बंद करने समेत अन्य कई

घटनाओं को अंजाम दिया था। उन तमाम घटनाओं के बावजूद भी गोपाल

सिंह ने माओवादियों के सामने घुटने नहीं टेके था। तब से वह माओवादियों

के निशाने पर भी थे।

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