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तृणमूल कांग्रेस ने मेघालय में कांग्रेस को तगड़ा झटका दिया




पूर्व मुख्यमंत्री मुकुल संगमा समेत 12 विधायक टीएमसी में

पूर्वोत्तर के राज्यो में ममता दीदी अब बड़ी ताकत बन रही

त्रिपुरा से मेघालय तक बन गयी है पहुंच

अपनी चुनौती को सही साबित कर रही हैं

भूपेन गोस्वामी

गुवाहाटी : तृणमूल कांग्रेस पूर्वोत्तर के राज्यों में अपनी उपस्थिति को मजबूत बनाने के लिए नए सिरे से जुट गई है। हाल में बंगाल में शानदार जीत के बाद पार्टी ने फिर से पूर्वोत्तर के राज्यों पर ध्यान केंद्रित किया है। त्रिपुरा, मणिपुर, अरुणाचल प्रदेश तथा मेघालय में पार्टी पूर्व में भी चुनाव लड़ती रही है तथा सीटें भी जीती हैं। लेकिन पिछले कुछ सालों से भाजपा की पकड़ मजबूत होने के कारण तृणमूल कमजोर पड़ी है। तृणमूल कांग्रेस से जुड़े सूत्रो के अनुसार, मणिपुर और त्रिपुरा ऐसे राज्य हैं जहां पार्टी को छह से दस फीसदी तक वोट पूर्व के चुनावों में मिले हैं।




इन राज्यों में मिले अच्छे मतों से ही पार्टी को राष्ट्रीय दल का दर्जा मिला है, जिसके लिए तीन राज्यों में छह फीसदी से ज्यादा वोट मिलने की शर्त है। केंद्र की मोदी सरकार जबसे सत्ता में आई है कांग्रेस कमजोर होती गई है। कांग्रेस में नेतृत्व की कमी के कारण ही आज राष्ट्रीय स्तर पर विपक्ष पूरी तरह से बिखरा हुआ है। कांग्रेस की इस स्थिति का लाभ उठाते हुए ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस लगातार कांग्रेस की जड़ें काट रही है। त्रिपुरा, गोवा जैसे राज्यों के बाद मेघालय में कांग्रेस को तोड़कर टीएमसी खुद मुख्य विपक्षी पार्टी बन गई है।

तृणमूल कांग्रेस की सर्वेसर्वा ममता बनर्जी का फोकस राष्ट्रीय स्तर की राजनीति पर है और कांग्रेस का कमजोर नेतृत्व उनके लिए फयदेमंद साबित हो रहा है। दरअसल, कांग्रेस को एक और बड़ा झटका तब लगा जब मेघालय में कांग्रेस के 18 में 12 विधायक तृणमूल कांग्रेस में शामिल हो गये।




तृणमूल कांग्रेस की पूर्वोत्तर प्रभारी ने दी जानकारी

पूर्वोत्तर के तृणमूल कांग्रेस के प्रभारी सह राज्यसभा सांसद सुस्मिता देब ने आज यहां जानकारी दी कि पूर्व मुख्यमंत्री मुकुल संगमा समेत कांग्रेस पार्टी के 18 में 12 विधायक तृणमूल कांग्रेस में शामिल हो गए हैं। इसी के साथ मेघायल में अब तृणमूल कांग्रेस मुख्य विपक्षी पार्टी बन गई है। सांसद सुस्मिता देब के मुताबिक इन सभी विधायकों ने शिलॉन्ग में टीएमसी ज्वाइन की।समझा जाता है कि विन्सेंट एच. पाला को मेघालय प्रदेश कांग्रेस कमेटी प्रमुख बनाये जाने के बाद उनके और पूर्व मुख्यमंत्री एवं कांग्रेस विधायक दल के नेता मुकुल एम संगमा के बीच सब कुछ ठीक नहीं चल रहा था। 

पिछले महीने कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने मुकुल संगमा और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष विन्सेंट एच पाला से एक साथ मुलाकात भी की थी। पाला की नियुक्ति के बाद संगमा ने कहा था कि इस संबंध में पार्टी नेतृत्व ने उनके मशविरा नहीं किया। जिसके बाद से भी संगमा के टीएमसी में शामिल होने की उम्मीद लगाई जा रही थी और अब संगमा समेत कुल 12 विधायकों ने पाला बदलकर कांग्रेस को तगड़ा झटका दिया है। विधानसभा में विपक्ष के नेता संगमा कथित तौर पर कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व से नाखुश चल रहे थे। इस बीच कांग्रेस विधायक एच एम शांगप्लियांग ने राज्य में पार्टी के 12 विधायकों के तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) में शामिल होने की बात कही।

अब मेघालय में ममता की पार्टी ही प्रमुख विरोधी दल

टीएमसी के एक वरिष्ठ नेता ने दावा किया कि नये विधायकों के साथ आने से तृणमूल कांग्रेस राज्य में प्रमुख विपक्षी दल बन गई है। सूत्रों ने कहा कि 2023 में मेघालय में होने वाले चुनावों को देखते हुए, राज्य में टीएमसी के विकल्पों का पता लगाने के लिए चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर की टीम के सदस्य शिलांग में हैं। मेघालय प्रदेश तृणमूल कांग्रेस की औपचारिक शुरुआत 2012 में राज्य की 60 में से 35 सीटों पर चुनाव लड़ने के इरादे से की गई थी।सूत्रों का कहना है कि असम समेत पूर्वोत्तर के कई राज्यों में अल्पसंख्यक आबादी की ज्यादा मौजूदगी भी तृणमूल के लिए फायदेमंद साबित हो सकती है। यह माना जा रहा है कि हाल में तृणमूल में शामिल हुई सुष्मिता देव के आने से तृणमूल योजनाबद्ध तरीके से खुद को असम एवं अन्य राज्यों में मतबूत बनाने का कार्य करेगी।



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