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खरबों की तादाद में जमीन से बाहर निकलेंगे कीड़े

  • अमेरिका के कुछ इलाकों में होगी यह घटना

  • पेड़ों पर चढ़ने के  बाद तेज आवाज निकालते हैं

  • लेकिन वे इंसानों के लिए कोई खतरा नहीं बनते हैं

  • पिछले सत्रह साल से जमीन के अंदर इंतजार में थे

राष्ट्रीय खबर

रांचीः खरबों की संख्या में छोटे छोटे कीड़े जमीन से बाहर निकलेंगे। उनके बाहर आने से

पूरा का पूरा इलाका ही कीड़ों से भर जाएगा। यह किसी साइंस फिक्शन फिल्म का दृश्य

नहीं है। वाकई ऐसा होने जा रहा है। अमेरिका के पूर्वी तट और मध्य पश्चिम के इलाकों में

खरबों की संख्या में यह टिड्डियों की तरह जमीन से बाहर निकलेंगे। जमीन में वे पिछले

17 वर्षों से दबे हुए थे और सही मौसम एवं तापमान का इंतजार कर रहे थे। उनके बाहर

निकलने का सही माहौल अब तैयार हो गया है। वैसे यह सिकाडा कीड़े टिड्डी की तरह

इंसानों के लिए खतरनाक नहीं हैं। आकार में भी वे टिड्डी से थोड़े छोटे होते हैं। अगले कुछ

हफ्तों में यह नजारा अमेरिका के उल्लेखित इलाकों में नजर आने जा रहा है। वैसे खरबों

की संख्या में उनके बाहर निकलने के बाद भी इंसानों के लिए डरने लायक कोई बात नहीं

है। वे जमीन से बाहर निकलने के बाद सबसे पहले अपना चमड़ा छोड़ेंगे। उसके बाद वे

अगले एक महीने तक वंशवृद्धि के लिए व्यस्त रहेंगे। एक पेड़ पर लाखों की संख्या में

मौजूद सिकाडा इस दौरान एक तेज आवाज भी निकालते हैं। करीब एक सौ डेसिबल के

तरंग की यह आवाज सुनने में बड़ी अजीब लगती है लेकिन यह दरअसल अपने साथी को

तलाशने की आवाज भर है। इस बार में अमेरिकन म्युजियम ऑफ नेचुरल हिस्ट्री की

विशेषज्ञ डॉ जेसिका वायर कहती हैं कि यह अजीब किस्म का नजारा होगा, जो इन इलाकों

में रहने वाले हर किसी को अपने घर के आस पास ही नजर आयेगा।

खरबों की संख्या में सिकाडा के अंडे जमीन में दबे पड़े थे

सिकाडा के अंडे हैं, इसकी जानकारी तो पहले से ही वैज्ञानिकों को थी। इस पर नजर रखी

जा रही थी कि पिछले सत्रह वर्षों से जमीन के अंदर पड़े अंडे कब बाहर आते हैं। सत्रह वर्षों

के इंतजार के बाद उनके बाहर आने का मौसम के साथ रिश्ता भी वैज्ञानिकों के लिए शोध

का नया विषय है। प्रति सत्रह साल के बाद ही खरबों की संख्या में वे बाहर क्यों निकलते हैं,

इसकी कोई वैज्ञानिक व्याख्या अब तक नहीं आयी है। अनुमान है कि जमीन में दबे होने

के बाद भी किसी खास मौसम और तापमान की वजह से ही अंडों में मौजूद हॉरमोन सक्रिय

हो उठते हैं। जमीन का तापमान 64 डिग्री होने के बाद ऐसा होता हुआ देखा गया है। इस

तापमान पर सिकाडा अंडों से बाहर निकलते हैं और चमड़ा छोड़ने के बाद सीधे पेड़ों पर

चढ़ने लगते हैं। उनकी जीवन भी मात्र तीन से चार सप्ताह का होता है। इसके बीच ही उन्हें

अगली पीढ़ी को तैयार करना होता है। अगली पीढ़ी के अंडे फिर से जमीन में दबे पड़े रहते

हैं और अगले 17 वर्षों के बाद सही मौसम के आते ही फिर से बाहर निकलते हैं। वैसे

वैज्ञानिकों ने यह साफ कर दिया है कि यह कीड़े न तो इंसानों को काटते हैं और न ही कोई

कष्ट देते हैं। यहां तक की लोगों के बगीचों में खरबों की  संख्या में होने के बाद भी वे पेड़ों

को कोई नुकसान नहीं पहुंचाते हैं। इन कीड़ों की प्राथमिकता एक साथी को खोजकर अपनी

पीढ़ी को लिए वंशवृद्धि करना ही होता है। इस पूरी प्रक्रिया के लिए उनके पास अधिकतम

चार सप्ताह का समय होता है। दूसरी तरफ अन्य प्राणियों के लिए यह सिकाडा बेहतर

भोजन के तौर पर भी उपलब्ध हो जाता है।

कई अन्य प्राणियों के लिए यह बेहतर भोजन भी है

आम तौर पर टिड्डी को लेकर जिस तरीके का भय होता है, वैसे इसके मामले में कुछ भी

नहीं है। टिड्डी के अंडे भी नमी वाले जंगलों में खास मौसम और तापमान का इंतजार करते

हैं। सही मौसम के आते ही टिड्डी भी अंडों से बाहर आते हैं। लेकिन टिड्डियों के साथ

खतरा यह है कि बड़ा होते ही उछलकर चलते हुए वे अपने रास्ते की पूरी हरियाली को

सफाचट कर जाते हैं। उछलकर चलने के दौरान उनकी कतार भी कई किलोमीटर तक लंबी

हो जाती है। उसके बाद वे उड़ने लगते हैं और जब वे उड़ते हैं तो आसमान काला हो जाता

है। अभी हाल ही में भारत के पश्चिमी इलाकों में टिड्डी के हमलों को झेला है, जो

पाकिस्तान के रेगिस्तानी जंगलों में पैदा होन के बाद आगे बढ़ आये थे। सिकाडा के मामले

में कई वैज्ञानिक मानते हैं कि कुछ न कुछ बदला है और इसी  वजह से वे चार साल पहले

ही बाहर निकल रहे हैं, जिसके कारण का अब तक कुछ पता नहीं है।

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