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त्रिपुरा में भाजपा और आईपीएफटी गठबंधन सरकार का महा संकट

भूपेन गोस्वामी

गुवाहाटी : त्रिपुरा में भाजपा और उसके सहयोगी दल इंडिजीनिस पीपुल्स फ्रंट ऑफ त्रिपुरा

(आईपीएफटी) के बीच आदिवासियों के विकास के मुद्दों को लेकर टकराव बढ़ता ही जा रहा

है। आदिवासियों के विकास के मुद्दों को लेकर त्रिपुरा में गठबंधन सरकार दिन-प्रतिदिन

बहुत गर्मा गर्मी हो रही है। त्रिपुरा में भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव राम माधव के आगमन

से लगता है कि भाजपा और आईपीएफटी के बीच आंतरिक कलह की आग भड़क गई है।

 उत्तर पूर्वी   लोकतांत्रिक गठबंधन , नेडा के नेताओं ने गुवाहाटी में आज कहा कि इस

राजनीतिक संकट में समाधान के लिए केंद्रीय गृह मंत्री के निर्देश में पार्टी महासचिव

अगरतला पहुंचे और त्रिपुरा भाजपा गठबंधन पार्टी के साथ एक तत्काल बैठक बुलाएं।इस

संकट में बीजेपी नॉर्थ ईस्ट के प्रभारी राम माधव ने आईपीएफटी नेताओं के साथ एक

बैठक की, जिसमें आईपीएफटी सुप्रीमो एनसी देबबर्मा, आईपीएफटी के महासचिव मेवर

कुमार जमातिया और पार्टी के अन्य उच्च पदाधिकारी शामिल थे।उत्तर पूर्व में इस

राजनीतिक स्थिति में, पार्टी हाईकमान अब त्रिपुरा में गठबंधन सरकार बनाए रखने के

लिए उत्सुक है। लेकिन बैठक के बाद पार्टी महासचिव राम माधव ने पार्टी अध्यक्ष जेपी

नड्डा और गृह मंत्री अमृत शाह को सूचित किया कि समस्याएं “मामूली” मुद्दों के रूप में

नहीं हैं।इस बीच, आईपीएफटी की ओर से त्रिपुरा आदिवासी क्षेत्र स्वायत्त जिला परिषद

(एडीसी) के मुख्यालय पर बुलाया गया 24 घंटे का बंद शांतिपूर्ण रहा और आज सुबह

समाप्त हो गया। आईपीएफटी अपने एक समर्थक की गिरफ्तारी का भी विरोध कर रहा है।

यह हड़ताल शांतिपूर्ण रही और इस दौरान कोई भी अप्रिय घटना नहीं हुई। आईपीएफटी के

नेताओं और विधायकों ने मुख्यमंत्री बिप्लब कुमार देब के नेतृत्व वाली सरकार की

आलोचना करते हुए कहा कि यदि सरकार आदिवासियों के विकास से जुड़े हुए मुद्दों पर

ध्यान नहीं देगी तो गठबंधन टूट सकता है।

त्रिपुरा में भाजपा का सहयोगी ही भाजपा का आलोचक

आईपीएफटी के विधायक बृषकेटु देबबर्मा ने कल खुमलंग में समर्थकों को संबोधित करते

हुए कहा कि भाजपा गठबंधन के सिद्धांतों का पालन नहीं कर रही है और गैर-जरूरी

वक्तव्य देकर लोगों को मूर्ख बना रही है। आईपीएफटी के समर्थक आदिवासियों के

विकास से जुड़े हुए मुद्दों को उठा रहे हैं लेकिन पुलिस उन्हें बेवजह परेशान कर रही है।

आईपीएफटी नेता ने कहा, त्रिपुरा सरकार में गठबंधन सहयोगी होने के कारण लोग हमसे

भाजपा की ओर से किए गए चुनावी वादों के बारे में पूछ रहे हैं। भाजपा ने चुनाव से पहले

बहुत बड़े-बड़े वादे किए थे जिन पर आम जनता की तरह हमने भी विश्वास कर लिया था,

लेकिन अब वे झूठे प्रतीत हो रहे हैं। हम विधायक के तौर पर अपने-अपने क्षेत्रों में विरोध

का सामना कर रहे हैं। विधायकों के पास कोई शक्ति नहीं है और ऐसा लगता है कि धीरे-

धीरे सत्ता काे केन्द्रित किया जा रहा है।इन सब बातों के बाद, राम माधव ने

मीडियाकर्मियों से कहा, “हमारे बीच जो भी मतभेद हैं वे सभी मामूली हैं। आईपीएफटी

अभी भी इस सरकार और नेडा के एक घटक में भाजपा की सहयोगी है। मैंने आईपीएफटी

के एक प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात की और उन्हें राज्य की बेहतरी के लिए काम करने के

तरीके सुझाए।राम माधब ने इस बारे में कहा कि मुख्यमंत्री और राज्य भाजपा नेतृत्व इस

बात पर चर्चा करेंगे कि  जनजातीय क्षेत्र स्वायत्त जिला परिषद के पूर्व चुनाव में

किस तरह की व्यवस्था की जाएगी ”।


 

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